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Edible Oil: बढ़ती मांग की वजह से भूमिगत खाद्य तेल टैंकों का किया जाएगा निर्माण, भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विचार
Wed, 10 Jul 2024 11:27 PM IST
मिथिलेश नौटियाल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: मिथिलेश नौटियाल
Updated Wed, 10 Jul 2024 11:27 PM IST
सार
देश में खाद्य तेल की खपत जिस तरह से बढ़ रही है। इसे देखते हुए खाद्य तेल का 60 प्रतिशत से अधिक तेल विदेशी बाजारों से आयात करना पड़ता है। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए खाद्य तेल के भंडारण की क्षमता को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
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खाद्य तेल
- फोटो : ANI
विस्तार
देश में खाद्य तेल की खपत जिस तरह से बढ़ रही है, उसको देखते हुए खाद्य तेल का 60 प्रतिशत से अधिक तेल विदेशी बाजारों से आयात करना पड़ता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में खाद्य तेल की सालाना घरेलू खपत लगभग 24-25 मिलियन टन है, जिसमें 9 मिलियन टन पाम तेल की खपत होती है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत सालाना 15-16 मिलियन टन खाद्य तेल का आयात करता है।
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खाद्य तेल के भंडारण की क्षमता को बढ़ाने पर विचार
घरेलू मांग में कमी को पूरा करने के लिए सालाना कम से कम 9-10 मिलियन टन अतिरिक्त खाद्य तेल की आवश्यकता होती है। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए खाद्य तेल के भंडारण की क्षमता को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मुंबई में भूमिगत खाद्य तेल टैंक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए मुंबई पोर्ट ट्रस्ट ने मुंबई मैलेट बंदरगाह में खाद्य तेल भंडारण के लिए ओपन टेंडर मंगवाए हैं। सूत्रों की मानें तो मैलेट बंदरगाह पर 3.60 करोड़ लीटर क्षमता की भंडारण सुविधा स्थापित की जाएगी। इससे पहले भी देश में खाद्य तेल भंडारण किया जाता है। बरसों पुराने कुछ टैंक मुंबई बंदरगाह एवं जेएनपीटी बंदरगाह पर मौजूद हैं। लेकिन अब नए तहर से इसकी तैयारी की जा रही है।
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खाद्य तेल की बढ़ती खपत को देखते हुए लिया गया फैसला
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) महाराष्ट्र प्रदेश के महामंत्री शंकर ठक्कर ने बताया कि खाद्य तेल खपत जिस तरह से बढ़ रही है उसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है। मुंबई पोर्ट ट्रस्ट ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए अगले प्राधिकरण के हिस्से के रूप में, यह सुविधा वर्तमान में मैलेट बंदरगाह पर बड़ी मात्रा में उपलब्ध करा ने जा रहा है। पहले यहां फ्यूल टैंक था, इसे अब बंद कर दिया गया क्योंकि अब इसकी आवश्यकता नहीं रही। अकेले मुंबई की सवा दो करोड़ आबादी की रोजाना करीब 40 लाख लीटर खाद्य तेल की मांग है। इस मांग को पूरा करने की मात्रा केंद्र या मुंबई में नहीं है। साथ ही आने वाले समय में यह मांग बढ़ने की भी संभावना है। स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने यह निर्माण शुरू कर दिया है,यहां पर खाद्य तेल के अलावा दूध और जूस के भंडारण पर भी विचार किया जा रहा है।
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मांग बढ़ने की क्या है वजह ?
