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Real Estate: आवासीय योजनाओं, नीतिगत दरों और निवेश के बदले रुख से बढ़ी कीमतें, पर घर खरीदना अब भी लोगों की पसंद

Thu, 04 Jul 2024 03:13 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Thu, 04 Jul 2024 03:13 PM IST
सार

Real Estate: देश के सभी शहरों में घरों की कीमतें आसमान छू रही हैं बावजूद इसके उल्लेखनीय रूप से मांग बढ़ी है। जानकार इसकी बड़ी वजह सरकारी नीतियों जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना, जिसके तहत सभी वर्ग को अपना घर मुहैया करवाना है। दूसरा बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी द्वारा होम लोन को किफायती ब्याज दर पर उपलब्ध करवाना एक बड़ी वजह मानते हैं।

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House prices have increased due to housing schemes, policy rates and investment trends
रियल एस्टेट सेक्टर - फोटो : amarujala.com

विस्तार

देश में रियल एस्टेट बाजार में आवासीय क्षेत्र में लगातार तेजी बनी हुई है। देश के सभी शहरों में घरों की कीमतें आसमान छू रही हैं बावजूद इसके उल्लेखनीय रूप से मांग बढ़ी है। दिल्ली-एनसीआर, नवी मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता सहित छोटे शहरों में मकानों की बिक्री में तेजी से बढ़ रही है। जानकार इसकी बड़ी वजह सरकारी नीतियों जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना को मानते हैं, जिसके तहत सभी वर्गों के लोगों को सरकार ने अपना घर मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा है। जानकार बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की ओर से होम लोन को किफायती ब्याज दर पर उपलब्ध करवाने को भी घरों की बिक्री बढ़ने की एक बड़ी वजह मानते हैं।  

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घर खरीदना पहली पसंद
रियल एस्टेट विशेषज्ञ ओम मेहता बताते हैं कि मध्यम वर्ग के लोगों की उच्चस्तरीय जीवनशैली की आकांक्षा के साथ भारत में स्थिर भविष्य के लिए घरों की कीमतें बढ़ती रहेंगी। घर खरीदना सभी के लिए सपना होता है और अब लोग इस सपने को साकार कर रहे हैं।  लोग घर, कार खरीदने के साथ सोने में निवेश और घूमने पर पैसे खर्च कर रहे हैं। देश में रियल एस्टेट बाजार पारंपरिक रूप से आर्थिक विकास के प्रमुख चालकों में से एक रहा है, यह देश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण  योगदान दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में नकदी की कमी, विनियामक सुधार और कोविड महामारी जैसी चुनौतियों के बाद भी इस सेक्टर में मांग लगातार बनी रही। वह इसलिए कि कोविड जैसी महामारी के बाद लोग अपनी संपत्तियों को लेकर सजग हुए हैं। वर्ष 2023 में सबसे अधिक नई परियोजनाओं की घोषणा की गई थी। 2024 की पहली तिमाही ने पिछले वर्ष के लगभग सभी रिकॉर्ड को पार कर लिया। एक रिर्पोट के अनुसार 2024 में आवासीय रियल एस्टेट में बाजार में 280,000 से 290,000 इकाइयों की अनुमाति सीमा के साथ नए लॉन्च हुए।
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सरकारी नीतियों और डिजिटल अपनाने से बढ़ी मांग
रियल एस्टेट के एनालिस्ट प्रफुल्ल कुमार का कहना है कि 2023 में मांग में सुधार हुआ और सरकारी नीतियों और पूरे उद्योग में डिजिटल अपनाने से बिक्री में उछाल आया। सरकारी नीतियों जैसे कि रेरा प्रावधान को लाने से आपको सभी प्रोजेक्ट की जानकारी मिल जाती है। दूसरा प्रधानमंत्री आवास योजना है जिसके तहत कमजोर वर्ग को अपना घर मुहैया करवाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं को पहला घर खरीदने पर ढाई लाख रुपये की सब्सिडी देने जैसी योजना ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। डिजिटल का इस्तेमाल बढ़ने से ऑनलाइन घरों को ढूंढा, खरीदना और वर्चुअल टूर से संपत्ती देखना, खरीदना, बेचा जाना आसान कर दिया है।  
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किफायती ब्याज दरें
सरकारी नीतियों के अलावा बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) द्वारा अपने लोन कारोबार को बढ़ाने के लिए ग्राहकों को किफायती ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं। यह कदम इस क्षेत्र के लिए बहुत मददगार साबित हुआ है। क्योंकि भारतीय घरेलू बचत का 50 प्रतिशत हिस्सा रियल एस्टेट में निवेशक किया जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर की यथास्थिति बनाए रखा है। जिससे आवासीय क्षेत्र में वृद्धि को बढ़ावा मिला है। यह स्थिरता बनी रही तो आवास की मांग आगे बनी रहेगी, जो इनकी कीमतों को बढ़ाने में मदद करेंगी।  

निवेश के रुख में बदलाव
परंपरागत रूप से व्यावसायिक संपत्तियों को उनके बेहतर रिटर्न और न्यूनतम रखरखाव की मांग के कारण निवेश के लिए पसंद किया जाता है। हालांकि पिछले दो सालों से आवासीय संपत्ती से किराया अच्छा मिल जाने से कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है। इसके अलावा एनआरआई विशेष रूप से इसमें निवेश कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019 से 2020 तक एनआरआई ने बाजार में कुल निवेश का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा लिया जो अब 15 प्रतिशत हो गया है और यह 2025 तक 20 प्रतिशत हो जाएगा। इसलिए स्थानीय आवासों के भाव में मजबूती बनी रहेगी।

रियल एस्टेट में संस्थागत निवेश तीन साल के उच्च स्तर पर
कोलियर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इस साल पहली तिमाही में सुस्त शुरुआत के बाद दूसरी तिमाही में रियल एस्टेट में निवेश ने गति पकड़ ली है। दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में संस्थागत निवेश 3 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार दूसरी तिमाही में सबसे अधिक निवेश इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेक्टर में 1.53 बिलियन डॉलर हुआ। कुल निवेश में इसकी हिस्सेदारी 61 फीसदी रही और दूसरी तिमाही में इसमें तिमाही आधार पर 763 और सालाना आधार पर 1043 फीसदी का भारी इजाफा हुआ। इन दोनों सेक्टर के बाद आवासीय सेक्टर में सालाना आधार पर 652 फीसदी वृद्धि के साथ करीब 0.54 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ। आफिस सेक्टर में निवेश में सालाना आधार पर 83 और तिमाही आधार पर 41 फीसदी गिरावट दर्ज की गई


कोलियर्स इंडिया में कैपिटल मार्केट और इंवेस्टमेंट सर्विसिस के प्रबंध निदेशक पीयूष गुप्ता कहा कि भारतीय रियल एस्टेट में निजी इक्विटी निवेश ने 2024 की पहली छमाही में 3.5 बिलियन डॉलर का निवेश मजबूत बाजार को दर्शाता है। इस साल की पहली छमाही में कुल निवेश में विदेशी निवेश की 73 फीसदी हिस्सेदारी से पूरे वर्ष के लिए सकारात्मक सेंटीमेंट रहने की उम्मीद है। भारत में एफडीआई और घरेलू पूंजी में निरंतर वृद्धि रियल एस्टेट में बुनियादी ढांचे, निर्माण और सकारात्मक दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

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