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विमान में इंटरनेट सुविधा 50 गुना तक होगी महंगी, दो घंटे के लिए चुकाने होंगे 1000 रुपये
Mon, 24 Dec 2018 05:04 AM IST
Gaurav Pandey
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: Gaurav Pandey
Updated Mon, 24 Dec 2018 05:04 AM IST
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उड़ान के दौरान विमान में यात्रियों को इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना की राह में सबसे बड़ा पेच इसकी लागत को लेकर है। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इस सुविधा पर लगने वाला हाई सैटेलाइट बैंडविड्थ चार्ज इतना ज्यादा होगा कि इससे इंटरनेट डाटा की दर 50 गुना तक महंगी हो जाएगी। यानी यात्रियों को महज दो घंटे की उड़ान के लिए करीब 1,000 रुपये चुकाने होंगे।
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ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी फर्म ह्यूग्स इंडिया के मुख्य तकनीकी अधिकारी के. कृष्णा का कहना है कि भारत में सेटेलाइट बैंडविड्थ चार्ज दुनिया के अन्य हिस्सों के मुकाबले 7-8 गुना महंगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश में बैंडविड्थ को केवल इसरो से प्राप्त किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में महज दो घंटे के इंटरनेट इस्तेमाल के लिए यात्री 50 गुना भुगतान नहीं करेंगे। लिहाजा देश में ओपन स्काई मैकेनिज्म की सख्त जरूरत है। अगर इन मसलों को हल नहीं किया गया तो योजना ठंडे बस्ते में जा सकती है। ह्यूग्स ने देश में विमान और जलयानों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।
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कृष्णा का कहना है कि इस सुविधा के लिए प्रति विमान करीब 5 लाख डॉलर के निवेश की जरूरत होगी और कोई भी भारतीय विमानन कंपनी इतने बड़े निवेश को राजी नहीं होगी जब तक कि उसे कमाई का भरोसा न हो, जो यात्रियों से ही हो सकती है। वर्तमान दर के हिसाब से इस सेवा पर सिर्फ बैंडविड्थ की लागत ही 70 से 80 फीसदी आती है।
चूंकि विमान में इंटरनेट कनेक्टिविटी तभी मिल सकती है जब वह 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर हो और इसके लिए सेटेलाइट नेटवर्क की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उड़ान के दौरान इंटरनेट सुविधा का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों का वैश्विक आंकड़ा भी महज 10 फीसदी है, जिससे देश में भी इस सुविधा के ज्यादा इस्तेमाल की संभावना कम ही दिखती है।