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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Kotak Bank: After PPBL, now RBI's stick on Kotak Mahindra Bank, what will be its impact on customers?

Kotak Bank: पीपीबीएल के बाद अब कोटक महिंद्रा बैंक पर चला आरबीआई का डंडा, ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

Wed, 24 Apr 2024 07:15 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 24 Apr 2024 07:15 PM IST
सार

Kotak Bank: रिजर्व बैंक ने कहा कि पिछले दो वर्षों में नियामक बैंक के उच्चस्तरीय प्रबंधन के साथ लगातार संपर्क में रहा ताकि बैंक अपने आईटी से जुड़ी खामियों को दूर कर सके, पर इसके नतीजे बहुत सकारात्मक नहीं निकले। इस बीच यह भी देखा गया कि बैंक के डिजिटल लेनदेन जिसमें क्रेडिट कार्ड से जुड़े लेनदेन भी शामिल हैं, में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस कारण बैंक के आईटी सिस्टम पर भी काफी भार बढ़ गया है।

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Kotak Bank: After PPBL, now RBI's stick on Kotak Mahindra Bank, what will be its impact on customers?
कोटक महिंद्रा बैंक - फोटो : amarujala.com

विस्तार

एक बार फिर देश के बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक का डंडा निजी क्षेत्र के बड़े बैंक पर चला है। पेटीएम पेमेंट्स बैंक के बाद अब केंद्रीय बैंक की कार्रवाई का शिकार कोटक महिंद्रा बैंक हुआ है। आरबीआई ने बैंक के ऑनलाइन या मोबाइल बैंकिंग चैनल के जरिए नए ग्राहक जोड़ने और क्रेडिट कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी है। आरबीआई के अनुसार कार्रवाई का यह फैसला केंद्रीय बैंक की ओर से बीते दो वर्षों में की गई कार्रवाइयों के बाद लिया गया है। आइए जानते हैं भारतीय रिजर्व बैंक को कोटक महिंद्रा बैंक की जांच में क्या गड़बड़ियां मिलीं और इस कार्रवाई के बाद अब बैंक के ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? 

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कोटक महिंद्रा बैंक के खिलाफ क्यों हुई नियामकीय कार्रवाई?

बुधवार को केंद्रीय बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वर्ष 2022 और 2023 के दौरान रिजर्व बैंक की ओर से कोटक महिंद्रा बैंक की आईटी जांच की गई। इस दौरान बैंक के तकनीकी संसाधनों में कई गड़बड़ियां मिलीं जो नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुकूल नहीं थे। इस दूर करने में बैंक लगातार असफल रहा इस कारण उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है।

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बीते दिनों कोटक की सेवाएं ठप पड़ने से क्या है इस कार्रवाई का नाता?

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंक के पास मजबूत आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सूचना तंत्र से जुड़े जोखिम प्रबंधन का फ्रेमवर्क नहीं होने से पिछले दो वर्षों में कई बार इसकी कोर बैंकिंग और ऑनलाइन-डिजिटल बैंकिंग सेवाएं ठप पड़ गईं। हाल ही में 15 अप्रैल 2024 को भी बैंक को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा। इससे बैंक के ग्राहकों को गंभीर परेशानियां झेलनी पड़ी। बैंक अपने विस्तार के साथ अपनी आईटी सिस्टम की खामियों को दूर करने में असफल रहा है। 

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ग्राहकों को होने वाली परेशानियों पर आरबीआई ने अपने बयान में क्या कहा?

रिजर्व बैंक ने कहा कि पिछले दो वर्षों में नियामक बैंक के उच्चस्तरीय प्रबंधन के साथ लगातार संपर्क में रहा ताकि बैंक अपने आईटी से जुड़ी खामियों को दूर कर सके, पर इसके नतीजे बहुत सकारात्मक नहीं निकले। इस बीच यह भी देखा गया कि बैंक के डिजिटल लेनदेन जिसमें क्रेडिट कार्ड से जुड़े लेनदेन भी शामिल हैं, में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस कारण बैंक के आईटी सिस्टम पर भी काफी भार बढ़ गया है। नियामक के अनुसार भविष्य में बैंक के सर्वर ठप ना पड़ें और ग्राहकों को गंभीर परेशानियों से ना जूझना पड़े इसे देखते हुए ही उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिजर्व बैंक के अनुसार बैंक की आईटी से जुड़ी खामियां ना केवल ग्राहकों को प्रभावित करती है बल्कि डिजिटल बैंकिंग और भुगतान तंत्र के फाइनेंशियल इकोसिस्टम को भी प्रभावित करती हैं।

मौजूदा ग्राहकों पर आरबीआई की कार्रवाई का क्या असर पड़ेगा?

देश में बड़ी संख्या में लोग कोटक महिंद्रा बैंक की सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि रिजर्व बैंक की हालिया कार्रवाई से उनपर क्या असर पड़ेगा? आरबीआई के अनुसार कोटक महिंद्रा बैंक को अपने ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग चैनलों के माध्यम से नए ग्राहकों को जोड़ने व नए क्रेडिट कार्ड जारी करने की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से "बंद करने" का निर्देश दिया गया है। हालांकि, बयान में केंद्रीय बैंक की ओर से कहा गया है कि बैंक अपने क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं सहित अपने मौजूदा ग्राहकों को पहले की तरह सेवाएं प्रदान करना जारी रख सकेगा।

कोटक पर कार्रवाई मामले में अब आगे क्या होगा?

आरबीआई ने अपने बयान में कहा है कि बैंक पर लगाई गई पाबंदियों की समीक्षा की जाएगी। लेकिन बैंक को उससे पहले आरबीआई से मंजूरी लेकर एक व्यापक एक्सटर्नल ऑडिट करानी होगी। उस ऑडिट में सामने लाई गई कमियों और आरबीआई की जांच में मिली कमियों को दूर करने के बाद ही नियामक की ओर से की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।

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