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India Britain Trade: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते में 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' लागू, जानिए क्या है फायदा

Sat, 04 Jul 2026 09:23 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 04 Jul 2026 09:23 PM IST
सार

भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (CETA) के तहत वित्त मंत्रालय ने 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' के सख्त नियम अधिसूचित किए हैं। जानिए 15 जुलाई से कैसे रुकेगी तीसरे देशों की हेराफेरी और कपड़ा, रत्न व ऑटो सेक्टर्स को मिलेगा ड्यूटी-फ्री फायदा। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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India-UK CETA Rules of Origin Notified: Strict Sourcing Rules Set To Check Third-Country Import Misuse Startin
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता - फोटो : ANI

विस्तार

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौते (सीईटीए) को अमली जामा पहनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। वित्त मंत्रालय ने इस समझौते के तहत आयात-निर्यात सामानों की पहचान के लिए 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' (उत्पत्ति के नियम) अधिसूचित किए हैं, जो 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे। इसके बाद कोई तीसरा देश भारत-ब्रिटेन व्यापार रियायतों का गलत फायदा नहीं उठा सकेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और इसके क्या मायने हैं ।

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'रूल्स ऑफ ओरिजिन' क्या हैं और यह अधिसूचना व्यापार जगत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

'रूल्स ऑफ ओरिजिन' वह कानूनी पैमाना है जो तय करता है कि कोई उत्पाद वास्तव में किस देश में बना है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की अधिसूचना के अनुसार, समझौते के तहत टैक्स छूट का लाभ पाने के लिए 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' अनिवार्य होगा। इसे दोनों देशों की अधिकृत एजेंसियां ही जारी कर सकेंगी। यह ढांचा सुनिश्चित करेगा कि तीसरे देशों के उत्पाद गलत तरीके से रियायती शुल्कों का लाभ न उठाएं और द्विपक्षीय व्यापार की ईमानदारी बनी रहे।

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इस नए नियम से किन उद्योगों को सबसे अधिक फायदा होने की उम्मीद है?

यह ऐतिहासिक समझौता (सीईटीए) ब्रिटेन को होने वाले भारत के 99 प्रतिशत निर्यात पर पूरी तरह से शुल्क-मुक्त (ड्यूटी-फ्री) पहुंच सुनिश्चित करता है। टैक्स की इस बचत से भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों को भारी बढ़ावा मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से कपड़ा (टेक्सटाइल), समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान, खिलौने और रत्न एवं आभूषण शामिल हैं। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान और ऑर्गेनिक केमिकल्स जैसे तेजी से बढ़ रहे क्षेत्रों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।

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भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार के ताजा आंकड़े और व्यापार संतुलन क्या कहते हैं?

दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह व्यापार 23.13 बिलियन डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 8.62 प्रतिशत बढ़कर 25.12 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। द्विपक्षीय व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत है। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने ब्रिटेन को 13.44 बिलियन डॉलर का निर्यात किया, जबकि वहां से 11.68 बिलियन डॉलर का आयात हुआ। इस प्रकार भारत का ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) 1.76 बिलियन डॉलर रहा, जो नई व्यापार व्यवस्था में और बढ़ सकता है।

दुरुपयोग रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें क्या कड़े प्रावधान हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमों की यह रूपरेखा समझौते को पारदर्शी और प्रभावी बनाएगी। हालांकि, यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी जिम्मेदारी भी लाती है। टैक्स रियायतों का लाभ उठाने के लिए उत्पादों को कड़े मूल मानकों पर खरा उतरना होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि भारतीय कारोबारियों को अपनी पूरी सप्लाई चेन, मूल्यवर्धन और कच्चे माल की खरीद से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से समीक्षा करनी होगी, क्योंकि इन नियमों का कड़ाई से अनुपालन ही शुल्क लाभों की कुंजी है। 15 जुलाई से लागू हो रहे ये नियम द्विपक्षीय व्यापार में पारदर्शिता के नए युग की शुरुआत हैं। अब भारतीय कंपनियों के लिए असली परीक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करने की होगी। जो कंपनियां अपनी सप्लाई चेन की लिखा-पढ़ी और मूल्यवर्धन मानकों को दुरुस्त रखेंगी, उनके लिए ब्रिटेन के रूप में एक समृद्ध बाजार बिना किसी रुकावट के खुला रहेगा।

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