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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   India's CAD likely to stay at 1.1 per cent of GDP in FY25: ICICI bank report

ICICI Report: देश का चालू खाता घाटा वित्तीय वर्ष 2025 में जीडीपी का एक फीसदी रह सकता है, रिपोर्ट में दावा

Mon, 30 Dec 2024 11:25 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 30 Dec 2024 11:25 AM IST
सार

ICICI Report: अक्तूबर-नवंबर 2024 में इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान निर्यात में क्रमशः 50 प्रतिशत और 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि सोने के आयात को प्रबंधित करने के सरकारी प्रयासों के बावजूद, कमजोर वैश्विक विकास परिदृश्य के कारण व्यापार घाटा के मोर्चे पर दबाव में रहने की संभावना है। रिपोर्ट में और क्या है आइए जानें।

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India's CAD likely to stay at 1.1 per cent of GDP in FY25: ICICI bank report
जीडीपी में वृद्धि से अर्थशास्त्री उत्साहित - फोटो : एएनआई

विस्तार

आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में भारत का चालू खाता घाटा ( CAD ) सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) का 1.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में हाल के महीनों में देश की बाहरी स्थिति में महत्वपूर्ण बदलावों पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार व्यापार घाटे और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश ( FPI) के कारण ये बदलाव आए हैं। 

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रिपोर्ट में कहा गया "हमें वित्त वर्ष 25 में चालू खाते घाटे के जीडीपी के 1.1 प्रतिशत पर रहने की उम्मीद है। " नवंबर 2024 में, भारत का व्यापार घाटा 37.8 बिलियन अमरीकी डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण कुल 14.9 बिलियन अमरीकी डॉलर का सोना आयात था। इसके अतिरिक्त, गैर-तेल और गैर-सोने के उत्पादों का आयात बढ़ रहा है। अक्तूबर-नवंबर 2024 के दौरान साल-दर-साल यह 3.5 प्रतिशत बढ़ा है।  इसी अवधि के दौरान तेल निर्यात में 36 प्रतिशत की गिरावट आई है, वहीं गैर-तेल निर्यात में सकारात्मक रुझान दिखा है। 
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अक्तूबर-नवंबर 2024 में इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान निर्यात में क्रमशः 50 प्रतिशत और 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि सोने के आयात को प्रबंधित करने के सरकारी प्रयासों के बावजूद, कमजोर वैश्विक विकास परिदृश्य के कारण व्यापार घाटा के मोर्चे पर दबाव में रहने की संभावना है। इसका श्रेय दुनिया भर में ब्याज दरों में वृद्धि को दिया जाता है, जिसमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरों के लिए उच्च प्रक्षेपवक्र का संकेत देता है।
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 रिपोर्ट में कहा गया है कि "भले ही सरकार सोने के आयात को समेटने पर काम कर रही हो, लेकिन वैश्विक विकास परिदृश्य कम होने के कारण व्यापार घाटे का परिदृश्य खराब है"। 

इसमें कहा गया है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह मजबूत बना हुआ है; हालांकि, भारत के संपन्न प्राथमिक इक्विटी बाजार में निकासी के कारण अधिक बहिर्वाह ने लाभ को कम कर दिया है। परिणामस्वरूप, भुगतान संतुलन (BoP) परिदृश्य में काफी बदलाव आया है। वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में 23.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सरप्लस देखा गया, जबकि दूसरी छमाही में भारी गिरावट देखी जा रही है।


वित्त वर्ष 2025 के लिए समग्र बीओपी अधिशेष तटस्थ रहने की उम्मीद है, अगर एफपीआई का बहिर्वाह अनुमान से अधिक होता है तो इसके नकारात्मक होने का जोखिम है। सकारात्मक बात यह है कि भारत के सेवा निर्यात और विदेश से भारत भेजे जाने वाले धन (Remittances) में में मजबूत वृद्धि देखी गई है, जिससे उच्च सोने के आयात और कमजोर तेल निर्यात के प्रभाव को कम करने में मदद मिली है।  व्यापार और पूंजी प्रवाह परिदृश्य में बढ़ती चुनौतियों के बावजूद सीएडी प्रबंधन योग्य बना हुआ है।

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