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Banking: ब्याज दरों पर RBI के फैसले से बैंकों पर बढ़ सकता है मार्जिन में कमी का दबाव, जानिए क्या है पूरा मामला
Fri, 21 Feb 2025 03:32 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 21 Feb 2025 03:32 PM IST
सार
Banking Sector: एसएंडपी कैपिटल आईक्यू के अनुसार, छह सबसे बड़े निजी और सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों का शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) तनाव में है। हालांकि, मजबूत ऋण मांग ने इन बैंकों को विकास बनाए रखने में मदद की है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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- फोटो : ANI
विस्तार
भारतीय बैंकों को अपने शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) पर नए सिरे से दबाव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से पांच वर्षों में पहली बार अपनी बेंचमार्क दर में कटौती करने के फैसले के बाद बैंकों की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है।
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एसएंडपी कैपिटल आईक्यू के अनुसार, छह सबसे बड़े निजी और सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों का शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) तनाव में है। हालांकि, मजबूत ऋण मांग ने इन बैंकों को विकास बनाए रखने में मदद की है। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 24 की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में, छह प्रमुख बैंकों में से पांच ने 12 प्रतिशत से अधिक की ऋण वृद्धि देखी, जिससे उनकी शुद्ध आय सालाना आधार पर बढ़ी।
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27 जनवरी को, आरबीआई ने बैंकिंग प्रणाली को समर्थन देने के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने के उपायों की शुरुआत की और बाद में 7 फरवरी को अपने बेंचमार्क रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती करके इसे 6.25 प्रतिशत कर दिया।
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नोमुरा के विश्लेषकों को 2025 में दरों में और कटौती की उम्मीद है, अगली कटौती अप्रैल में होने की उम्मीद है। उन्हें 2025 के अंत तक 5.50 प्रतिशत की टर्मिनल दर का अनुमान है। सख्त तरलता स्थितियों के कारण जमा दरें उच्च बनी हुई हैं। दूसरी ओर, लोन लेने वाले कम ब्याज दरों की ओर जाने का रुख करेंगे जिससे बैंकों पर दबाव पड़ने की उम्मीद है। इससे बैंकों के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।
देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने एनआईएम को 17 आधार अंकों से कम करके तीसरी तिमाही में 2.86 प्रतिशत रहने की बात कही है। हालांकि, एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, एसबीआई की ऋण वृद्धि साल दर साल 14 प्रतिशत पर मजबूत रही। मुख्य रूप से खुदरा, कृषि और एमएसएमई ऋणों के साथ-साथ कॉर्पोरेट ऋण में सुधार से प्रेरित थी। जबकि भारतीय बैंकों ने अपनी ऋण पुस्तकों का विस्तार किया है, जमा वृद्धि धीमी रही। अधिक ग्राहक कम ब्याज वाले बचत खातों से अधिक-उपज वाले सावधि जमा खातों की ओर जा रहे हैं, जिससे बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ रही है।
एसबीआई के अध्यक्ष चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी ने मार्जिन पर दबाव बढ़ने को "व्यवहारगत परिवर्तन" बताया। वित्त वर्ष 24 की तीसरी तिमाही में एसबीआई की जमा वृद्धि 10 प्रतिशत रही, जबकि कुल जमा में कम लागत वाले चालू और बचत खातों (सीएएसए) की हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 38.4 प्रतिशत से घटकर 37.6 प्रतिशत रह गई।
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार बैंकों को जमा के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ऋण पैदावार बढ़ाने की उनकी क्षमता सीमित हो गई है। अन्य सरकारी बैंकों के मार्जिन में भी गिरावट देखी गई, जिसमें बैंक ऑफ बड़ौदा का एनआईएम 20 आधार अंकों की गिरावट के साथ 2.93 प्रतिशत और पंजाब नेशनल बैंक का मार्जिन 19 आधार अंकों की गिरावट के साथ 2.67 प्रतिशत रह गया।