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India Steel-2025: पीएम मोदी बोले- इस्पात जैसा सुदृढ़ भारत बनाए, उत्पादन बढ़ाएं; नवाचार अपनाएं
Fri, 25 Apr 2025 06:35 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 25 Apr 2025 06:35 AM IST
सार
पीएम ने बृहस्पतिवार को इंडिया इस्पात 2025 कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा, इस्पात उभरता हुआ क्षेत्र होने के साथ विकास की रीढ़ है। 2030 तक 30 करोड़ टन का लक्ष्य हासिल करने के लिए हमें इस्पात उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है।
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पीएम नरेंद्र मोदी।
- फोटो : एक्स/@BJP4India
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टील उद्योग के प्रतिनिधियों से कहा कि मजबूत, हितकारी बदलावों को तेजी से आगे बढ़ाने वाला और इस्पात जैसा सुदृढ़ भारत बनाने के लिए साथ मिलकर काम करें। उद्योग को भविष्य के लिए तैयार करने के साथ हमें नई तकनीकी को अपनाने, नवाचार करने, सर्वोत्तम गतिविधियों का आदान-प्रदान करने और कोयला आयात में कमी लाने की दिशा में ध्यान देना चाहिए।
पीएम ने बृहस्पतिवार को इंडिया इस्पात 2025 कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा, इस्पात उभरता हुआ क्षेत्र होने के साथ विकास की रीढ़ है। 2030 तक 30 करोड़ टन का लक्ष्य हासिल करने के लिए हमें इस्पात उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है। 2023-24 में देश की इस्पात उत्पादन क्षमता 17.9 करोड़ थी। प्रधानमंत्री ने संबोधन में यह भी कहा, इस्पात उत्पादन बढ़ाने के लिए अप्रयुक्त नई खदानों से लौह अयस्क निकालने का प्रयास शुरू करना चाहिए। इन खदानों का उचित और समय पर उपयोग किया जाना महत्वपूर्ण है। ऐसा नहीं होने पर देश और उद्योग दोनों को नुकसान होगा।
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इन्फ्रा के विकास से बढ़ेगी इस्पात की मांग
पीएम ने कहा, देश 1,300 अरब डॉलर की राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन को भी आगे बढ़ा रहा है। बड़े पैमाने पर स्मार्ट सिटी बनाए जा रहे हैं। सड़कों, रेलवे, एयरपोर्ट, बंदरगाहों और पाइपलाइन में विकास की गति इस्पात क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। बड़ी परियोजनाओं की बढ़ती संख्या इस्पात की मांग को बढ़ाएगी।
वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ रहा भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत न सिर्फ घरेलू वृद्धि के बारे में, बल्कि इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व के बारे में भी सोच रहा है। दुनिया भारत को उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में देखती है। देश में बुनियादी ढांचे को बढ़ा रही सरकार अपने अनुबंधों में स्थानीय रूप से विनिर्मित इस्पात के उपयोग पर जोर दे रही है।
क्षेत्र में रोजगार देने की क्षमता
मोदी ने कहा, इस्पात क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें युवाओं को रोजगार देने की क्षमता है। हमें ऊर्जा दक्षता, कम उत्सर्जन और डिजिटल रूप से उन्नत प्रौद्योगिकियों की ओर तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है। एआई, ऑटोमेशन का उपयोग उद्योग के भविष्य को परिभाषित करेंगे।
कच्चा माल पाना क्षेत्र के लिए चिंता
प्रधानमंत्री ने कहा, कच्चे माल हासिल करना और उसकी सुरक्षा इस्पात क्षेत्र के लिए एक बड़ी चिंता है। हम अब भी निकल, कोकिंग कोयला और मैंगनीज के लिए आयात पर निर्भर हैं। यह निर्भरता कम करने के लिए हमें वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के साथ आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित करने और प्रौद्योगिकी को उन्नत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
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शून्य आयात व निर्यात बढ़ाने का हो लक्ष्य
