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India-UK FTA: एफटीए में ब्रिटेन के कार्बन कर से छूट पाने में विफल रहा भारत, सवाल उठे तो सरकार ने दिया यह जवाब

Fri, 25 Jul 2025 04:05 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 25 Jul 2025 04:05 PM IST
सार

India-UK FTA: भारत गुरुवार को हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते में ब्रिटेन के कार्बन कर से छूट हासिल करने में असमर्थ रहा है। इस कदम से ब्रिटेन को भारत के कार्बन-गहन निर्यात पर असर पड़ेगा। थिंक टैंक जीटीआरआई ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की है। हालांकि, सरकार से जूड़े सूत्रों ने दावा किया है इस टैक्स के लगने की स्थिति में भारत के पास कदम उठाने का अधिकार है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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India fails to secure exemption from UK carbon tax in trade agreement: GTRI
भारत-ब्रिटेन एफटीए - फोटो : x.com/@narendramodi

विस्तार

भारत गुरुवार को हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते में ब्रिटेन के कार्बन कर से छूट हासिल करने में असमर्थ रहा है। इस कदम से ब्रिटेन को भारत के कार्बन-गहन निर्यात पर असर पड़ेगा। थिंक टैंक जीटीआरआई ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की है। हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि भविष्य में ब्रिटेन की ओर से कार्बन टैक्स लगाया जाता है तो भारत के पास कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित है।

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दिसंबर 2023 में यूके सरकार ने 2027 से कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को लागू करने का निर्णय लिया। सीबीएएम (कार्बन सीमा समायोजन तंत्र) पर छूट या छूट खंड हासिल न करके, भारत ने एक महत्वपूर्ण अवसर खो दिया
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ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि, "हमें अपने कार्बन-गहन निर्यात की रक्षा करनी होगी।"

उन्होंने कहा, "जनवरी 2027 से, ब्रिटेन भारतीय इस्पात और एल्युमीनियम पर कार्बन कर लगा सकता है, जबकि हम ब्रिटेन के सामानों को शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान करते हैं। यह एक गंभीर असमानता है। यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौते में भी यही व्यवहार अपेक्षित है।"
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जीटीआरआई ने मई में कहा था कि ब्रिटेन द्वारा 2027 से लोहा और इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक और सीमेंट जैसे उत्पादों पर कार्बन टैक्स लगाने के निर्णय के कारण भारत से ब्रिटेन को होने वाले 775 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

यूरोपीय संघ (ईयू) के बाद, ब्रिटेन सीबीएएम लागू करने वाली दूसरी अर्थव्यवस्था होगी। यह कर शुरुआत में लोहा, इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक, हाइड्रोजन, सिरेमिक, कांच और सीमेंट जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। यह कर 14-24 प्रतिशत तक हो सकता है।

भारत ने पहले भी इस कर पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी और इसे व्यापार बाधा बताया था। एक अधिकारी ने कहा कि यदि भविष्य में उठाए गए कदमों से घरेलू निर्यात प्रभावित होता है तो नई दिल्ली ने जवाबी कार्रवाई करने या रियायतों को पुनर्संतुलित करने का अपना अधिकार सुरक्षित रखा है।

कार्बन कर लगने पर भारत के पास कदम उठाने का अधिकार: सूत्र

सूत्रों के अनुसार, भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते में ब्रिटेन के प्रस्तावित कार्बन कर पर कोई प्रावधान शामिल नहीं है। लेकिन यदि भविष्य में ऐसा कोई कर लगाया जाता है तो भारत को घरेलू निर्यात पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाने का अधिकार होगा।

दिसंबर 2023 में यूके सरकार ने 2027 से कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को लागू करने का निर्णय लिया।

सूत्रों ने बताया कि भारत ने व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान इस मुद्दे को उठाया था। 24 जुलाई को व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसका उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 56 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना करना है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा समझौते में नहीं है क्योंकि ब्रिटेन ने अभी तक कर को अधिसूचित नहीं किया है।



सूत्रों ने कहा, "लेकिन यदि इसे लागू किया जाता है और यदि यह समझौते के तहत भारत के व्यापारिक लाभों को नकारता है, तो भारत को इसे पुनर्संतुलित करने की स्वतंत्रता होगी। इस बारे में सहमति पत्र पर मौखिक सहमति बन चुकी है।"

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