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Goldman Sachs: 2075 तक अर्थव्यवस्था में अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा भारत, जानें कौन होंगे टॉप-3 देश
Tue, 11 Jul 2023 11:12 AM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 11 Jul 2023 11:12 AM IST
सार
Goldman Sachs: गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के भारतीय अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने कहा, 'अगले दो दशकों में भारत का निर्भरता अनुपात क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम होगा। निर्भरता अनुपात को कुल कामकाजी उम्र की आबादी के खिलाफ आश्रितों की संख्या से मापा जाता है।'
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गोल्डमैन सैक्स
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विस्तार
गोल्डमैन सैक्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत 2075 तक न केवल जापान और जर्मनी बल्कि अमेरिका को भी पीछे छोड़ते हुए दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वर्तमान में, भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। निवेश बैंक ने लिखा है कि नवाचार, प्रौद्योगिकी, उच्च पूंजी निवेश और बढ़ती श्रमिक उत्पादकता आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की मदद करेगी।
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गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के भारतीय अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने कहा, 'अगले दो दशकों में भारत का निर्भरता अनुपात क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम होगा। निर्भरता अनुपात को कुल कामकाजी उम्र की आबादी के खिलाफ आश्रितों की संख्या से मापा जाता है।'
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शांतनु सेनगुप्ता ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती आबादी की क्षमता को बाहर निकालने की कुंजी इसकी श्रम शक्ति की भागीदारी को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि भारत अगले 20 साल तक बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर भारत की निर्भरता का अनुपात घटेगा।
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उन्होंने कहा, 'इसलिए यह वास्तव में भारत के लिए विनिर्माण क्षमता स्थापित करने, सेवाओं को बढ़ाना जारी रखने, बुनियादी ढांचे के विकास को जारी रखने का सही समय है।
गोल्डमैन सैक्स ने रिपोर्ट में कहा कि यह निजी क्षेत्र के लिए विनिर्माण और सेवाओं में क्षमता निर्माण पर स्केल करने का उपयुक्त समय है। निवेश बैंक ने कहा कि इससे देश में अधिक नौकरियां पैदा करने और एक बड़ी श्रम शक्ति का उचित इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
गोल्डमैन ने अनुमान जताया कि पूंजी निवेश भारत की वृद्धि का एक और महत्वपूर्ण चालक होगा। गोल्डमैन की रिपोर्ट में कहा गया है, "निर्भरता अनुपात में गिरावट, बढ़ती आय और वित्तीय क्षेत्र के विकास के साथ भारत की बचत दर बढ़ने की उम्मीद है, जिससे आगे निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूंजी का पूल तैयार होगा।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "पिछले 15 वर्षों में भारत में श्रम बल भागीदारी दर में गिरावट आई है। श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी दर पुरुषों की तुलना में "काफी कम" है, इसमें कहा गया है, "भारत में सभी कामकाजी उम्र की महिलाओं में से केवल 20% रोजगार में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कम आंकड़ा महिलाओं के मुख्य रूप से ऐसे काम पर लगे होने के कारण हो सकता है, जो औपचारिक रोजगार के आर्थिक उपायों के हिसाब से नहीं है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि शुद्ध निर्यात भी भारत की वृद्धि की राह में एक बाधा रहा है, क्योंकि भारत चालू खाता घाटे से चलता है।