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Women's Day Special: आधी आबादी अब नहीं पीछे, पर्सनल लोन लेने वाली महिलाओं की संख्या 22 फीसदी बढ़ी

Tue, 04 Mar 2025 02:46 PM IST
द बोनस द बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
द बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: द बोनस Updated Tue, 04 Mar 2025 02:46 PM IST
सार

रिपोर्ट कहती है कि 2024 में व्यवसायों के वित्तपोषण के लिए महिलाओं ने सिर्फ तीन फीसद कर्ज लिया, जबकि पर्सनल लोन, उपभोक्ता टिकाऊ ऋण, होम लोन जैसे व्यक्तिगत वित्त उत्पादों के लिए 42 फीसद और 38 फीसद गोल्ड लोन लिए गए।

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Half the population is no longer left behind, the number of women taking personal loans increased by 22 pc
Women's Day Special - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

भारत में कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में 22 फीसद की सालाना दर से बढ़ी है, जिनमें से अधिकांश कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बीवीआर सुब्रमण्यम ने ‘भारत में वित्तीय वृद्धि की कहानी में महिलाओं की भूमिका’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के ऋण का बड़ा हिस्सा उपभोग की मांग को पूरा करने के लिए था और तुलनात्मक रूप से व्यवसायों के लिए कम कर्ज लिया गया।

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ट्रांसयूनियन सिबिल, नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच और माइक्रोसेव कंसल्टिंग द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 'भारत में ऋण लेने वाली महिलाओं की संख्या वर्ष 2019 और 2024 के बीच 22 फीसद की चक्रवृद्धि दर से बढ़ी है। जहां उपभोग ऋण महिला उधारकर्ताओं द्वारा लिया जाने वाला पसंदीदा उत्पाद बना हुआ है। वहीं, अब अधिक महिलाएं कारोबारी कर्ज भी ले रही हैं।'
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रिपोर्ट कहती है कि 2024 में व्यवसायों के वित्तपोषण के लिए महिलाओं ने सिर्फ तीन फीसद कर्ज लिया, जबकि पर्सनल लोन, उपभोक्ता टिकाऊ ऋण, होम लोन जैसे व्यक्तिगत वित्त उत्पादों के लिए 42 फीसद और 38 फीसद गोल्ड लोन लिए गए।
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रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 से कारोबार के इरादे से खोले गए ऋण खातों की संख्या में 4.6 गुना वृद्धि हुई है, लेकिन ये ऋण 2024 में महिलाओं द्वारा लिए गए कुल ऋणों का सिर्फ तीन फीसद हैं।

वित्तीय रूप से जागरूक बन रही हैं महिलाएं
सरकारी शोध संस्थान नीति आयोग ने बयान में कहा कि भारत में अधिक महिलाएं ऋण लेना चाह रही हैं और सक्रिय रूप से अपने क्रेडिट स्कोर की निगरानी भी कर रही हैं। दिसंबर, 2024 तक करीब 2.7 करोड़ महिलाएं अपने कर्ज पर नजर रखे हुए थीं, जो उनकी बढ़ती वित्तीय जागरूकता को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला उधारकर्ताओं में से 60 फीसद कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से थीं।


और प्रसास करने की जरूरत
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि समान वित्तीय पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। महिलाओं की जरूरतों के अनुरूप समावेशी उत्पादों को डिजाइन करने में वित्तीय संस्थानों की भूमिका, साथ ही संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने वाली नीतिगत पहल, इस गति को बढ़ाने में सहायक होगी।

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