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Is Kavach Installation Complete: देश की सबसे व्यस्त रेलवे पटरियों पर इंस्टॉलेशन अब भी अधूरा, फिर डेडलाइन खत्म

Sat, 27 Dec 2025 05:31 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 27 Dec 2025 05:31 PM IST
सार

स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर दिसंबर 2025 तक लागू करने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। अब तक करीब 25 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है, हालांकि रेलवे अधिकारी इसे 2026 में ऑपरेशनल करने की कोशिश में जुटे हैं।

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Kavach on Delhi-Mumbai and Delhi-Howrah routes misses deadline, now expected to be operational in 2026
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (फाइल फोटो)। - फोटो : संसद टीवी

विस्तार

स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' को देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा पर दिसंबर 2025 तक लागू करने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि दोनों कॉरिडोर पर कवच को 2026 में ऑपरेशनल करने की पूरी कोशिश की जा रही है।

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कवच एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जो लोको पायलटों को निर्धारित गति सीमा में ट्रेन चलाने में मदद करती है। जरूरत पड़ने पर यह सिस्टम खुद ब खुद ब्रेक लगाकर मानवीय चूक से होने वाले हादसों का जोखिम कम करता है।
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25 प्रतिशत ही काम हुआ पूरा

अधिकारियों के मुताबिक अब तक करीब 25 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष हिस्सों में अहम उपकरण लगाए जा रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि हम दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता रूट पर कवच को 2026 में चालू करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।


रेल मंत्रालय ने 7 अगस्त 2024 को इन रूटों पर मार्च 2025 तक काम पूरा होने की बात कही थी। बाद में बजट दस्तावेज रेलवे एस्टिमेट्स (संशोधित अनुमान 2024-25 और बजट अनुमान 2025-26) में इस समयसीमा को बढ़ाकर दिसंबर 2025 कर दिया गया।

अश्विनी वैष्णव ने क्या बताया?

17 दिसंबर को लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कवच वर्जन 4.0 को दिल्ली-मुंबई रूट के पलवल-मथुरा-नागदा सेक्शन और दिल्ली-हावड़ा रूट के हावड़ा-बर्धमान सेक्शन सहित कुल 738 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक कमीशन किया जा चुका है। शेष हिस्सों में काम जारी है।

उन्होंने बताया कि अब तक 7,129 किमी में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है और 800 टेलीकॉम टावर लगाए गए हैं। इसके अलावा 860 स्टेशनों पर स्टेशन कवच, 5,672 रूट किमी में ट्रैक-साइड उपकरण और 4,154 इंजनों में लोको कवच लगाया जा चुका है।

लोको पायलटों के लिए तकनीकी सहारा बेहद जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेनों की बढ़ती संख्या के बीच लोको पायलटों के लिए तकनीकी सहारा बेहद जरूरी हो गया है, ताकि मानवीय गलती से होने वाले हादसों को रोका जा सके। कवच के फील्ड ट्रायल 2016 में शुरू हुए थे और जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय एटीपी सिस्टम के रूप में अपनाया गया।



रेल मंत्रालय के अनुसार, कवच वर्जन 3.2 के अनुभव के आधार पर 16 जुलाई 2024 को उन्नत वर्जन 4.0 लॉन्च किया गया, जो भारतीय रेल नेटवर्क की विविध जरूरतों को पूरा करता है। फिलहाल गोल्डन क्वाड्रिलैटरल, गोल्डन डायगोनल और हाई-डेंसिटी नेटवर्क सहित 15,512 रूट किमी में ट्रैक-साइड कवच का काम चल रहा है। वहीं, 9,069 और इंजनों में कवच लगाने के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।

बड़ी चुनौती सीमित संख्या में स्वीकृत कंपनियों की 

अधिकारियों ने माना कि सबसे बड़ी चुनौती सीमित संख्या में स्वीकृत कंपनियां हैं। हालांकि अब स्वीकृत कंपनियों की संख्या पांच से अधिक हो गई है और 2026 तक इसके 20 से ऊपर जाने की उम्मीद है। भारतीय रेल के 78,000 किमी लंबे ब्रॉडगेज नेटवर्क में कवच को तेजी से लागू करने के लिए 50 से अधिक उपकरण निर्माताओं की जरूरत होगी।


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