अमेरिकी थिंक टैंक ब्रुकिंग्स का दावा: भारत अत्यंत गरीबी से मुक्त, आय असमानता भी घटी, केंद्र की नीति को सराहा
द बुकिंग्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में: 1.9 डॉलर और 3.2 डॉलर पीपीपी के आधार पर 1977 से 2023 तक गरीबी अनुपात को दर्शाया गया है। इसमें पता चलता है कि एचसीआर में पिछले एक दशक में तेजी से गिरावट आई है।
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नीतिगत सुधारों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के दम पर भारत ने खुद को अत्यंत गरीबी से मुक्त कर लिया है। गरीबों को आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल कर इसका लाभ उठाने में सक्षम बनाने से आय असमानता में बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी थिंक टैंक द ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट ने एक रिपोर्ट में कहा, भारत में बीते एक दशक में समावेशी, विकास हुआ है। मजबूत नीति के दम पर भारत सरकार संसाधनों के बेहतर पुनर्वितरण में सफल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था की उच्च वृद्धि दर और आय असमानता में कमी से देश में गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की क्रय शक्ति समानता (पीपीपी) यानी खरीद क्षमता 1.9 डॉलर प्रति व्यक्ति तक पहुंच गई है। इससे यह पुष्टि होती है कि भारत में अत्यंत गरीबी खत्म हो चुकी है।
भारतीयों के उपभोग खर्च के आंकड़ों पर आधारित है रिपोर्ट
बुकिंग्स के लिए रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पूर्व कार्यकारी निदेशक सुरजीत भल्ला और अल्बनी यूनिवर्सिटी के शोध छात्र करण भसीन ने बनाई है।
74.7% हुई पाइप से पानी तथ ग्रामीण इलाकों में पहुंच
सुरक्षित जल तक पहुंच से लोगों में बीमारियां कम हुई हैं, जिससे परिवारों को अधिक आय अर्जित करने में मदद मिल रही है।
सिर्फ 2 फीसदी लोग ही गरीबी रेखा से नीचे
1.9 डॉलर की क्रय शक्ति समानता के हिसाब से 2011-12 के दौरान देश में 12.2% लोग हेडकाउंट गरीबी अनुपात (एचसीआर) यानी गरीबी रेखा से नीचे थे। यह अनुपात 2022-23 में घटकर 2% रह गया। ग्रामीण भारत में गरीबी दर 2.5% और शहरी इलाकों में 1% है।
…तो लग जाते 30 साल
द बुकिंग्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में: 1.9 डॉलर और 3.2 डॉलर पीपीपी के आधार पर 1977 से 2023 तक गरीबी अनुपात को दर्शाया गया है। इसमें पता चलता है कि एचसीआर में पिछले एक दशक में तेजी से गिरावट आई है। एचसीआर में यह कमी इस वजह से भी उल्लेखनीय है कि जितनी गिरावट एक दशक में हुई, उतनी गिरावट में पहले की रफ्तार से 30 साल लग जाते।
सरकार की नीतियों ने बढ़ाई रफ्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की मजबूत सार्वजनिक वितरण नीतियों और संसाधनों के बेहतर वितरण से ग्रामीण इलाकों में उपभोग बढ़ा है। इससे गरीबी में तेजी से गिरावट आई है। शौचालयों का निर्माण, बिजली, उज्ज्वला गैस योजना, नल से जल और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने ग्रामीण आबादी को खासतौर पर गरीबी से बाहर निकलने में मदद की है।
भारत की स्थिति अमेरिका से बेहतर
रिपोर्ट के मुताबिक, गिनी सूचकांक में भारत की स्थिति अमेरिका से बेहतर है। अमेरिका का सूचकांक 39.8 है, जबकि भारत का 34.2। भारत में 2022-23 के लिए शहरों में यह सूचकांक 36.7 से घटकर 31.9 पर आया। ग्रामीण इलाकों में 28.7 से 27 पर आया। आंकड़े बताते हैं, भारत में आय, उपभोग व संपत्ति वितरण में असमानता घट रही है।