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Share Market Watch: पश्चिम में जारी तनाव के बीच कैसी रहेगी घरेलू बाजार की चाल? जानें विशेषज्ञों की राय

Sat, 14 Mar 2026 05:49 PM IST
Navita R Asthana Navita R Asthana
Updated Sat, 14 Mar 2026 05:49 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा, महंगे तेल और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

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How will the domestic market fare amid ongoing tensions in the West? Learn what experts say
शेयर बाजार - फोटो : Adobestock

विस्तार

बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को मनोबल लगातार गिरा है। इससे भारतीय शेयर बाजारों में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। इस सप्ताह बाजार में भारी उतरा-चढ़ाव और गिरावट देखने को मिला।

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निफ्टी-50 सप्ताहवार में 5.3% की गिरावट के साथ 23,151 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स सप्ताहवार 5.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,564 पर स्थिर रहा। आगामी सप्ताह में बाजार की दिशा में भारी उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम होंगे। कच्चे तेल की कीमतों के रुझान, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और मुद्रा बाजार की अस्थिरता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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बाजार में गिरावट कोई आश्चर्य की बात नहीं

इनक्रेड वेल्थ के सीईओ नितिन राव ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े भू-राजनीतिक कारकों ने बाजारों को प्रभावित किया है। यह एक अप्रत्याशित घटना थी और उम्मीदों के विपरीत, यह एक लंबा संघर्ष बन गया है,जिसके समाप्त होने के कोई आसार नहीं हैं। इस घटना ने पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है और अब ऊर्जा अवसंरचना भी इससे प्रभावित हो रही है। भारत पहले से ही अपनी आर्थिक विकास दर में मंदी और भारतीय आईटी पर एआई के प्रभाव से जूझ रहा था, और इस संघर्ष ने एक प्रमुख आर्थिक कारक तेल पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। इसलिए बाजार में गिरावट कोई आश्चर्य की बात नहीं है और संघर्ष के परिणाम के आधार पर और गिरावट की संभावना है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधा से जोखिम बढ़ा

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर कहते है, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण सप्ताह के दौरान शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां  हिस्सा, जिस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, उसमें गंभीर व्यवधान उत्पन्न होने से चिंताएं और भी बढ़ गईं हैं। सुरक्षा जोखिमों में वृद्धि और युद्ध के जोखिमों से बीमा प्रीमियम में उछाल के कारण कई शिपिंग ऑपरेटरों ने इस रास्ते से आवाजाही बंद कर दी है। इससे टैंकरों का आनाजाना प्रभावी रूप से बाधित हो रहा है और आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान की आशंका बढ़ गई। इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया और वैश्विक बाजारों में एक नया भू-राजनीतिक जोखिम पैदा कर दिया है।

मैक्रोइकॉनॉमिक पर दबाव 

वे कहते हैं कि पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए बढ़ते संघर्ष ने आपूर्ति में निरंतर व्यवधान, मुद्रास्फीति के दबाव और व्यापक मैक्रोइकॉनॉमिक अस्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत के लिए, ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों ने तत्काल मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव बढ़ा दिया है। इससे रिफाइनर, तेल विपणन कंपनियों, परिवहन, बिजली, सीमेंट और अन्य ऊर्जा-संवेदनशील उद्योगों के लिए इनपुट लागत बढ़ गई है।

घरेलू बाजार में एफआईआई की बिक्री जारी, वैश्विक शेयर बाजारों में तनाव बढ़ा  

कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान कहते हैं, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने मार्च 2026, तक (13 मार्च 2026 तक) एफआईआई निवेशकों ने 46,166.58 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की। आगामी सप्ताह में भी यह संभावना बनी रहेगी। वे कहते हैं, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और आर्थिक राहत के लिए किसी भी तरह के उपाय नहीं होने से वैश्विक शेयर बाजार तनाव में हैं। मैक्रो आर्थिक मोर्चे पर भी नई सीपीआई शृंखला पर आधारित फरवरी की सीपीआई मुद्रास्फीति 3.2 प्रतिशत वार्षिक  (जनवरी: 2.7%) पर लगातार बढ़ती रही। विदेशी निवेश निधि (एफपीआई) प्रवाह में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

घरेलू निवेशकों ने भारी विदेशी बिकवाली का असर कम किया

पोनमुडी आर ने कहा कि सप्ताह के दौरान, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार बिकवाली जारी रखी और 35,052 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो वैश्विक सतर्कता और पूंजी प्रवाह में बदलाव को दर्शाता है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 37,740 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर मजबूत समर्थन प्रदान किया। इससे विदेशी बिकवाली के दबाव का एक बड़ा हिस्सा अवशोषित हो गया। इन मजबूत घरेलू निवेश प्रवाह ने बाजार को सहारा देने और मौजूदा बाहरी चुनौतियों के बीच बाजार की भावना को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

उभरते बाजारों के मुकाबले भारत का मूल्यांकन अभी भी महंगा

राव कहते हैं, उभरते बाजारों के मुकाबले भारत का मूल्यांकन अभी भी महंगा है, लेकिन भारत की दीर्घकालिक विकास गाथा के कारण अपरिवर्तित हैं, हालांकि अब क्षेत्र और अवसर भिन्न हो सकते हैं। अल्पावधि में मिड/स्मॉल कैप शेयरों के बजाए लार्ज कैप शेयरों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हुए, चरणबद्ध निवेश करना बाजारों में निवेश करने का सही तरीका होगा। 

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