अब घर बैठे ऐसे जांच सकते हैं कितना शुद्ध है शहद, मिलावट रोकने को FSSAI ने जारी की अधिसूचना
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एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि हमने हाल में शहद और इसके उत्पादों के लिए मानकों की अधिसूचना जारी की है। इससे मिलावट पर रोक लगेगी। अधिसूचना के मुताबिक शहद के लिए 18 मानक तय किए गए हैं। इनमें सुक्रोज की मात्रा, ग्लूकोज का अनुपात, परागकणों की संख्या, आदि शामिल हैं। शहद के उप-उत्पादों में मोम और रॉयल जेली के लिए मानक तय किए गए हैं। रॉयल जेली मधुमक्खियों के स्राव से बनता है और यह रानी मधुमक्खी तथा लार्वा का भोजन होता है।
शहद के लिए प्रमुख मानक
- सुक्रोज की अधिकतम मात्रा पांच फीसदी
- कार्वियाकलोसा और हनीड्रयू शहद में सुक्रोज की अधिकतम सीमा 10 फीसदी
- नमी की अधिकतम सीमा 20 फीसदी
- परागकणों की संख्या 25,000 प्रति ग्राम
- मोनो फ्लोरल शहद में संबंधित पादप किस्म के परागकणों का अनुपात न्यूनतम 45 फीसदी
- मल्टी फ्लोरल शहद में किसी भी पादप किस्म के परागकणों का अनुपात अधिकतम 45 फीसदी
शहद की परिभाषा हुई तय
शहद की परिभाषा भी तय की गई है। इसके मुताबिक यह मधुमक्खी द्वारा तैयार किया जाने वाला एक प्राकृतिक मीठा पदार्थ है। जिसे वह फूलों और पौधों के रस से इकट्ठा करती है, उसकी प्रकृति में बदलाव करती है और उसे पकने के लिए मधुछत्ते में सुरक्षित रखती है। यदि कोई उत्पाद शहद के नाम से बेचा जाता है, तो किसी भी प्रकार की मिलावट इसमें नहीं होनी चाहिए। इसे इतना गर्म या प्रसंस्कृत नहीं किया जाए कि इसकी संरचना में बदलाव हो जाए और गुण प्रभावित हो जाए।
शहद उत्पादन को सरकार से मिल रहा है बढ़ावा
सरकार मिशन ऑफ इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टीकल्चर (एमआईडीएच) के जरिए शहद उत्पादन को बढ़ावा दे रही है और वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन के विकास के लिए विभिन्न गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड का गठन किया गया है।
पांच लाख को मिला हुआ है रोजगार
देश में शहद संबंधी कारोबार में करीब पांच लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है और करीब 90,000 टन शहद का उत्पादन हर साल होता है।