आर्थिक संकट से जूझ रही एयरवेज का प्रदर्शन देखने के बाद रुपये लगाएंगे निवेशक
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कर्ज संकट से जूझ रही निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज में पैसे लगाने को लेकर निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। बाजार में कंपनी के शेयरों में आए उछाल को लेकर भी निवेशकों में ज्यादा उत्साह नहीं है और उनका मानना है कि यह तेजी हाल में बदली परिस्थितियों की वजह से है।
आईआईएफएल के मार्केट एवं कॉरपोरेट मामलों के कार्यकारी उपाध्यक्ष संजीव भसीन का कहना है कि कंपनी के शेयर अभी आउटपरफॉर्म कर रहे हैं। ऐसे में निवेशक यहां पैसे लगाने से पहले प्रदर्शन में स्थिरता देखना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि कर्जदाताओं की ओर से दो महीने के भीतर कंपनी के लिए निवेशक खोजने की कवायद चल रही है।
टाटा भी जेट एयरवेज में पैसे लगाने का विचार कर रही है, क्योंकि उसकी हिस्सेदारी वाली विस्तार एयरलाइंस अभी बेहतर स्थिति में है। सिटी ग्रुप का कहना है कि हालिया मदद से जेट एयरवेज अपने घाटे को पार करते हुए बेहतर स्थिति में आ सकती है। हालांकि, एचएसबीसी ने मध्यम अवधि में कंपनी के सामने वित्तीय और संचालन संबंधी समस्याएं आने की आशंका जताई और उसके शेयरों की रेटिंग मौजूदा स्थिति से घटा दी।
दो माह के शीर्ष पर शेयर
जेट एयरवेज के शेयर तीन दिनों में 24 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 271 रुपये के भाव पहुंच गए, जो उसके दो महीने का शीर्ष स्तर है। पिछले एक साल में कंपनी के शेयर करीब 56 फीसदी तक लुढ़के थे। पिछले दिनों कंपनी के संस्थापक नरेश गोयल के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने के बाद से शेयरों में उछाल जारी है।
हवाई किराया घटाने की कोशिश
जेट एयरवेज संकट के बाद उड़ान थमने से हवाई किराया आसमान पर पहुंच गया है। इसे काबू में करने के लिए जेट ने इस सप्ताह 50 विमानों का संचालन दोबारा शुरू करने का लक्ष्य रखा है, जबकि अप्रैल के आखिर तक 40 और विमानों को उड़ान के लिए शामिल किया जाएगा।
इससे पहले कंपनी के 50 विमानों को 25 अप्रैल तक के लिए निरस्त कर दिया गया था। नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला का कहना है कि अगले 4 से 8 सप्ताह में उड़ान क्षमता पूरी तरह सुधार दी जाएगी।