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18 साल में पहली बार ट्रेड सरप्लस, आयात-निर्यात में लगातार चौथे महीने गिरावट

Thu, 16 Jul 2020 10:32 AM IST
‌डिंपल अलवधी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Thu, 16 Jul 2020 10:32 AM IST
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Imports and Export fall in june but trade surplus for the first time in 18 years in India
आयात-निर्यात - फोटो : pixabay

जून महीने में देश के निर्यात में 12.51 फीसदी गिरावट आयी। यह लगातार चौथा महीना है जब निर्यात घटा है। मुख्य रूप से पेट्रोलियम, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और रत्न एवं आभूषण के निर्यात में गिरावट से कुल निर्यात कम हुआ है। हालांकि आयात में 47.59 फीसदी की गिरावट के कारण 18 साल में पहली बार व्यापार अधिशेष की स्थिति आई है। 

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इतना रहा देश का निर्यात
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कोविड-19 के कारण कमजोर वैश्विक मांग से जून में निर्यात घटकर 21.91 अरब डॉलर रहा। हालांकि जून में निर्यात का आंकड़ा सुधरा है। क्योंकि अप्रैल में इसमें 60.28 फीसदी और मई में 36.47 फीसदी की गिरावट आयी थी। 
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इतना रहा देश का आयात
आंकड़ों के अनुसार आयात भी लगातार चौथे महीने घटा। आलोच्य माह में यह 47.59 फीसदी घटकर 21.11 अरब डॉलर रहा। इसके कारण आलोच्य महीने में 0.79 अरब डॉलर के व्यापार अधिशेष की स्थिति रही। पिछले 18 साल में यह पहला मौका है जब व्यापार अधिशेष की स्थिति उत्पन्न हुई है। 
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इससे पहले, जनवरी 2002 में 10 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष हुआ था। तेल आयात जून महीने में 55.29 फीसदी घटकर 4.93 अरब डॉलर रहा। सोना आयात भी आलोच्य महीने में 77.42 फीसदी घटकर 60.87 करोड़ डॉलर रहा। 

इन क्षेत्रों में हुई नकारात्मक वृद्धि

  • रत्न एवं आभूषण (-50 फीसदी)
  • चमड़ा (-40.5 फीसदी)
  • पेट्रोलियम उत्पाद (-31.65 फीसदी)
  • इंजीनियरिंग सामान (-7.5 फीसदी)
  • सभी प्रकार के कपड़ों सिले-सिलाये परिधान (-34.84 फीसदी)
  • काजू (-27 फीसदी)

आयात खंड में सोना, चांदी, परिवहन उपकरण, कोयला, उर्वरक, मशीनरी और मशीन उपकरण में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि तिलहन, कॉफी, चावल, तंबाकू, मसाला, औषधि और रसायन के निर्यात में जून में वृद्धि दर्ज की गयी। आंकड़ों पर अपनी प्रतिक्रिया में भारतीय तिलहन एवं उपज निर्यात संवर्धन परिषद (आईओपीईपीसी) के चेयरमैन खुशवंत जैन ने कहा कि अच्छा उत्पादन होने और निर्यात बढ़ाने के सरकार के उपायों से तिलहन निर्यात बढ़ा है। 

जैन ने कहा कि, 'आने वाले महीनों में भी वृद्धि बने रहने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय हमारे सभी मसलों का समाधान कर रहा है।' इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जून में वस्तु निर्यात सुधरा है लेकिन आयात लगातार कमजोर बना हुआ है जिससे व्यापार अधिशेष की स्थिति उत्पन्न हुई है। 

आगे इतना रह सकता है वस्तु व्यापार घाटा
उन्होंने कहा, 'आयात में देरी से सुधार को देखते हुए हमारा अनुमान है कि वस्तु व्यापार घाटा 2020-21 की पहली तिमाही में कम होकर 10 से 12 अरब डॉलर रहेगा जो 2019-20 की पहली तिमाही में करीब 46 अरब डॉलर था। हमारा अनुमान है कि चालू खाते के मोर्चे पर 2020-21 की पहली तिमाही में करीब 14 से 16 अरब डॉलर का अधिशेष होगा।' 



चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून के दौरान निर्यात 36.71 फीसदी घटकर 51.32 अरब डॉलर रहा जबकि आयात 52.43 फीसदी घटकर 60.44 अरब डॉलर रहा। इससे वित्त वर्ष के पहले तीन महीने में व्यापार घाटा 9.12 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेल आयात 62.47 फीसदी घटकर 13.08 अरब डॉलर रहा। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 34.85 अरब डॉलर का था। वित्त वर्ष 2019-20 में निर्यात 314.31 अरब डॉलर रहा था।

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