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वित्तीय सुरक्षा: दिव्यांगता के लिए बीमा कंपनियां ला रहीं नए उत्पाद, हर साल बढ़ रहे 5-7 लाख दिव्यांग

Mon, 12 Aug 2024 05:39 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Mon, 12 Aug 2024 05:39 AM IST
सार

बढ़ती दिव्यांगता को देखते हुए बीमा कंपनियां नए उत्पाद ला रहीं हैं, जिससे लोगों को इलाज में काफी राहत मिलेगी। आंकड़ों के मुताबिक इलाज पर भारी खर्च से 19 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं। 

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Insurance companies are bringing new products for disability
वित्तीय प्रबंधन (सांकेतिक फोटो) - फोटो : amar ujala

विस्तार

विभिन्न वजहों से दिव्यांगता के बढ़ते मामलों के इलाज पर अत्यधिक खर्च के कारण बड़ी संख्या में लोगों को वित्तीय कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। वित्तीय सुरक्षा में इस महत्वपूर्ण अंतर को पहचानते हुए बीमा कंपनियां अब दिव्यांग लोगों के लिए नए उत्पाद पेश करने पर जोर दे रही हैं। बीमा कंपनियां स्वास्थ्य बीमा के तहत ऐसे लोगों को सुरक्षा प्रदान कर रही हैं। शारीरिक या मानसिक बीमारियों, दुर्घटनाओं और अप्रत्याशित घटनाओं से उत्पन्न होने वाली अस्थायी और स्थायी दोनों तरह की दिव्यांगता को अब बीमा में कवर किया जा रहा है। इन योजनाओं का प्रीमियम किस्तों या क्रेडिट कार्ड से भी दिया जा सकता है।
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हर साल बढ़ रहे 5-7 लाख दिव्यांग
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में हर साल लगभग 5 से 7 लाख लोग दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारियों के कारण अस्थायी या स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाते हैं। ये काम करने और आजीविका कमाने में सक्षम नहीं होते हैं। फ्यूचर जेनराली इंडिया इंश्योरेंस के मुख्य वितरण अधिकारी रमित गोयल ने कहा, दिव्यांगता के इलाज पर काफी खर्च होता है। इससे सामाजिक और वित्तीय मोर्चे पर बीमा की जरूरत महत्वपूर्ण हो जाती है।
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इलाज पर चला जाता है मासिक घर खर्च का 20%
राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) की वेबसाइट पर उपलब्ध अध्ययन से पता चलता है कि घर के मासिक खर्च का लगभग पांचवां हिस्सा दिव्यांगता के इलाज पर खर्च हो रहा है। आधे से अधिक (57.1 फीसदी) परिवारों को एक सदस्य के विकलांग होने के कारण स्वास्थ्य पर भारी खर्च करना होता है। 19.1 फीसदी लोग ऐसे हैं जिनके परिवार में एक सदस्य के विकलांग होने के इलाज से वे गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं।
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