'सरकार दयालुतापूर्ण पूंजीवाद को अपनाए': नारायणमूर्ति बोले- बेहतर शैक्षणिक संस्थानों के लिए फंडिंग बढ़ाना जरूरी
Narayan Murthy: इंफोसिस के संस्थापक चाहते हैं कि नई सरकार दयालुतापूर्ण पूंजीवाद को अपनाए क्योंकि अतीत में समाजवादी और कम्युनिस्ट व्यवस्था ने संतोषजनक परिणाम नहीं दिए हैं। उन्होंने कहा कि 99 प्रतिशत ईमानदार उद्यमियों को तेजी से आगे बढ़ने और देश में बहुत सारी नौकरियां पैदा करने के लिए मदद दी जानी चाहिए।
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आईटी उद्योग के दिग्गज एनआर नारायणमूर्ति और क्रिस गोपालकृष्णन को उम्मीद है कि आगामी सरकार ईमानदार उद्यमियों को खुली छूट देगी और देश के लिए धन सृजन में तेजी लाने में किसी भी बाधा को दूर करेगी। इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायणमूर्ति ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि वे चाहते हैं कि नई सरकार दयालुतापूर्ण पूंजीवाद को अपनाए क्योंकि अतीत में समाजवादी और कम्युनिस्ट व्यवस्था ने संतोषजनक परिणाम नहीं दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 99 प्रतिशत ईमानदार उद्यमियों को तेजी से आगे बढ़ने और देश में बहुत सारी नौकरियां पैदा करने के लिए मदद दी जानी चाहिए।
साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को दंडित किया जाना चाहिए। आईटी क्षेत्र के दोनों दिग्गजों ने निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की ओर से देश में अनुसंधान और उच्च शैक्षणिक संस्थानों के लिए फंडिंग बढ़ाने का भी समर्थन किया।
ईटी से बातचीत में एक्सिलर वेंचर्स के चेयरमैन कृष गोपालाकृष्णन ने कहा कि हमें प्राइवेट और पब्लिक दोनों तरह के रिसर्च के लिए फंडिंग बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "अमेरिकी विश्वविद्यालयों- एमआईटी, हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, आदि को देखें- उन्हें अरबों डॉलर की फंडिंग मिलती है, इसलिए मुझे उम्मीद है कि हमारे पूर्व छात्र हमारे संस्थानों में अधिक योगदान देंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि हमारे के संस्थान मुख्य रूप से सरकारी फंडिंग पर निर्भर करते हैं। मैं इस मामले में उद्योग जगत की अधिक भागीदारी देखना चाहता हूं। नारायणमूर्ति ने उनसे सहमति जताई और कहा कि अकादमिक संस्थानों में कुछ चीजों को बदलने की जरूरत है जबकि कॉरपोरेट जगत में पहले से ही काफी नवाचार हो रहा है। उन्होंने कहा, "यदि कोई युवा उद्यमी किसी नए विचार पर काम शुरू करता है, तो हमें यह नहीं मानना चाहिए कि वे सभी विफल हो जाएंगे। एक बार जब सरकार नए विचारों, नए आइडियाज पर ध्यान देना शुरू कर देगी, तो चीजें बदलेंगी।"
उन्होंने कहा, "एक बार जब कंपनी कुछ वृद्धि हासिल कर लेती है तो उन्हें (जिन संस्थानों को शेयर दिए गए थे) लाभांश मिलेगा, जो अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण होगा और उनका मूल्य बढ़ता रहेगा।" उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को भी देखना होगा कि अब से 20 या 50 साल बाद हमारा भविष्य क्या होगा।