कोरोना का उद्योगों पर होगा बड़ा असर, बढ़ेगा राजकोषीय घाटा : इंडिया रेटिंग्स
घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का कहना है कि चीन का वुहान शहर इस महामारी का केंद्र है और यही शहर ऑटोमोबाइल और ऑटो कलपुर्जों के लिए उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। इस महामारी की वजह से वुहान में कारखाने बंद हैं, जिससे वाहन उद्योग के लिए जरूरी वस्तुओं का आयात ठप पड़ गया है।
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कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने से निकट भविष्य में घरेलू वाहन उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इससे बिक्री और उत्पादन दोनों प्रभावित होगा। घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का कहना है कि चीन का वुहान शहर इस महामारी का केंद्र है और यही शहर ऑटोमोबाइल और ऑटो कलपुर्जों के लिए उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। इस महामारी की वजह से वुहान में कारखाने बंद हैं, जिससे वाहन उद्योग के लिए जरूरी वस्तुओं का आयात ठप पड़ गया है। इसका असर घरेलू स्तर पर उत्पादन पर पड़ रहा है।
रेटिंग एजेंसी ने एक बयान में कहा कि अगर कोविड-19 का प्रसार दो महीने से अधिक समय तक रहता है तो इससे न सिर्फ घरेलू बल्कि वैश्विक स्तर पर भी वाहन उद्योग प्रभावित होगा। साथ ही वाहन क्षेत्र को न सिर्फ आपूर्ति पक्ष बल्कि मांग पक्ष और निर्यात के मोर्चे से भी दबाव का सामना करना पड़ेगा। भारतीय ऑटो कलपुर्जा उद्योग और उपकरण निर्माता काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं। वे 27 फीसदी कलपुर्जे और अन्य जरूरी वस्तुओें का आयात चीन से ही करते हैं।
इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि चीनी नव वर्ष के बाद भी पड़ोसी देश में उत्पादन ठप पड़ा हुआ है। इससे घरेलू वाहन कंपनियों के लिए आपूर्ति से जुड़े जोखिम पैदा हो गए हैं। घरेलू बिक्री में कमी और मार्जिन के दबाव के साथ ही अगर आपूर्ति पक्ष से कोई झटका लगता है तो इस क्षेत्र की कंपनियों का परिचालन प्रभावित हो सकता है। उनके समक्ष पूंजी संकट की समस्या खड़ी हो सकती है।
मार्जिन में गिरावट की आशंका
रेटिंग एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि सामान्य स्थितियों के बावजूद अगर आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतें आती हैं तो घरेलू उत्पादकों के मार्जिन में 0.3 गुने की कमी आने की आंशका दिखाई दे रही है। इसमें आगे यह भी कहा गया है कि बिक्री में लगातार गिरावट का सामना कर रहीं घरेलू वाहन कंपनियों के लिए अपने बलबूते इस महामारी से उबरना आसान नहीं है। इस उद्योग के बचाने और महामारी से निपटने में सक्षम बनाने के लिए सरकार को राहत संबंधी उपाय करने चाहिए। ऐसे में अन्य सरकारों की तरह भारत सरकार को इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत है।