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PMI Manufacturing: दिसंबर में भारत की विनिर्माण वृद्धि दर 12 महीने के निचले स्तर पर, पीएमआई के आंकड़े जारी

Thu, 02 Jan 2025 12:03 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 02 Jan 2025 12:03 PM IST
सार

PMI Manufacturing: औद्योगिक क्षेत्र में मंदी के रुझान के और अधिक संकेत के बीच भारत की विनिर्माण गतिविधि 2024 में नरम रुख के साथ मजबूत रही। हालांकि, नए ऑर्डरों में विस्तार की दर साल में सबसे धीमी रही, जो भविष्य में उत्पादन में कमजोर वृद्धि का संकेत देती है। आइए इस बारे में और जानते हैं।

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India's manufacturing growth hits 12-month low in Dec amid softer rise in output, new orders
आगरा में जूते बनाता कारीगर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर दिसंबर में 12 महीने के निचले स्तर पर आ गई, क्योंकि नए व्यापार ऑर्डर और उत्पादन में धीमा विकास हुआ। गुरुवार को एक मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई।

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मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स दिसंबर में 56.4 पर था, यह नवंबर के 56.5 से कम रहा, जो परिचालन स्थितियों में कमजोर सुधार को दर्शाता है। गिरावट के बावजूद, मुख्य आंकड़ा 54.1 के अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर रहा, जिससे मजबूत वृद्धि दर का संकेत मिलता है। पीएमआई की भाषा में, 50 से ऊपर का अंक विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन को दर्शाता है।
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एचएसबीसी की अर्थशास्त्री इनेस लैम ने कहा, "औद्योगिक क्षेत्र में मंदी के रुझान के और अधिक संकेत के बीच भारत की विनिर्माण गतिविधि 2024 में नरम रुख के साथ मजबूत रही। नए ऑर्डरों में विस्तार की दर साल में सबसे धीमी रही, जो भविष्य में उत्पादन में कमजोर वृद्धि का संकेत देती है।" प्रतिस्पर्धा और मूल्य दबाव के कारण विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि बाधित हुई। लैम ने कहा कि नये निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि में कुछ वृद्धि हुई है, जो जुलाई के बाद सबसे तेज गति से बढ़ी है।
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सर्वेक्षण में कहा गया है, "हालांकि कुल नए कारोबार की तुलना में नई निर्यात बिक्री की दर धीमी रही, लेकिन निर्यात की वृद्धि की गति मजबूत हुई, क्योंकि कंपनियां दुनिया भर से अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डर प्राप्त करने में सक्षम रहीं।" सर्वेक्षण के अनुसार, विकास की "पर्याप्त" दर के परिणामस्वरूप खरीद स्तर और रोजगार में और अधिक वृद्धि हुई।

नए रोजगार में हो रहे सुधार के कारण भारत में विनिर्माण कम्पनियों को उत्पादन प्रक्रियाओं में उपयोग के लिए अतिरिक्त इनपुट खरीदने के लिए प्रेरित किया गया और रोजगार के मोर्चे पर, लगभग दस में से एक कम्पनी ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की, जबकि 2 प्रतिशत से भी कम कम्पनियों ने नौकरियों में कटौती की।


कीमतों के मोर्चे पर, नवंबर से कंटेनर, सामग्री और श्रम लागत में कथित रूप से वृद्धि के साथ, भारतीय निर्माताओं ने समग्र व्यय में एक और वृद्धि दर्ज की। हालांकि, महीने-दर-महीने के आधार पर, इनपुट मूल्य मुद्रास्फीति की दर ऐतिहासिक मानकों के अनुसार मध्यम थी। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल की ओर से लगभग 400 निर्माताओं के पैनल में क्रय प्रबंधकों को भेजी गई प्रश्नावली के उत्तरों से संकलित किया जाता है।

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