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ईपीएफपो के रिटर्न पर दबाव, घट सकता है पीएफ पर ब्याज

Sat, 29 Feb 2020 05:16 AM IST
गौरव पाण्डेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 29 Feb 2020 05:16 AM IST
सार

पीएफ पर ब्याज दर 8.65 फीसदी से घटकर 8.5 फीसदी हो जाएगी, पांच मार्च 2020 को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में इस पर विचार किया जा सकता है।

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Interest rates on provident funds may be reduced
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) निवेश पर कम रिटर्न मिलने की वजह से प्रोविडेंट फंड (पीएफ) जमा पर ब्याज दर घटाने पर विचार कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो इस साल वेतनभोगियों के पीएफ जमा पर ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। इस संबंध में ईपीएफओ ने 5 मार्च, 2020 को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक बुलाई है। इसमें वित्त वर्ष 2020 के लिए पीएफ जमा पर ब्याज दर 15 आधार अंक घटाकर 8.5 फीसदी करने पर चर्चा हो सकती है। वित्त वर्ष 2019 में इस पर ब्याज दर 8.65 फीसदी थी।

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सूत्रों ने बताया कि ईपीएफओ के लिए इस साल ब्याज दरें बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने बताया कि लॉन्ग टर्म एफडी, बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों से ईपीएफओ को मिलने वाले रिटर्न में सालभर में 50-80 आधार अंकों की कमी आई है। ईपीएफओ के निवेश पर निगाह रखने वाली ऑडिट समिति पीएफ जमा पर रिटर्न दर के बारे में बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक से पहले निर्णय कर सकती है।
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यह निर्णय ईपीएफओ के मुनाफे के आधार पर किया जाएगा। दरअसल, ईपीएफओ अपनी सालाना निवेश का 85 फीसदी हिस्सा डेट मार्केट में और 15 फीसदी हिस्सा ईटीएफ के जरिए इक्विटी में लगाता है। पिछले साल मार्च अंत में ईपीएफओ ने इक्विटी में कुल 74,324 करोड़ रुपये निवेश किया था, जिस पर 14.74 फीसदी रिटर्न मिला था।

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ब्याज दर घटी तो बिगड़ेगी धारणा

सूत्रों का कहना है कि वेतनभोगियों के लिए ब्याज दर काफी मायने रखती है। ऐसे में सरकार को यह भी ध्यान में रखना होगा कि पीएफ पर ब्याज दर घटने से उनकी धारणा कमजोर होगी। ईपीएफओ के 6 लाख सक्रिय उपभोक्ता हैं। ईपीएफओ ने 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। 



इसमें से करीब 4500 करोड़ रुपये दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) और आईएलएंडएफएस में लगाए गए हैं। इन दोनों को ही भुगतान करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डीएचएफएल दिवालिया समाधान प्रक्रिया से गुजर रही है, जबकि आईएलएंडएफएस को बचाने की कोशिश जारी है। 

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