पीएम ने कहा, देश निर्यात बाजार पर नजर रखते हुए आधुनिक व बड़े जहाज बनाने की महत्वाकांक्षा रखता है। ऐसे कार्यों के लिए उच्च श्रेणी के इस्पात की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, इस्पात के मामले में आयात को शून्य स्तर पर लाने व शुद्ध निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य होना चाहिए। देश को कोयला गैसीकरण व कोयला आयात को कम करने के लिए अपने भंडार के बेहतर उपयोग जैसे विकल्पों की भी तलाश करनी चाहिए। देश का लक्ष्य 2047 तक इस्पात निर्यात को 2.5 करोड़ टन से बढ़ाकर 50 करोड़ टन करना है। 2030 तक प्रति व्यक्ति इस्पात खपत 98 किलो से बढ़ाकर 160 किलो करने का लक्ष्य है।
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पीएम ने बृहस्पतिवार को इंडिया इस्पात 2025 कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा, इस्पात उभरता हुआ क्षेत्र होने के साथ विकास की रीढ़ है। 2030 तक 30 करोड़ टन का लक्ष्य हासिल करने के लिए हमें इस्पात उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है। 2023-24 में देश की इस्पात उत्पादन क्षमता 17.9 करोड़ थी। प्रधानमंत्री ने संबोधन में यह भी कहा, इस्पात उत्पादन बढ़ाने के लिए अप्रयुक्त नई खदानों से लौह अयस्क निकालने का प्रयास शुरू करना चाहिए। इन खदानों का उचित और समय पर उपयोग किया जाना महत्वपूर्ण है। ऐसा नहीं होने पर देश और उद्योग दोनों को नुकसान होगा।
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इन्फ्रा के विकास से बढ़ेगी इस्पात की मांग
पीएम ने कहा, देश 1,300 अरब डॉलर की राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन को भी आगे बढ़ा रहा है। बड़े पैमाने पर स्मार्ट सिटी बनाए जा रहे हैं। सड़कों, रेलवे, एयरपोर्ट, बंदरगाहों और पाइपलाइन में विकास की गति इस्पात क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। बड़ी परियोजनाओं की बढ़ती संख्या इस्पात की मांग को बढ़ाएगी।
वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ रहा भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत न सिर्फ घरेलू वृद्धि के बारे में, बल्कि इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व के बारे में भी सोच रहा है। दुनिया भारत को उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में देखती है। देश में बुनियादी ढांचे को बढ़ा रही सरकार अपने अनुबंधों में स्थानीय रूप से विनिर्मित इस्पात के उपयोग पर जोर दे रही है।
क्षेत्र में रोजगार देने की क्षमता
मोदी ने कहा, इस्पात क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें युवाओं को रोजगार देने की क्षमता है। हमें ऊर्जा दक्षता, कम उत्सर्जन और डिजिटल रूप से उन्नत प्रौद्योगिकियों की ओर तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है। एआई, ऑटोमेशन का उपयोग उद्योग के भविष्य को परिभाषित करेंगे।
कच्चा माल पाना क्षेत्र के लिए चिंता
प्रधानमंत्री ने कहा, कच्चे माल हासिल करना और उसकी सुरक्षा इस्पात क्षेत्र के लिए एक बड़ी चिंता है। हम अब भी निकल, कोकिंग कोयला और मैंगनीज के लिए आयात पर निर्भर हैं। यह निर्भरता कम करने के लिए हमें वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के साथ आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित करने और प्रौद्योगिकी को उन्नत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
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शून्य आयात व निर्यात बढ़ाने का हो लक्ष्य
पीएम ने कहा, देश निर्यात बाजार पर नजर रखते हुए आधुनिक व बड़े जहाज बनाने की महत्वाकांक्षा रखता है। ऐसे कार्यों के लिए उच्च श्रेणी के इस्पात की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, इस्पात के मामले में आयात को शून्य स्तर पर लाने व शुद्ध निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य होना चाहिए। देश को कोयला गैसीकरण व कोयला आयात को कम करने के लिए अपने भंडार के बेहतर उपयोग जैसे विकल्पों की भी तलाश करनी चाहिए। देश का लक्ष्य 2047 तक इस्पात निर्यात को 2.5 करोड़ टन से बढ़ाकर 50 करोड़ टन करना है। 2030 तक प्रति व्यक्ति इस्पात खपत 98 किलो से बढ़ाकर 160 किलो करने का लक्ष्य है।