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दिल्ली-एनसीआर में तैयार 1.78 लाख फ्लैट बेचने में लगेंगे 44 महीनेः रिपोर्ट

Wed, 13 Nov 2019 04:26 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 13 Nov 2019 04:26 PM IST
सार

  • देशभर में सबसे ज्यादा प्रभावित है दिल्ली-एनसीआर का आवासीय बाजार
  • 1.78 लाख तैयार मकानों को दिल्ली-एनसीआर में ग्राहकों का है इंतजार
  • दिल्ली-एनसीआर में बिके कुल मकानों में 74 फीसदी निर्माणाधीन मकानों की संख्या

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it will take 44 months for 1.78 lakh flat in delhi-ncr to be sold
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर सहित देश के प्रमुख शहरों में तैयार खड़े फ्लैटों को बेचने में डेवलपर्स को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। संपत्ति सलाहकार फर्म एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में तैयार फ्लैटों को निकालने में अभी कम से कम 44 महीने लग सकते हैं। 

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रिपोर्ट में कहा गया है कि तैयार मकान-फ्लैट निकालने में बंगलूरू सबसे आगे है और वहां महज 15 महीने में पुराने स्टॉक खाली हो जाएगा। देश में सबसे ज्यादा प्रभावित दिल्ली-एनसीआर का आवासीय बाजार है, इसीलिए यहां मकानों को बेचने में काफी दिक्कत आ रही है। 
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सितंबर तिमाही तक देश के प्रमुख सात शहरों दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) चेन्नई, कोलकाता, बंगलूरू, हैदराबाद और पुणे में बिक्री के इंतजार में तैयार मकानों की संख्या 6.56 लाख थी। मौजूदा बाजार परिदृश्य से यह संकेत मिलता है कि घरों के स्टॉक को निकालने में कितना समय लगेगा। इसके अनुसार, हैदराबाद में 16 महीने, पुणे में 27 महीने चेन्नई में 31 महीने, एमएमआर में 34 महीने और कोलकाता में 38 महीने का समय लगेगा।

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लगातार सुधर रहे हालात

एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि अब बिल्डर अपना स्टॉक निकालने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके अलावा बिल्डरों ने बाजार में अपनी आपूर्ति भी सीमित कर दी है। इस साल तीसरी तिमाही तक फ्लैटों का औसतन 30 महीने का स्टॉक बचा है, जो साल पहले की समान अवधि में 37 महीने था। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में 2018 की तीसरी तिमाही में बचे स्टॉक निकालने की अनुमानित अवधि 58 महीने थी, जिसमें 14 महीने की कमी आई है। पिछले साल के मुकाबले बिना बिके मकानों की संख्या में भी 5 फीसदी कमी आई है, जबकि दो साल पहले की तुलना में 12 फीसदी कम हुई है। 

सबसे ज्यादा स्टॉक मुंबई, एनसीआर में

ग्राहकों के इंतजार में खड़े सबसे ज्यादा तैयार मकान अभी एमएमआर में हैं, जबकि एनसीआर दूसरे पायदान पर है। एमएमआर में जहां 2.21 लाख इकाइयों को बिक्री का इंतजार है, वहीं एनसीआर में यह संख्या 1.78 लाख इकाइयों की है। इसके बाद पुणे का नंबर आता है, जहां 92,560 मकान अभी तक नहीं बिके हैं। सबसे कम मकानों की संख्या हैदराबाद में है, जहां 23,890 मकानों को ग्राहक का इंतजार है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तैयार मकानों को बेचने में 18-20 महीने का समय बेहतर स्थिति को दर्शाता है।

छूट के लिए निर्माणाधीन मकानों पर दांव लगा रहे ग्राहक

संपत्ति सलाहकार कंपनी प्रॉपटाइगर के अनुसार, सितंबर तिमाही में दिल्ली-एनसीआर में बिके कुल मकानों में 74 फीसदी निर्माणाधीन मकानों की संख्या रही। खरीदारों को फ्लैट की कीमत में मिलने वाले लाभ की वजह से रेडी-टू-मूव घरों की तुलना में निर्माणाधीन संपत्तियों को लोगों ने प्राथमिकता दी है। नकदी संकट की सबसे ज्यादा मार झेल रहे एनसीआर के बिल्डरों के लिए तैयार मकानों की बिक्री नहीं होने से संकट और बढ़ सकते हैं।   

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