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Cryptocurrency: 'क्रिप्टोकरंसी को पूरी तरह नियंत्रित करने वाला कानून नहीं बनाएगी सरकार ', रिपोर्ट में खुलासा

Wed, 10 Sep 2025 08:45 PM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 10 Sep 2025 08:45 PM IST
सार

Cryptocurrency: भारत सरकार क्रिप्टोकरंसी पर ऐसा सख्त कानून नहीं लाना चाहती जो इसे पूरी तरह नियंत्रित करे, क्योंकि इससे इसे वैधता मिल सकती है और यह देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। सरकार आंशिक नियंत्रण बनाए रखना चाहती है, जबकि आरबीआई का मानना है कि केवल नियमों से क्रिप्टो से जुड़ी जोखिमों को रोकना मुश्किल है। एक रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेज के हवाले से यह बात कही गई है। 

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India resists full crypto framework, fears systemic risks, document shows
क्रिप्टो करंसी - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

भारत सरकार क्रिप्टोकरंसी को लेकर ऐसा कानून बनाने के पक्ष में नहीं है, जो इसे पूरी तरह से नियंत्रित करे। इसके बजाय, सरकार आंशिक नियंत्रण बनाए रखने की योजना बना रही है, क्योंकि उसका मानना है कि इस डिजिटल संपत्ति को देश की मुख्यधारा की वित्तीय व्यवस्था में शामिल करना बड़े जोखिम खड़े कर सकता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में एक सरकारी दस्तावेज के हवाले से जानकारी दी गई है। 
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रिपोर्ट के मुताबिक, इस दस्तावेज में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की उस सलाह का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि क्रिप्टोकरंसी से जुड़े जोखिमों को केवल नियमों के जरिए रोक पाना वास्तव में मुश्किल होगा।  
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क्रिप्टोकरंसी की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता में सुधार हुआ, खासकर जबसे अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार कार्यभार संभाला है। बिटकॉइन के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टो संपत्ति है। अमेरिका ने भी एक ऐसा विधेयक पास किया है, जो स्टेबलकॉइंस के व्यापाक उपयोग की अनुमति देता है। स्टेबलकॉइनंस वह क्रिप्टोकरंसी होती है, जो किसी सामान्य मुद्रा (जैसे डॉलर) से जुड़ी होती है और इस वजह से इसमें उतार-चढ़ाव कम होता है। 
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चीन ने अब भी क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। लेकिन पिछले महीने रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया कि वह युआन से जुड़ा स्टेबलकॉइन लाने पर विचार कर रहा है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश क्रिप्टो संपत्तियों के लिए नियम बना रहे हैं, लेकिन बहुत सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और इस क्षेत्र को सक्रिय रूप से बढ़ावा नहीं दे रहे हैं। 

भारत में अगर सरकार क्रिप्टोकरंसी को विनियमित (रेगुलेट) करने के लिए कानून बनाती है तो इससे उसे 'वैधता' मिल जाएगी, जिससे यह क्षेत्र इतना बड़ा हो सकता है कि यह देश की वित्तीय प्रणाली के लिए खतरा बन सकता है। यह बात सितंबर 2025 में तैयार किए गए सरकारी दस्तावेज में कही गई है।


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इसके विपरीत अगर सरकार पूरी तरह से इस पर प्रतिबंध लगाती है, तो इससे इन क्रिप्टो संपत्तियों से जुड़े चौंकाने वाले जोखिमों को काबू किया जा सकता है। लेकिन अगर प्रतिबंध नहीं लगाती है, तब लोग आपस में सीधे लेन-देन कर सकते हैं या इंटरनेट पर मौजूद ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर क्रिप्टो का लेन-देन कर सकते हैं, जिन्हें सरकार नियंत्रित नहीं कर सकती। सरकार की यह औपचारिक राय अब तक सार्वजनिक नहीं हुई थी। साल 2021 में सरकार ने निजी क्रिप्टोकरंसी को प्रतिबंधित करने के लिए एक विधेयक तैयार किया था, लेकिन उसे संसद में पेश नहीं किया गया था। 
 
साल 2023 में जब भारत जी20 का अध्यक्ष था, तब उसने वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोकरंसी को रेगुलेट करने के लिए एक ढांचा बनाने की बात की थी। 2024 में सरकार ने इस मुद्दे पर एक चर्चा पत्र (डिस्कशन पेपर) जारी करने की योजना बनाई थी लेकिन उसे यह कहकर टाल दिया गया कि पहले अमेरिका के क्रिप्टो पर रुख को देखा जाएगा।
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