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रिकॉर्ड: 620 अरब डॉलर के पार पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार, स्वर्ण भंडार में भी उछाल

Sat, 07 Aug 2021 09:28 AM IST
‌डिंपल अलावाधी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Sat, 07 Aug 2021 09:28 AM IST
सार

विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग जरूरत पड़ने पर देनदारियों का भुगतान करने में किया जाता है। इसमें आईएमएफ में विदेशी मुद्रा असेट्स, स्वर्ण भंडार और अन्य रिजर्व शामिल होते हैं, जिनमें से विदेशी मुद्रा असेट्स सोने के बाद सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।

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Indian Forex Reserves fall above record 620 arab dollar according to data released by RBI
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। यह आयात को समर्थन देने के लिए आर्थिक संकट की स्थिति में अर्थव्यवस्था को बहुत आवश्यक मदद उपलब्ध कराता है। 30 जुलाई 2021 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 9.427 अरब डॉलर बढ़कर 620.576 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 

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इसलिए आई बढ़त
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 23 जुलाई 2021 को समाप्त सप्ताह में इसमें 1.581 करोड़ डॉलर की गिरावट आई थी और यह 611.149 अरब डॉलर रह गया था। विदेशी मुद्रा संपत्तियों (एफसीए) में आई वृद्धि से विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी आई है। एफसीए 8.596 अरब डॉलर बढ़कर 576.224 अरब डॉलर रह गया। विदेशी मुद्रा संपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राओं के मूल्य में वृद्धि या कमी का प्रभाव भी शामिल होता है।
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स्वर्ण भंडार में भी उछाल
इस दौरान देश का स्वर्ण भंडार 76 करोड़ डॉलर बढ़ा और 37.644 अरब डॉलर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास मौजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 60 लाख डॉलर बढ़कर 1.552 अरब डॉलर रह गया है।
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जानें क्या है विदेशी मुद्रा भंडार
विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग जरूरत पड़ने पर देनदारियों का भुगतान करने में किया जाता है। इसमें आईएमएफ में विदेशी मुद्रा असेट्स, स्वर्ण भंडार और अन्य रिजर्व शामिल होते हैं, जिनमें से विदेशी मुद्रा असेट्स सोने के बाद सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।


विदेशी मुद्रा भंडार के फायदे
साल 1991 में देश को पैसा जुटाने के लिए सोना गिरवी रखना पड़ा था। तब सिर्फ 40 करोड़ डॉलर के लिए भारत को 47 टन सोना इंग्लैंड के पास गिरवी रखना पड़ा था। लेकिन मौजूदा स्तर पर, भारत के पास एक वर्ष से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त मुद्रा भंडार है। यानी इससे एक साल से अधिक के आयात खर्च की पूर्ति सरलता से की जा सकती है, जो इसका सबसे बड़ा फायदा है। अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार आरक्षित रखने वाला देश विदेशी व्यापार का अच्छा हिस्सा आकर्षित करता है और व्यापारिक साझेदारों का विश्वास अर्जित करता है। इससे वैश्विक निवेशक देश में और अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। सरकार जरूरी सैन्य सामान की तत्काल खरीद का निर्णय भी ले सकती है क्योंकि भुगतान के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

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