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IMF: एआई के कारण दुनियाभर में 40% नौकरियां जा सकती हैं; आईएमएफ ने दी चेतावनी, अमीर देशों पर है ज्यादा खतरा

Mon, 15 Jan 2024 06:11 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 15 Jan 2024 06:11 PM IST
सार

IMF: वाशिंगटन डीसी स्थित संस्था आईएमएफ ने रविवार को वैश्विक श्रम बाजार पर एआई के संभावित असर का आकलन किया और बताया कि ज्यादातर मामलों में, एआई तकनीक के कारण वैश्विक स्तर पर सामाजिक और आर्थिक असमानता के बढ़ने का खतरा है।

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IMF warns AI to hit almost 40% of jobs worldwide and worsen overall inequality
आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा। - फोटो : Social Media

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उदय से दुनिया भर में लगभग 40% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। आईएमएफ के अनुसार एआई के कारण उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाएं उभरते बाजारों और कम आय वाले देशों की तुलना में अधिक  जोखिम का सामना कर रही हैं।

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आईएमएफ के अनुसार एआई के प्रयोग से असमानता बढ़ने का खतरा

वाशिंगटन डीसी स्थित संस्था आईएमएफ ने रविवार को वैश्विक श्रम बाजार पर एआई के संभावित असर का आकलन किया और बताया कि ज्यादातर मामलों में, एआई तकनीक के कारण वैश्विक स्तर पर सामाजिक और आर्थिक असमानता के बढ़ने का खतरा है। आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने नीति निर्माताओं से इस "परेशान करने वाली प्रवृत्ति" से निपटने और "सामाजिक तनाव को और भड़काने से रोकने के लिए" सक्रिय रूप से कदम उठाने का आग्रह किया।

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एआई विकास को बढ़ावा दे सकता है पर इससे नौकरियां कम हो सकती हैं

जॉर्जीवा ने कहा, "हम एक तकनीकी क्रांति के कगार पर हैं जो उत्पादकता को बढ़ा सकता है, वैश्विक विकास को बढ़ावा दे सकता है और दुनिया भर में आय बढ़ा सकता है। हालांकि इस बात की भी आशंका है कि इससे नौकरियां कम हो सकती हैं और असमानता बढ़ सकती है।"

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उच्च आय वाले देशों में एआई के प्रभाव से 60% नौकरियां जा सकती हैं

आईएमएफ के अनुसार उच्च आय वाले देशों में एआई के बढ़ते चलन से लगभग 60% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, और इनमें से लगभग आधे उत्पादकता को बढ़ावा देने में AI के इस्तेमाल से लाभान्वित भी हो सकते हैं। दूसरी ओर, उभरते बाजारों में एआई के कारण 40% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं और कम आय वाले देशों में 26% नौकरियों पर इसका खतरा पड़ सकता है।


निष्कर्ष बताते हैं कि उभरते बाजारों और कम आय वाले देशों को अल्पावधि में एआई से कम नुकसान उठाना पड़ सकता है। आईएमएफ के अनुसार ऐसे कई देशों में एआई के तत्काल लाभों का उपयोग करने के लिए कुशल श्रमिकों का बुनियादी ढांचा नहीं है, जिससे इस बात का जोखिम बढ़ जाता है कि तकनीक असमानता को बढ़ा सकती है।

एआई के कारण आय और संपत्ति से जुड़ी असमानता बढ़ेगी

आईएमएफ ने यह भी कहा कि एआई दुनिया के विभिन्न देशों में आय और धन से जुड़ी असमानता को भी प्रभावित कर सकता है। यह विभिन्न आय वर्ग के लोगों के ध्रुवीकरण को भी बढ़ावा दे सकता है।आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जो कर्मचारी एआई के लाभों का उपयोग करने में सक्षम हैं, वे अपनी उत्पादकता और वेतन बढ़ा सकते हैं, जबकि जो लोग ऐसा नहीं कर सकते हैं उनके और पीछे जाने का खतरा है।

गोल्डमैन सैक्स ने भी दी थी एआई से 30 करोड़ नौकरियों के प्रभावित होने की चेतावनी

आईएमएफ से पहले गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी थी कि जनरेटिव एआई दुनिया भर में 30 करोड़ नौकरियों को प्रभावित कर सकता है, हालांकि वॉल स्ट्रीट बैंक ने उम्मीद जताई है कि एआई प्रौद्योगिकी श्रम उत्पादकता और विकास को बढ़ावा दे सकती है और सकल घरेलू उत्पाद को 7% तक बढ़ा सकती है।

आईएमएफ की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच में दुनिया भर के कारोबारी और राजनेता एकत्र हुए हैं। डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक इस बार शुक्रवार तक चलेगी, यह "रीबिल्डिंग ट्रस्ट" के विषय पर हो रही है।

श्रीलंका: आईएमएफ टीम ने पहली बार किया जाफना का दौरा 

श्रीलंका के राहत पैकेज की निगरानी कर रहे आईएमएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के एक दल ने मौजूदा 2.9 अरब डॉलर के समझौते के तहत पहली बार तमिल बहुल उत्तरी जिले जाफना का दौरा किया।श्रीलंका के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के वरिष्ठ मिशन प्रमुख पीटर ब्रूर के नेतृत्व में, टीम ने पिछले हफ्ते उत्तरी प्रांत के गवर्नर, पीएमएस चार्ल्स और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात की और प्रांत में आर्थिक विकास, डिमाइनिंग कार्यक्रमों, संघर्ष-विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास और संघर्ष पीड़ितों के लिए मुआवजे से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।

अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने जाफना विश्वविद्यालय से जुड़े शैक्षणिक मामलों, कोविड-19 महामारी के बाद के अभियानों और उत्तरी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों पर भी चर्चा की। सोमवार को कोलंबो लौटे इस दल का वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है।

राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व में आईएमएफ के स्थानीय संचालन का नेतृत्व करने वाले वित्त राज्य मंत्री शेहान सेमासिंघे के साथ बातचीत की होने उम्मीद है। पिछले गुरुवार को राष्ट्रपति विक्रमसिंघे के साथ एक बैठक में, ब्रूर ने अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से सुधारों को लागू करने में श्रीलंका की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया था। गौरतलब है कि भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल नवंबर में जाफना का दौरा किया था, जहां उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक शाखा का उद्घाटन किया था।

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