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WHO: भारत की आयुष प्रणाली ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, WHO की रिपोर्ट में मिला विशेष स्थान
Sat, 12 Jul 2025 04:46 PM IST
रिया दुबे
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रिया दुबे
Updated Sat, 12 Jul 2025 04:46 PM IST
सार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी एक रिपोर्ट में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, विशेष रूप से आयुष प्रणालियों के साथ एआई में भारत के अग्रणी प्रयासों को मान्यता दी है। इस रिपोर्ट में भारत के आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों में एआई-आधारित कई नवाचारों को शामिल किया गया है।
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एआई जेनरेटेड
- फोटो : AdobeStock
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विस्तार
वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में भारत को बड़ी उपलब्धि मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में भारत के आयुष इनोवेशन और उसमें एआई के अग्रमी प्रयासों को शामिल किया गया है। इस रिपोर्ट का शीर्षक है "पारंपरिक चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग का मानचित्रण"।
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आयुष मंत्रालय ने शनिवार को बातया कि डब्ल्यूएचओ की यह रिपोर्ट भारत के ही एक प्रस्ताव पर आधारित है। इसके बाद परंपरागत चिकित्सा में एआई के उपयोग के लिए यह पहली वैश्विक रूपरेखा तैयार की गई।
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रिपोर्ट में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को किया गया शामिल
इस रिपोर्ट में भारत के आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों में एआई-आधारित कई नवाचारों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में प्राकृति मूल्यांकन, नाड़ी परीक्षण, जीभ निरीक्षण जैसे पारंपरिक तरीकों को मशीन लर्निंग और डीप न्यूरल नेटवर्क्स से जोड़ने वाले डायग्नोसिस सपोर्ट सिस्टम्स की सराहना की गई है। ये प्रयास निदान सटीकता को बढ़ा रहे हैं और व्यक्तिगत देखभाल को सक्षम बना रहे हैं।
आयुर्जेनोमिक्स को मिला वैश्विक मंच
रिपोर्ट में एक विशेष नवाचार "आयुर्जेनोमिक्स" का उल्लेख किया गया है। यह एक वैज्ञानिक उपलब्धि है जो जीनोमिक्स को आयुर्वेदिक सिद्धांतों के साथ जोड़ती है। इनसे बीमारी की भविष्यवाणी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य अनुशंसा को एआई के माध्यम से संभव बना रही है। साथ ही, पारंपरिक हर्बल दवाओं की आणविक संरचना को समझकर उन्हें आधुनिक बीमारियों में दोबारा उपयोग के लिए तैयार करने की दिशा में भारत के प्रयासों को बड़ी उपलब्धि बताया गया है।
पारंपरिक ज्ञान का डिजिटलीकरण
भारत के पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल) की तारीफ करते हुए डब्ल्यूएचओ ने इसे प्राचीन चिकित्सा ज्ञान के संरक्षण और जिम्मेदार उपयोग का वैश्विक मॉडल बताया है। साथ ही, प्राचीन ग्रंथों के सूचीकरण और अर्थ विश्लेषण के लिए एआई-संचालित उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे समय-परीक्षित चिकित्सीय ज्ञान तक आसान पहुँच संभव हो रही है।
2018 में लॉन्च हुआ डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि इस डिजिटल परिवर्तन के मूल में आयुष ग्रिड है। 2018 में लॉन्च किया गया एक व्यापक डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म, जो कई नागरिक-केंद्रित पहलों जैसे कि SAHI पोर्टल, NAMASTE पोर्टल और आयुष अनुसंधान पोर्टल की नींव का काम करता है। साथ मिलकर, ये AI-सक्षम प्लेटफॉर्म न केवल सहेजने का कार्य किया है, बल्कि इसे वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे में प्रमाण आधारित तरीके से एकीकृत करने की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया है।
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