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Retail Inflation: खाने-पीने की चीजें हुईं सस्ती, खुदरा महंगाई 15 महीने में सबसे नीचे
Wed, 12 Apr 2023 06:31 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 12 Apr 2023 06:31 PM IST
सार
Retail Inflation of India: मार्च में खुदरा महंगाई दर में राहत मिली है। इस महीने खुदरा महंगाई दर आरबीआई की तय सीमा के नीचे आ गई है। मार्च के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े रिजर्व बैंक की ओर से प्रमुख ब्याज दर या रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर बरकरार रखने के एक सप्ताह से भी कम समय बाद आए हैं।
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विस्तार
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में नरमी से खुदरा महंगाई मार्च, 2023 में घटकर 5.66 फीसदी रह गई। दिसंबर, 2021 के बाद यह 15 महीने का निचला स्तर है। तब भी खुदरा मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई 5.66 फीसदी ही थी। खास बात यह है कि खुदरा महंगाई दो महीने के बाद फिर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के छह फीसदी के संतोषजनक दायरे के नीचे आ गई। इससे पहले फरवरी, 2023 में यह 6.44 फीसदी और जनवरी में 6.52 फीसदी रही थी। मार्च, 2022 में खुदरा महंगाई 6.95 फीसदी रही थी।
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राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य महंगाई बीतेे महीने घटकर 4.79 फीसदी पर आ गई। फरवरी, 2023 में यह 5.95 फीसदी और मार्च, 2022 में 7.68 फीसदी रही थी।
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आरबीआई के टॉलरेंस बैंड के दायरे में आई महंगाई दर
बता दें कि आरबीआई को मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत पर रखना होता है, दोनों तरफ 2 प्रतिशत का मार्जिन है। फरवरी में खुदरा मुद्रास्फीति की दर मामूली गिरावट के बावजूद लगातार दूसरे महीने रिजर्व बैंक की छह प्रतिशत की ऊपरी सहनशीलता सीमा से ऊपर बनी रही।
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पिछले हफ्ते ही केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने का किया था एलान
मार्च के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े रिजर्व बैंक की ओर से प्रमुख ब्याज दर या रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर बरकरार रखने से बाजार और विश्लेषकों को आश्चर्यचकित करने के एक सप्ताह से भी कम समय बाद आए हैं।
मार्च महीने में 15 महीने के निचले स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई दर
मार्च महीने में खुदरा महंगाई दर 15 महीने के निचले स्तर पर रही। मार्च 2022 में महंगाई दर 6.44 फीसदी रही थी। खाद्य पदार्थों की महंगाई बीते महीने 4.79 फीसदी रही, फरवरी में यह 5.95 फीसदी थी। मासिक आधार पर इसमें बड़ी गिरावट आई है। बता दें कि जनवरी में खुदरा महंगाई दर तीन महीने के उच्चतम स्तर पर 6.52 फीसदी पर पहुंच गई थी।
मार्च में सब्जियों की कीमतों में 8.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई
मार्च 2022 में कोर महंगाई दर 6.1 फीसदी से घटकर 5.8 फीसदी पर आ गई। फरवरी में यह 6.1 फीसदी थी। मार्च में सब्जियों की महंगाई दर -8.51 फीसदी, पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई दर 8.91 फीसदी, हाउसिंग क्षेत्र में महंगाई दर 4.96 फीसदी, कपड़ों और जूतों की महंगाई दर 8.18 फीसदी और दालों की महंगाई दर 4.33 फीसदी रही।
शहरी इलाकों में महंगाई अधिक
ग्रामीण महंगाई फरवरी के 6.72 फीसदी से घटकर मार्च में 5.51 फीसदी रह गई। शहरों में खुदरा महंगाई की दर 6.10 फीसदी से कम होकर 5.89 फीसदी रही। सब्जियों की कीमत सालाना आधार पर 8.51 फीसदी घटी है। तेल व वसा की कीमत में 7.86 फीसदी और मांस-मछली की कीमताें में 1.42 फीसदी की गिरावट हुई। मसाले 18.2% व अनाज 15.27% महंगे हुए। फल की महंगाई दर भी बढ़ी है।
5 से 5.2% का अनुमान
रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि गर्मी की आशंका में जब तक कीमतों में वृद्धि नहीं होती है, महंगाई 5 से 5.2 फीसदी के बीच रह सकती है। इससे ब्याज दर नहीं बढ़ाने के आरबीआई के फैसले को मजबूती मिलेगी। 2023-24 के लिए आरबीआई ने खुदरा महंगाई 5.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
5.6% औद्योगिक उत्पादन बढ़ा
बिजली, खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के दम पर देश का औद्योगिक उत्पादन इस साल फरवरी में मामूली बढ़कर 5.6 फीसदी पहुंच गया है। जनवरी, 2023 में इसकी वृद्धि दर 5.5 फीसदी व फरवरी, 2022 में 1.2 फीसदी रही थी। विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन फरवरी, 2023 में 5.3 फीसदी रहा। खनन क्षेत्र का उत्पादन 4.6% पर स्थिर रहा। बिजली उत्पादन में 8.2% और पूंजीगत वस्तुओं में 10.5% की वृद्धि दर्ज की गई। गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में 12.1% की बढ़ोतरी रही। बुनियादी ढांचा/निर्माण वस्तुओं का उत्पादन 7.9% बढ़ गया। 2022-23 के शुरुआती 11 महीनों में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक घटकर 5.5% रह गया। 2021-22 की समान अवधि में 12.5% था।
FY 24 में खुदरा महंगाई दर (CPI) 5.2 प्रतिशत रह सकती हैः आरबीआई गवर्नर
एमपीसी की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत ने महंगाई पर बोलते हुए कहा था कि FY 24 में खुदरा महंगाई दर (CPI) 5.2 प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने कहा कि मीडियम टर्म में महंगाई को तय सीमा के भीतर लाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जब तक महंगाई दर तय सीमा के भीतर नहीं आती है तब तक लड़ाई जारी रहेगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर ने अनुमान जताया था कि FY24 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8% रह सकती है। दास ने कहा कि हाल के वर्षों में देश में निगरानी व्यवस्था मजबूत हुई है। लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर आरबीआई की नजर बनी हुई है। रुपये की स्थिरता के लिए भी भारतीय रिजर्व बैंक की कोशिशें जारी हैं।