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Report: भारत को अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय के चौथे हिस्से तक पहुंचने में लगेंगे 75 साल, विश्व बैंक का दावा

Sat, 03 Aug 2024 02:57 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 03 Aug 2024 02:57 PM IST
सार

Report: विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ दशकों में भारत समेत 100 से ज्यादा देशों को उच्च आय वाला देश बनने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत को प्रति व्यक्ति अमेरिकी आय की एक चौथाई तक ही पहुंचने में करीब 75 साल लग सकते हैं।

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India May Take 75 Years To Reach 1/4th Of US Per Capita Income: World Bank
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

विस्तार

विश्व बैंक की 'विश्व विकास रिपोर्ट 2024: द मिडिल इनकम ट्रैप' के अनुसार, चीन को प्रति व्यक्ति अमेरिकी आय के एक-चौथाई तक पहुंचने में 10 वर्षों से अधिक का समय लगेगा। इस उपलब्धि को हासिल करने में इंडोनेशिया को लगभग 70 साल लगेंगे।

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विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ दशकों में भारत समेत 100 से ज्यादा देशों को उच्च आय वाला देश बनने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत को प्रति व्यक्ति अमेरिकी आय की एक चौथाई तक ही पहुंचने में करीब 75 साल लग सकते हैं।
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विश्व विकास रिपोर्ट 2024: द मिडिल इनकम ट्रैप के अनुसार, चीन को प्रति व्यक्ति अमेरिकी आय के एक-चौथाई तक पहुंचने में 10 साल से अधिक का समय लगेगा। जबकि इंडोनेशिया को यह उपलब्धि हासिल करने में लगभग 70 साल लगेंगे।
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पिछले 50 साल के अनुभव के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि देश जैसे-जैसे अमीर होते जाते हैं, वे आमतौर पर प्रति व्यक्ति सालाना अमेरिकी जीडीपी के करीब 10 फीसदी पर 'एक जाल' में फंस जाते हैं, जो कि वर्तमान समय में करीब 8,000 डॉलर के बराबर है।  विश्व बैंक मध्यम आय वाले देशों को जिस राशि के आधार पर वर्गीकृत करता है, यह उसके ठीक मध्य की राशि है।

वर्ष 2023 के अंत में 108 देशों को मध्यम आय के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिनकी प्रति व्यक्ति वार्षिक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 1,136 अमेरिकी डॉलर से 13,845 अमेरिकी डॉलर के बीच थी। इन देशों में छह अरब लोग रहते हैं - जो वैश्विक आबादी का 75 प्रतिशत - और इन देशों में हर तीन में से दो लोग अत्यधिक गरीबी में रहते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से बढ़ती आबादी और बढ़ता कर्ज, भयंकर भूराजनीतिक और व्यापार घर्षण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आर्थिक प्रगति को गति देने की बढ़ती कठिनाई की तुलना में आगे का रास्ता और भी कठिन चुनौतियां हैं।

रिपोर्ट के अनुसार फिर भी कई मध्यम आय वाले देश अभी भी पिछली शताब्दी से एक प्लेबुक का उपयोग करते हैं, मुख्य रूप से निवेश का विस्तार करने के लिए डिजाइन की गई नीतियों पर भरोसा करते हैं। यह कार को सिर्फ पहले गियर में चलाने और इसे तेज करने की कोशिश करने जैसा है।

विश्व बैंक समूह के मुख्य अर्थशास्त्री और विकास अर्थशास्त्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंदरमित गिल ने कहा कि अगर वे पुरानी प्लेबुक के साथ चिपके रहते हैं, तो अधिकांश विकासशील देश इस सदी के मध्य तक यथोचित समृद्ध समाज बनाने की दौड़ में स्थिति खो देंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'मौजूदा रूझानों के हिसाब से चीन को प्रति व्यक्ति अमेरिकी आय के एक चौथाई हिस्से तक पहुंचने में ही 10 साल से अधिक का वक्त लगेगा, इंडोनेशिया को करीब 70 साल और भारत को यह उपलब्धि हासिल करने में करीब 75 साल लगेंगे। गिल ने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक समृद्धि की लड़ाई मध्यम आय वाले देशों में काफी हद तक जीती या हारी जाएगी।


रिपोर्ट में देशों के लिए उच्च आय की स्थिति तक पहुंचने की रणनीति का प्रस्ताव है। विकास के अपने चरण के आधार पर, सभी देशों को नीतियों के अनुक्रम और उत्तरोत्तर अधिक परिष्कृत मिश्रण को अपनाने की आवश्यकता है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 1990 के बाद से, केवल 34 मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाएं उच्च आय की स्थिति में खुद को स्थानांतरित करने में कामयाब रही हैं- और उनमें से एक तिहाई से अधिक को या तो यूरोपीय संघ में जुड़ने का लाभ मिला था, या उनके पास क्रूड ऑयल का भंडार था।

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