{"_id":"6896b2d7b941c226b10524cb","slug":"indian-economy-arvind-panagariya-dig-at-trump-dead-bodies-must-be-moving-hence-growing-at-the-rate-of-7-pc-2025-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indian Economy: ट्रंप पर अरविंद पनगढ़िया का कटाक्ष, लाशें चलती ही होंगी.. तभी 7% की दर से बढ़ रही अर्थव्यवस्था","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Indian Economy: ट्रंप पर अरविंद पनगढ़िया का कटाक्ष, लाशें चलती ही होंगी.. तभी 7% की दर से बढ़ रही अर्थव्यवस्था
Sat, 09 Aug 2025 08:01 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 09 Aug 2025 08:01 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को 'मृत अर्थव्यवस्था' बताया था, जिस पर कई लोगों ने पलटवार किया। ट्रंप के बयान पर अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा, लाशें चलती ही होंगी, यही कारण है कि देश की अर्थव्यवस्था 7 फीसदी की दर से बढ़ रही है।
विज्ञापन
अरविंद पनगढ़िया (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भारतीय अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मृत अर्थव्यवस्था वाले कटाक्ष पर कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। डॉलर के संदर्भ में तो यह इससे भी अधिक है। ट्रंप के बयान पर तो यही कहा जा सकता है कि हो सकता है लाशें चलती हों।
विज्ञापन
16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष पनगढ़िया ने शुक्रवार को कहा, यदि अर्थव्यवस्था मृत है तो आप 7 प्रतिशत से अधिक की दर से विकास नहीं कर सकते। मुझे नहीं पता कि इस परिभाषा का क्या अर्थ है। ट्रंप ने 31 जुलाई को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था, मुझे इसकी परवाह नहीं कि भारत रूस के साथ क्या करता है। वे मिलकर अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को नीचे गिरा सकते हैं, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
विज्ञापन
पनगढ़िया ने कहा, भारत को यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए। भूमि और श्रम बाजार सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए। विकास की गति तेज करने के लिए नियमों में ढील देना चाहिए। निर्यात पर उच्च शुल्क के बाद निर्णायक मोड़ का सामना कर रहे भारत को सुधार एजेंडे पर तेजी लानी चाहिए।
विज्ञापन
एक बाजार बंद होने पर हमें दूसरे को खोलने की जरूरत
पनगढ़िया ने कहा, एक बाजार लगभग बंद होता दिख रहा है। इसलिए हमें दूसरे बाजार को बड़े पैमाने पर खोलने की जरूरत है। बाजारों में लाभ की भावना प्रबल होती है और उद्यमी इतने चतुर होते हैं कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को बहुत तेजी से पुनः समायोजित कर लेते हैं।
कुछ मायनों में 1991 जैसी स्थिति
पनगढ़िया ने मौजूदा स्थिति कुछ मायनों में 1991 जैसी है, जब अमेरिका की ओर से लगाए गए भारी शुल्कों के कारण संकट उत्पन्न हुआ था। यह पीछे मुड़कर देखने, स्थिति को समझने और सोचने का अच्छा समय है कि हम क्या कर सकते हैं। हमारे सुधार एजेंडे में बहुत कुछ किया गया है। भारत कहीं बड़े संकटों से उबर चुका है और अर्थव्यवस्था इस समय मजबूत है।