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PMI: देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर दिसंबर में 18 महीने के निम्नतम स्तर पर, सर्वे में सामने आई यह बात

Wed, 03 Jan 2024 02:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 03 Jan 2024 02:36 PM IST
सार

PMI: एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल ने करीब 400 विनिर्माताओं के पैनल में खरीद प्रबंधकों को भेजी गई प्रश्नावली के जवाब से तैयार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र का दिसंबर में विस्तार जारी रहा, हालांकि पिछले महीनों में तेजी के बाद इसमें नरमी दिखी।

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India's manufacturing sector growth falls to 18-month low in Dec on softer rise in orders, output
पीएमआई।

विस्तार

न्यूनतम मुद्रास्फीति के बावजूद फैक्टरी ऑर्डर और उत्पादन में मामूली वृद्धि के बीच देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर दिसंबर में घटकर 18 महीने के निचले स्तर पर आ गई। एसएंडपी ग्लोबल की ओर से किए गए एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई सर्वेक्षण से पता चला है कि फैक्ट्री ऑर्डर और आउटपुट में नरमी आई है लेकिन, आने वाले समय के लिए कारोबारी विश्वास मजबूत हुआ है।

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मौसम के आधार पर समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) नवंबर के 56 से गिरकर दिसंबर में 18 महीने के निचले स्तर 54.9 पर आ गया। परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर का सूचकांक विस्तार को दर्शाता है जबकि 50 से नीचे का स्कोर संकुचन को दर्शाता है।
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एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल ने करीब 400 विनिर्माताओं के पैनल में खरीद प्रबंधकों को भेजी गई प्रश्नावली के जवाब से तैयार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत के विनिर्माण क्षेत्र का दिसंबर में विस्तार जारी रहा, हालांकि पिछले महीनों में तेजी के बाद इसमें नरमी दिखी।"
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एचएसबीसी के चीफ इंडिया इकोनामिस्ट प्रांजल भंडारी ने कहा, "आउटपुट और नए ऑर्डर दोनों की ग्रोथ में नरमी आई है, लेकिन दूसरी तरफ नवंबर के बाद से फ्यूचर आउटपुट इंडेक्स बढ़ा है। वृद्धि दर में कमी के बावजूद, इस क्षेत्र ने दिसंबर में मजबूती से विस्तार किया।" 

दिसंबर के आंकड़ों से पता चला है कि भारत में माल उत्पादकों के अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर प्राप्तियों में लगातार 21वीं वृद्धि हुई है। कंपनियों ने एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और उत्तरी अमेरिका में ग्राहकों से लाभ मिलने का उल्लेख किया है। नए निर्यात की बिक्री में मध्यम गति से वृद्धि हुई जो आठ महीनों में संयुक्त रूप से सबसे धीमी रही। 

कीमतों के मोर्चे पर, इनपुट लागत लगभग साढ़े तीन वर्षों में दूसरी सबसे धीमी दर से बढ़ी और मुद्रास्फीति नौ महीने के निचले स्तर पर आ गई। जिन वस्तुओं के दाम बढ़ने की खबर है उनमें रसायन, कागज और कपड़ा शामिल हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, नवंबर से मुद्रास्फीति की दर ऐतिहासिक मानकों के अनुसार लगभग नगण्य  और साढ़े तीन साल से कम समय में दूसरी बार सबसे कमजोर रही।


भंडारी ने कहा, "कच्चे माल और उत्पादन की कीमतों में वृद्धि की दरों में मोटे तौर पर कोई बदलाव नहीं हुआ।" एचएसबीसी इंडिया के पीएमआई आंकड़ों से पता चलता है कि तीसरी तिमाही के अंत में विनिर्माताओं की क्षमता पर दबाव कम हुआ है। दिसंबर में रोजगार काफी हद तक स्थिर रहा।

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