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जरूरी खबर: क्या लस्सी और फ्लेवर्ड मिल्क दोनों पर लगता है GST? जानिए कोर्ट ने क्या दिया आदेश

Tue, 24 Aug 2021 03:18 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Tue, 24 Aug 2021 03:18 PM IST
सार

ग्राहकों से लस्सी पर माल और सेवा कर (GST) नहीं वसूला जाएगा। लेकिन फ्लेवर्ड मिल्क पर 12 फीसदी कर लगेगा।

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lassi Buttermilk is exempt from GST but Flavored Milk Taxed At The Rate Of 12 Percent
लस्सी छाछ - फोटो : pixabay

विस्तार

लस्सी पीने वालों के लिए राहत भरी खबर है। गुजरात की एडवांस रूलिंग अथॉरिटी (एएआर) ने फैसला सुनाया है कि लस्सी पर माल और सेवा कर (GST) नहीं लगेगा। लेकिन फ्लेवर्ड मिल्क पर ग्राहकों से 12 फीसदी का टैक्स वसूला जाएगा। दरअसल वलसाड स्थित निर्माता और आपूर्तिकर्ता संपूर्ण डेयरी एंड एग्रोटेक ने लस्सी पर लागू जीएसटी की दर को लेकर एएआर-गुजरात से संपर्क किया था। अब कंपनी की दूध के उत्पादों पर लगने वाले टैक्स की कनफ्यूजन दूर हुई है। 

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यह कंपनी चार फ्लेवर में लस्सी बेचती है: पहला- प्लेन, बिना चीनी या नमक वाला। दूसरा- नमक और जीरा वाला; तीसरा, चीनी मिला स्ट्रॉबेरी फ्लेवर; और चौथा चीनी मिला ब्लूबेरी फ्लेवर। कंपनी ने जीएसटी अथॉरिटी से पूछा था कि क्या उनके ये उत्पाद लस्सी की श्रेणी में आते हैं। इन पर किस रेट से जीएसटी लगेगा क्योंकि कंपनी की लस्सी के पैकेज पर लिखा होता है कि वह टोंड मिल्क से बना है और यह डेयरी बेस्ड फर्मेंटेड ड्रिंक है।
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फ्लेवर्ड मिल्क और लस्सी को अलग ट्रीटमेंट 
मामले में एडवांस रूलिंग अथॉरिटी ने कहा है कि लस्सी दही, मसाले और पानी से बनती है और फ्लेवर्ड मिल्क की क्लासिफकेशन दही, लस्सी और छाछ से अलग है। इसलिए लस्सी पर जीएसटी नहीं लगेगा। फ्लेवर्ड मिल्क और लस्सी दोनों डेयरी उत्पाद हैं, लेकिन क्लासिफिकेशन की जटिलताओं की वजह से दोनों को अलग ट्रीटमेंट मिलता है। हाल ही में गुजरात एएआर ने ही अमूल के मामले में फ्लेवर्ड दूध पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने की बात कही थी। 
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कर्मचारियों को दी गई कैंटीन सुविधा पर जीएसटी नहीं
इससे पहले एएआर ने कहा था कि कैंटीन सुविधा के लिए अपने कर्मचारियों से वसूली गई रकम पर जीएसटी नहीं वसूला जा सकता। टाटा मोटर्स ने इस मामले में एएआर की गुजरात पीठ का दरवाजा खटखटाया था। कंपनी ने पीठ से इस पर फैसला देने का आग्रह किया था कि कर्मचारियों से कैंटीन सुविधा के बदले वसूली गई मामूली रकम पर जीएसटी लगेगा या नहीं।

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