तिरुपति ब्रांड के खाद्य तेल बनाने वाली कंपनी एनके प्रोटीन्स के प्रबंध निदेशक प्रियम पटेल कहते हैं कि देश में खाद्य तेल की खपत बढ़ने की बड़ी वजह आबादी के साथ लोगों का बदलता लाइफस्टाइल है। लोग बाहर खाना खाने जाते है दूसरा स्ट्रीट फूड का चलन बढ़ा है, जिसकी वजह से प्रति व्यक्ति भी तेल की खपत बढ़ रही है। दूसरा बायोफ्यूल ईंधन में भी ऑयल की जरूरत होत है। इसलिए इस सेक्टर में भी मांग ने जोर पकड़ा है। इसको पूरा करने के लिए आयात करना पड़ता है।
खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य
प्रियम पटेल कहते हैं खाद्य तेलों का राष्ट्रीय मिशन के तहत देश खाद्य तेल में आत्मनिर्भर होना होना चाहता है। हम सरकार के साथ सरसों, सोयाबीन और पाम की खेती को बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं। वे बताते हैं कि सरसों की खेती बढ़ाने के लिए राजस्थान में काम चल रहा है, वहीं पाम की खेती के लिए नार्थ ईस्ट में ध्यान दिया जा रहा है। खेती को बढ़ाने के लिए उन्नत बीजों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि कंपनी के रूप में हम राइब्रांड और सरसों के ऑयल पर फोकस कर रहे हैं। हम इनकी मांग को पूरा करने के लिए लगातार नए प्रोडक्टस में निवेश करेंगे।
खाद्य तेल उत्पादन का प्रमुख संघटन सॉल्व्हंट एक्स्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के अध्यक्ष अजय झुनझुनवाला ने कहा कि खाद्य तेल में अग्रणी होने की वजह से हमें अपने किसानों को लाभ पहुंचाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के लिए के लिए न्यूनतम विक्रय मूल्य को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा। देश में कुल खाद्य तेल खपत में 38 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा पाम तेल का है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए 2025-26 तक अतरिक्त छह लाख हेक्टेयर तक पाम की खेती का विस्तार करने की जरूरत है। उम्मीद है कि इससे केच्चे पाम तेल का उत्पादन 2025-26 तक 11.2 लाख टन होने का अनुमान है।
सामने आने वाली चुनौतियां
शंकर ठक्कर का कहना है कि खाद्य तेल में आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। लेकिन इसमें कई चुनौतियां हैं जो जमीनी स्तर पर देखने की जरूरत है। वे कहते हैं कि सरसों और मूंगफली की खेती देश में पारंपरिक रूप से होती रही है। इसको अपग्रेड करने की जरूरत है। सरकार पाम की खेती को बढ़ावा दे रही है, लेकिन इसके लिए अनुकूल वातावरण नहीं और इसको रिफाइंड किए बिना इस्तेमाल नहीं करते। दूसरा परंपारगत खेती करने वाले किसानों को आधुनिक खेती के लिए पूरी जानकारी देना जरूरी है। देश में 80 प्रतिशत किसान आज भी पारंपरिक खेती करते हैं। इसके साथ मिट्टी की जांच प्रयोगशालाओं में नहीं होती है। किसान उसी मिट्टी पर दूसरी फसल लगा देता है। मिट्टी की जांच करने के लिए प्रयोगशाला गांवों में नहीं है उसके लिए उन्हें आसपास के शहरों में जाना पड़ता है। सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता को पूरा नहीं किया जा रहा है। प्रियम पटेल कहते हैं सोयाबीन, सरसों, मूंगफली और सुर्यमूखी की खेती के लिए उन्नत बीजों को इस्तेमाल नहीं होता है। इसलिए पैदावार पर असर पड़ता है। इनको समझे बिना हम खाद्य तेल की कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। इसलिए जरूरत है कि आधुनिक खेती के साथ उन्नत बीजों का इस्तेमाल इस क्षेत्र में किया जाए।
खाद्य तेल की हिस्सेदारी
देश के कुल खाद्य तेल में 38 प्रतिशत हिस्सेदारी पाम तेल की है उसके बाद सरसों तेल की 30 प्रतिशत, सोयाबीन तेल की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत, तिल के तेल की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत, सूर्यमुखी तेल की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है।