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India Russia Trade: 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार करेंगे भारत-रूस, इन क्षेत्र में बढ़ाएंगे निवेश

Tue, 09 Jul 2024 10:56 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 09 Jul 2024 10:56 PM IST
सार

India Russia: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 22वें वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान कई क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसमें दोनों देश 2030 तक सौ बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार करेंगे।

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India, Russia eye USD 100 bn trade by 2030, cooperation in energy, agriculture
पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात - फोटो : X / @PMOIndia

विस्तार

भारत और रूस ने बुधवार को निवेश को पुनर्जीवित करके, व्यापार के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करके और ऊर्जा से लेकर कृषि और बुनियादी ढांचे तक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है।
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द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के बाद साझा बयान
मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 22वें वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में, दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के विकास के लिए प्रतिबद्धता दोहराई और रूस-भारत व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देकर द्विपक्षीय बातचीत को गहरा करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का संकल्प लिया।
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इन नौ प्रमुख क्षेत्रों पर बनी सहमति
दोनों पक्षों ने सहयोग के लिए नौ प्रमुख क्षेत्रों पर सहमति व्यक्त की, जिनमें व्यापार, राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करके व्यापार निपटान, उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे नए मार्गों के माध्यम से कार्गो कारोबार में वृद्धि, कृषि उत्पादों, खाद्य और उर्वरक में व्यापार की मात्रा में बढ़ोत्तरी, परमाणु ऊर्जा समेत ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को गहरा करना, बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बातचीत को मजबूत करना, डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश और संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देना, दवाओं की आपूर्ति पर सहयोग करना और मानवीय सहयोग का विकास शामिल हैं।
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100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापार पर सहमति
इस दोनों राष्ट्रप्रमुखों ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार से संबंधित गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं को समाप्त करने और ईएईयू-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र की स्थापना की संभावना समेत द्विपक्षीय व्यापार के उदारीकरण के क्षेत्र में बातचीत जारी रखने की आकांक्षा पर सहमति व्यक्त की। बता दें कि इसका उद्देश्य साल 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की पारस्परिक रूप से सहमत व्यापार मात्रा प्राप्त करना है, जिसमें संतुलित द्विपक्षीय व्यापार प्राप्त करने के लिए भारत से माल की आपूर्ति में वृद्धि शामिल है। इसके साथ ही, विशेष निवेश व्यवस्थाओं के ढांचे के भीतर निवेश गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने पर सहमति व्यक्त की गई।

भारतीय रूपये में हो सकती है कच्चे तेल की खरीद
वहीं इस दौरान संयुक्त बयान में कहा गया कि वे राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करके द्विपक्षीय निपटान प्रणाली के विकास पर सहमत हुए। इसका मतलब यह है कि भारत की तरफ से रूस से कच्चे तेल जैसी किसी भी खरीद का भुगतान संभावित रूप से भारतीय रुपये में किया जा सकता है। इसके बाद रूस की तरफ से भारत से आयात के भुगतान के लिए इस मुद्रा का उपयोग किया जा सकता है। इसके विपरीत रूसी रूबल का उपयोग भी संभव है।

परमाणु ऊर्जा, कृषि, पशु चिकित्सा समझौते में शामिल
दोनों नेताओं ने कहा कि वे कृषि उत्पादों, खाद्य और उर्वरकों में द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ पशु चिकित्सा, स्वच्छता और फाइटोसैनिटरी प्रतिबंधों और निषेधों को हटाने के उद्देश्य से गहन संवाद बनाए रखने के पक्ष में थे। जबकि परमाणु ऊर्जा, तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल्स समेत प्रमुख ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग का विकास और ऊर्जा बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकियों और उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग और साझेदारी के विस्तारित रूप भी समझौते का हिस्सा थे।

तमाम क्षेत्रों में निरंतर विस्तार के पक्ष में दोनों देश
इस दौरान संयुक्त बयान में डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान और अनुसंधान, शैक्षिक आदान-प्रदान और उच्च तकनीक कंपनियों के कर्मचारियों के लिए इंटर्नशिप के कई क्षेत्रों में निवेश और संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने अनुकूल राजकोषीय व्यवस्था प्रदान करके नई संयुक्त (सहायक) कंपनियों के निर्माण की सुविधा के लिए भी सहमति जताई। दोनों पक्ष ने मानवीय सहयोग विकसित करने, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, संस्कृति, पर्यटन, खेल, स्वास्थ्य सेवा और अन्य क्षेत्रों में परस्पर संपर्क के निरंतर विस्तार के पक्ष में थे।


भारत में संयुक्त उद्यम स्थापित करने पर रूस सहमत
वहीं इस शिखर सम्मेलन के दौरान रूस ने भारत में संयुक्त उत्पादन सुविधाएं स्थापित करके रूसी मूल के सैन्य प्लेटफार्मों के स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति में देरी पर भारत की चिंताओं को दूर करने पर सहमति व्यक्त की। विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर वार्ता में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ आपूर्ति में देरी का मुद्दा उठाया था।
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