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Crude Oil: छह साल के शीर्ष पर पहुंच सकता है सऊदी अरब से तेल का आयात, अमेरिकी दबाव से रूस से खरीद घटाने के असर

Sat, 21 Feb 2026 05:38 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 21 Feb 2026 05:38 AM IST
सार

अमेरिकी दबाव के बीच भारत का सऊदी अरब से कच्चे तेल का आयात छह साल के उच्च स्तर पर पहुंच सकता है। रूस से क्रूड खरीद में कमी और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर दिख रहा है।

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India Saudi Oil Imports May Hit Six-Year High Amid US Pressure to Cut Russian Crude
crude oil - फोटो : Adobestock

विस्तार

भारत इस महीने सऊदी अरब से छह साल से अधिक समय में सबसे अधिक कच्चे तेल का आयात करने जा रहा है। रूस से कच्चे तेल की खरीदारी कम करने के लिए अमेरिका के भारत पर लगातार दबाव बनाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। केप्लर के प्रमुख अनुसंधान विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति बढ़कर 10 लाख से 11 लाख बैरल प्रतिदिन होने की संभावना है। यह नवंबर, 2019 के बाद से उच्च स्तर होगा। यह रूस के अनुरूप है, जिससे दोनों आपूर्तिकर्ताओं के बीच का अंतर काफी हद तक कम हो जाएगा। यूक्रेन पर आक्रमण के बाद भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बढ़ाने के कारण यह अंतर काफी बढ़ गया था।

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भारत पर अमेरिकी दबाव इस महीने की शुरुआत में तब ज्यादा हो गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत एक व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल की खरीदारी बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने इस दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। अगर तेल का प्रवाह 12 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचता है तो रूस इस महीने भी भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना रहेगा, लेकिन शिपमेंट में और भी गिरावट आने का अनुमान है।
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2022 में यूक्रेन पर हुए आक्रमण के बाद भारत रूसी तेल का एक प्रमुख खरीदार बनकर उभरा, क्योंकि ओपेक और अन्य उत्पादक देश रूस को अपने तेल की कीमतों में भारी छूट देनी पड़ी। ऐसा इसलिए, क्योंकि अधिकांश अन्य खरीदार मॉस्को से जुड़ी ऊर्जा से दूर भाग रहे थे। भारत ने तब प्रतिदिन 20 लाख बैरल रूसी तेल आयात किया था। 
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रूस से और घटेगा आयात
केप्लर ने कहा, अगले महीने रूस से आयात में और कमी आ सकती है। यह आयात प्रतिदिन 8 से 10 लाख बैरल के बीच रहेगा। यूरोपीय संघ के लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रूसी कच्चे तेल पर पूरी तरह निर्भर नायरा एनर्जी की ओर से संचालित रिफाइनरी में अप्रैल एवं मई के दौरान रखरखाव कार्य के कारण होने वाले बंद से आयात की मात्रा में और भी कमी आने की आशंका है।


रूस के लिए भारत में अपनी हिस्सेदारी खोना यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप से विस्थापित हुए उसके तेल के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार को कमजोर कर देता है। सऊदी अरब के लिए शीर्ष स्थान पुनः प्राप्त करना सबसे तेजी से बढ़ते तेल बाजारों में से एक में रणनीतिक प्रभाव को बहाल करेगा।

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