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GTRI की रिपोर्ट में दावा: अमेरिका पर चीन की सख्ती सुनहरा मौका, भारतीय ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए खुले दरवाजे

Mon, 14 Apr 2025 01:18 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 14 Apr 2025 01:18 AM IST
सार

एक शोध संस्थान की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका पर चीन की सख्ती के कारण भारतीय ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए अवसरों के दरवाजे खुले हैं। जीटीआरआई की इस रिपोर्ट के मुताबिक हस्तशिल्प, फैशन और घरेलू उत्पादों के बाजार में चीन उतना दखल नहीं रखता। भारत इसका लाभ उठा सकता है।

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GTRI report China strict against US Tarrif golden opportunity doors open for Indian e-commerce sellers
चीन की सख्ती भारतीय ई कॉमर्स के लिए सुनहरे अवसर के संकेत (प्रतीकात्मक) - फोटो : एएनआई

विस्तार

चीन से कम मूल्य वाले ई-कॉमर्स आयात पर अमेरिकी सख्ती बरतने से भारतीय ऑनलाइन निर्यातकों के लिए बड़े अवसर खुल गए हैं। शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने रविवार को यह बात कही। संस्थान ने कहा कि एक लाख से अधिक ई-कॉमर्स विक्रेताओं और पांच अरब डॉलर के मौजूदा निर्यात के साथ भारत, विशेष रूप से हस्तशिल्प, फैशन और घरेलू सामान जैसे छोटे उत्पादों के क्षेत्र में चीन की अनुपस्थिति को भरने की अच्छी स्थिति में है।

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चीनी आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान, अन्य देशों के लिए द्वार खुलने की उम्मीद
संस्थान ने यह भी कहा कि अगर लालफीताशाही कम हो जाए और सरकार समय पर समर्थन प्रदान करे तो भारतीय ई-कॉमर्स विक्रेता इस कमी को पूरा कर सकते हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका में दो मई से 800 डॉलर से कम कीमत वाले चीनी और हांगकांग ई-कॉमर्स निर्यात पर 120 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क लगेगा, जिससे उनका शुल्क-मुक्त प्रवेश समाप्त हो जाएगा। इस कदम से चीनी आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान उत्पन्न होने और अन्य देशों के लिए द्वार खुलने की उम्मीद है।
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आरबीआई के नियम: 25 प्रतिशत का अंतर रखने की अनुमति
चीनी फर्म शीन और टेमू इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हैं। श्रीवास्तव ने कहा, भारत की मौजूदा व्यापार प्रणाली अभी भी बड़े, पारंपरिक निर्यातकों के लिए है, न कि छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए। उन्होंने कहा, इन ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए लालफीताशाही बाधा है। अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय बैंक ई-कॉमर्स निर्यात की उच्च मात्रा और छोटे मूल्य की प्रकृति को संभालने के लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई के नियम घोषित आयात मूल्य और अंतिम भुगतान के बीच केवल 25 प्रतिशत का अंतर रखने की अनुमति देते हैं, जो ऑनलाइन निर्यात के लिए बहुत कड़ा है। इस सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करना और बैंकों को वैध मामलों में मंजूरी देना मददगार होगा।

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कम मूल्य वाले निर्यातकों के लिए बैंक शुल्क भी है समस्या
रिपोर्ट में आगे बैंक शुल्क जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है, जो कम मूल्य वाले निर्यातकों के लिए समस्याएं पैदा करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक शुल्क भी एक समस्या है। प्रत्येक छोटे शिपमेंट को समेटने में 1,500-2,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। कम मूल्य वाले निर्यात के लिए इन शुल्कों को माफ किया जाना चाहिए और प्रक्रियाओं को पूरी तरह से डिजिटल होना चाहिए। आरबीआई को निर्यातकों के लिए समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए सख्त सेवा समयसीमा और शिकायत तंत्र भी निर्धारित करना चाहिए।

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