SBI in Israel: भारत-इस्राइल के बीच रुपये में व्यापार को मिलेगा बढ़ावा, जानिए एसबीआई की ओर से क्या है अपडेट
भारत और इस्राइल के बीच अब डॉलर की जगह भारतीय रुपये व्यापार हो सकता है। जानें कैसे SBI और RBI की यह पहल द्विपक्षीय व्यापार, MSMEs और प्रस्तावित FTA को नई मजबूती देगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत और इस्राइल के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों और प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की चर्चाओं के बीच एक बड़ा वित्तीय सुधार दिख रहा है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), इस्राइल में मौजूद एकमात्र भारतीय बैंक है, यह अब द्विपक्षीय व्यापार को रुपये (INR) में सुगम बनाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है। यह कदम न केवल भारतीय मुद्रा के अंतरराष्ट्रीयकरण के सरकार के लक्ष्य के अनुरूप है, बल्कि इससे दोनों देशों के आयातकों और निर्यातकों के लिए विनिमय दर का जोखिम भी कम होगा।
रुपये में सेटलमेंट का फैसला, क्यों है महत्वपूर्ण?
एसबीआई इस्राइल के सीईओ, वी. मणिवन्नन ने इस बारे में आधिकारिक बयान देते हुए कहा, "भारत के अपने साझेदार देशों के साथ रुपये में व्यापार करने की बढ़ती रुचि को देखते हुए, हमारे बैंकिंग नियामक यानी भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को अपने कॉर्पोरेट ग्राहकों के निर्यात और आयात के निपटान को रुपये में करने की अनुमति दी है। इस्राइल को इस तंत्र के तहत साझेदार देशों में से एक के रूप में पहचाना गया है।" यह तंत्र 'स्पेशल रुपया वोस्ट्रो अकाउंट' (SRVA) के जरिए काम करेगा, जिससे इस्राइली कंपनियां सीधे रुपये में भुगतान कर सकेंगी और उसे हासिल कर सकेंगी।
भारत और इजराइल के बीच आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का इजराइल को निर्यात लगभग 2.14 बिलियन डॉलर रहा, जबकि आयात 1.48 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया। कुल द्विपक्षीय व्यापार (रक्षा को छोड़कर) 3.62 बिलियन डॉलर के करीब रहा।
दोनों देशों के बीच व्यापार में मुख्य रूप से हीरे, पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च तकनीक वाले उत्पाद शामिल हैं। एसबीआई की तेल अवीव शाखा (रमत गन में स्थित) 2007 से संचालित है। यह शाखा इस्राइली कंपनियों को ट्रेड फाइनेंस, बैंक गारंटी और कॉर्पोरेट बैंकिंग सेवाएं प्रदान करती है।
क्या होगा इस कवायद असर?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत और इस्राइल जनवरी 2026 में नई दिल्ली में प्रस्तावित एनटीए के ढांचे पर चर्चा करने वाले हैं। रुपये में व्यापार होने से निम्नलिखित लाभ होने की उम्मीद है। डॉलर कन्वर्जन फीस हटने से एमएसएमई और बड़े कॉरपोरेट दोनों को फायदा होगा। स्थानीय मुद्रा में व्यापार की सुविधा से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के कार्यान्वयन में आसानी होगी।
वैश्विक व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने के भारत के व्यापक विजन को मजबूती मिलेगी। एसबीआई की ओर से इस्राइल के साथ रुपये में व्यापार को बढ़ावा देना भारत-इस्राइल संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। जैसे-जैसे दोनों देश तकनीक, कृषि और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं, यह वित्तीय सेतु भविष्य के अरबों डॉलर के व्यापार के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार करेगा।