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Wholesale Inflation: अगस्त में 0.16 फीसदी पर पहुंची थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति
Mon, 14 Sep 2020 03:10 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Mon, 14 Sep 2020 03:10 PM IST
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थोक महंगाई दर
- फोटो : pixabay
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सरकार ने अगस्त माह के थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी कर दिए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 0.16 फीसदी रही, जो जुलाई में नकारात्मक 0.58 फीसदी थी और जून में नकारात्मक 1.81 फीसदी थी।
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Headline inflation rate (provisional) based on Wholesale Price Index (WPI) for August, 2020 stood at 0.16 % as compared to (-) 0.58 % in the month of July, 2020: Ministry of Commerce & Industry
— ANI (@ANI) September 14, 2020विज्ञापन
अगस्त 2019 में यह 1.17 फीसदी थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने मौद्रिक समीक्षा में मुद्रास्फीति के ऊपर की ओर जाने के जोखिम की वजह से नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था।
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अगस्त में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 3.84 फीसदी रही। आलू की कीमतों में 82.93 फीसदी वृद्धि हुई। वहीं सब्जियों में मुद्रास्फीति 7.03 फीसदी रही, प्याज में (-)34.48 फीसदी थी। ईंधन और बिजली की बात करें, तो अगस्त में इनकी महंगाई दर 9.68 फीसदी रही। हालांकि, इस दौरान विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति बढ़कर 1.27 फीसदी हो गई, जो जुलाई में 0.51 फीसदी थी।
भारत में महंगाई दर बाजारों में सामान्य तौर पर कुछ समय के लिए वस्तुओं के दामों में उतार-चढ़ाव महंगाई को दर्शाती है। जब किसी देश में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें अधिक हो जाती हैं, तो इसको महंगाई कहते हैं। उत्पादों की कीमत बढ़ने से परचेजिंग पावर प्रति यूनिट कम हो जाती है। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर ही वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के फैसले लिए जाते हैं।
आगामी दिनों में नीचे आएगी खुदरा मुद्रास्फीति- सीईए
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के वी सुब्रमण्यम ने भरोसा जताया है कि लॉकडाउन में ढील के बाद आगामी दिनों में खुदरा मुद्रास्फीति नीचे आएगी। उन्होंने कहा कि आपूर्ति की दिक्कतों की वजह से मुद्रास्फीति बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 6.93 फीसदी हो गई है।
मुख्य रूप से सब्जियों, दालों, मांस और मछली के दाम बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी है। हालांकि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जुलाई में 0.58 फीसदी घटी है। सुब्रमण्यम ने कहा कि यदि आप मुद्रास्फीति को देखें, तो यह मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष की दिक्कतों की वजह से है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन में ढील के बाद ये बाधाएं दूर होंगी।
सुब्रमण्यम ने से कहा कि कुल मिलाकर थोक और खुदरा मुद्रास्फीति में अंतर आपूर्ति पक्ष के कारकों की वजह से है। ये दिक्कतें आगे दूर होंगी। ऐसे में खुदरा मुद्रास्फीति भी नरम पड़ेगी। इस तरह की आशंका जताई जा रही है कि साल की शेष अवधि में खुदरा मुद्रास्फीति ऊपरी स्तर पर बनी रहेगी। इससे रिजर्व बैंक के पास नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं रहेगी।
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को 31 मार्च, 2021 तक वार्षिक खुदरा मुद्रास्फीति को चार फीसदी (दो फीसदी ऊपर या नीचे) पर रखने का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि, अभी तक खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के संतोषजनक दायरे में रही है।