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GST Relief: जीएसटी पर राहत देने की तैयारी में केंद्र सरकार, सूत्रों का दावा- खत्म हो सकता है 12% का स्लैब

Wed, 02 Jul 2025 03:33 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 02 Jul 2025 03:33 PM IST
सार

इस साल की शुरुआत में आयकर में कई रियायतें देने के बाद, केंद्र अब मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) में कटौती के रूप में बड़ी राहत देने की तैयारी कर रहा है। इस बारे में सूत्रों के हवाले से कुछ अहम जानकारी सामने आई है। आइए जानते हैं।

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GST Relief for Middle Class: Expect Cheaper Essentials like Toothpaste, Clothes, and Shoes Soon
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : stock.adobe

विस्तार

इस साल की शुरुआत में आयकर में कई रियायतें देने के बाद, केंद्र अब मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) में कटौती के रूप में बड़ी राहत देने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है। जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब को पूरी तरह से खत्म करने और वर्तमान में 12 प्रतिशत कर वाली कई वस्तुओं को निचले 5 प्रतिशत स्लैब में शामिल करने पर विचार कर रहा है। 

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सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव के तहत मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की ओर से व्यापक तौर पर उपयोग की जाने वाली वस्तुएं शामिल होंगी। इनमें टूथपेस्ट और टूथ पाउडर, छाते, सिलाई मशीन, प्रेशर कुकर और रसोई के बर्तन, इलेक्ट्रिक इस्त्री, गीजर, छोटी क्षमता वाली वाशिंग मशीन, साइकिल, 1,000 रुपये से अधिक कीमत वाले रेडीमेड वस्त्र, 500 से 1,000 रुपये के बीच कीमत वाले जूते, स्टेशनरी आइटम, टीके, सिरेमिक टाइलें और कृषि उपकरण शामिल होंगे। 
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एक जुलाई, 2017 से लागू जीएसटी के तहत 17 करों और 13 उपकरों को एकीकृत किया गया है। कर प्रणालियों को डिजिटल बनाकर एक निर्बाध राष्ट्रीय बाजार का निर्माण हुआ है। जीएसटी के परिचालन के पहले वर्ष (नौ महीने) में सकल जीएसटी संग्रह 7.40 लाख करोड़ रुपये था। पिछले कुछ वर्षों में इसमें तेजी से वृद्धि देखी गई है।
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2024-25 में सकल जीएसटी संग्रह रिकॉर्ड 22.08 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो साल-दर-साल 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि वार्षिक जीएसटी राजस्व लगभग तीन गुना बढ़ गया है, जो वित्त वर्ष 2017-18 में 7 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 22 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। 

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