{"_id":"686385777e186920220788a1","slug":"india-s-manufacturing-sector-hits-14-month-high-in-june-exports-and-jobs-surge-hsbc-pmi-2025-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"HSBC PMI: भारत का विनिर्माण क्षेत्र जून में 14 महीने के उच्चतम स्तर पर, निर्यात और नौकरियों में उछाल","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
HSBC PMI: भारत का विनिर्माण क्षेत्र जून में 14 महीने के उच्चतम स्तर पर, निर्यात और नौकरियों में उछाल
Tue, 01 Jul 2025 12:21 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 01 Jul 2025 12:21 PM IST
सार
HSBC PMI: जून में अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में तेज वृद्धि दिखी। 2005 में सर्वेक्षण शुरू होने के बाद से निर्यात मांग में तीसरी सबसे तेज गति से वृद्धि देखी गई। इसमें कंपनियों की ओर से मांग के प्रमुख स्रोत के रूप में ज्यादातर अमेरिका का उल्लेख किया गया। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फ्रीपिक
विस्तार
भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में मजबूत वृद्धि दिखी। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के आंकड़ों से इसकी पुष्टि हुई। यह इंडेक्स मई में 57.6 से जून में 58.4 पर पहुंच गया। एचएसबीसी के अनुसार, यह 14 महीनों में उच्चतम स्तर है। पीएमआई का आंकड़ा 54.1 के दीर्घकालिक औसत से काफी ऊपर है। यह व्यापार स्थितियों में मजबूत सुधार के संकेत देता है।
विज्ञापन
जून में अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में तेज वृद्धि दिखी। 2005 में सर्वेक्षण शुरू होने के बाद से निर्यात मांग में तीसरी सबसे तेज गति से वृद्धि देखी गई। इसमें कंपनियों की ओर से मांग के प्रमुख स्रोत के रूप में ज्यादातर अमेरिका का उल्लेख किया गया। इस मजबूत वैश्विक रुचि ने समग्र बिक्री और उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद की।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: CBI: 8.5 लाख खच्चर खातों के मामले में जांच के दायरे में आए बैंक अधिकारियों से होगी पूछताछ, आया यह अपडेट
विज्ञापन
अप्रैल 2024 के बाद से उत्पादन की मात्रा सबसे तेज दर से बढ़ी, जो मुख्य रूप से मध्यवर्ती सामान निर्माताओं की ओर से संचालित है। हालांकि, उपभोक्ता और पूंजीगत सामान उत्पादकों ने धीमी वृद्धि देखी। सक्रिय विपणन प्रयासों और बढ़ते निर्यात द्वारा समर्थित नए ऑर्डर भी अधिक तेजी से बढ़े।
मांग में मजबूत वृद्धि से रोजगार में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। मई में स्थिरता के बाद, जून में काम का बैकलॉग बढ़ गया, जिससे कई कंपनियों को अधिक कर्मचारियों को काम पर रखना पड़ा। इस भर्ती का अधिकांश हिस्सा अल्पकालिक जरूरतों के लिए था, जिसका उद्देश्य बढ़े हुए कार्यभार को संभालना था।
ये भी पढ़ें: Rules Change: ट्रेन टिकट से लेकर एलपीजी गैस की कीमतों तक..; आज से लागू हो रहे ये बदलाव, जेब पर पड़ेगा सीधा असर
एचएसबीसी के आंकड़ों के अनुसार लोहे और स्टील जैसे कच्चे माल की कीमतें उच्च बनी रहीं। कुल इनपुट लागत मुद्रास्फीति फरवरी के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई और यह ऐतिहासिक औसत से नीचे रही।
इसके बावजूद, बिक्री की कीमतें बढ़ती रहीं क्योंकि कंपनियों ने अपने ग्राहकों को उच्च लागत- जिसमें माल ढुलाई, श्रम और सामग्री शामिल हैं की जानकारी दी। कई फर्मों ने कहा कि वे मजबूत मांग के कारण कीमतें बढ़ाने में सक्षम थे। निर्माताओं ने कच्चे माल की अपनी खरीद भी बढ़ा दी, जो 14 महीनों में खरीद गतिविधि में सबसे मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन