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Economy: पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद सात प्रतिशत की दर से बढ़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था, रिपोर्ट में दावा

Thu, 12 Mar 2026 12:42 PM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Thu, 12 Mar 2026 12:42 PM IST
सार

नोमुरा के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 7% की दर से बढ़ सकती है। हालांकि लंबे समय तक तनाव रहने पर ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

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India's economy to grow at 7% despite tensions in West Asia, report claims
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

दिग्गज जापानी निवेश बैंक नोमुरा ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब सात प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। हालांकि बैंक ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय संघर्ष भारत के तथाकथित गोल्डीलॉक्स आर्थिक दौर के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

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ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति पर बढ़ सकता है दबाव

नोमुरा की भारत और एशिया (जापान को छोड़कर) की मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा और अर्थशास्त्री ऑरोदीप नंदी की रिपोर्ट के अनुसार, अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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जीडीपी ग्रोथ को लेकर क्या है अनुमान?

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए चालू खाता घाटा (CAD) के अनुमान को 0.4 प्रतिशत बढ़ाकर जीडीपी के 1.6 प्रतिशत तक किया गया है।
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  • वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • इसके साथ ही जीडीपी वृद्धि अनुमान में मामूली कटौती करते हुए इसे 7.1 प्रतिशत से घटाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया गया है।

भू-राजनीतिक तनाव का क्या पड़ रहा असर?

नोमुरा के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि भारत में निजी उपभोग और औद्योगिक गतिविधियों में गति बनी हुई है। हालांकि निर्यात और सरकारी खर्च अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति, विशेषकर प्राकृतिक गैस की कमी, घरेलू उद्योग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

इसके बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले किए गए नीतिगत कदमों में ढील, संरचनात्मक सुधार, वेतन वृद्धि और अमेरिका के साथ व्यापार तनाव में कमी जैसे कारक भारत में चक्रीय आर्थिक सुधार को समर्थन दे सकते हैं।

ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखने की संभावना 

नोमुरा ने यह भी कहा कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से एशिया की कई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जो फिलहाल अपेक्षाकृत निम्न स्तर पर है।
ब्याज दरों के मोर्चे पर निवेश बैंक का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कई केंद्रीय बैंक फिलहाल नीतिगत दरों को स्थिर रख सकते हैं। हालांकि ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी बन सकती है।


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