फरवरी में गिर गया GST कलेक्शन, केवल 69 फीसदी लोगों ने फाइल किया रिटर्न
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इस साल की शुरुआत से लेकर अभी तक लगाातार दूसरी बार जीएसटी से होने वाली कमाई में गिरावट देखने को मिली। फरवरी महीने में केवल 69 फीसदी लोगों ने जीएसटी रिटर्न फाइल किया है, जिसकी वजह से टैक्स कलेक्शन में कमी देखने को मिली है।
इतना हुआ कलेक्शन
सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी महीने में केवल 85174 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है। हालांकि अभी 5 दिन बचे हैं, ऐसे में टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। 25 मार्च तक केवल 59.51 लाख जीएसटी रिटर्न फाइल हुए हैं। वहीं इसके मुकाबले जनवरी में जीएसटी से करीब 86318 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था। नवंबर और दिसंबर में यह 83716 करोड़ रुपये व 88929 करोड़ रुपये था।
The total collection of CGST and SGST for the month of March 2018 (upto 26th March) is Rs. 27,085 crores and Rs. 33,880 crores respectively. #GST
— ANI (@ANI) March 27, 2018
केंद्र सरकार ने जीएसटी रिर्टन के फॉर्म 3बी अब काफी सरल कर दिया है। जीएसटी नेटवर्क ने फॉर्म 3बी में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसके बाद कारोबारियों को रिटर्न भरने में बहुत आसानी हो जाएगी।
टैक्स का पेमेंट होगा आसान
पहले कारोबारियों को अपनी टैक्स की देनदारी का पता करने के लिए रिटर्न को सबमिट करना पड़ता था, जिसके बाद किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता था। लेकि अब टैक्स देनदारी का पता रिटर्न सबमिट करने से पहले ही पता चल जाएगा।
चालान का होगा ऑटो जेनरेशन
अब नए फॉर्म में टैक्स पेमेंट करने का चालान ऑटो जेनरेट होगा। यह इनपुट टैक्स क्रेडिट के अलावा होगा। इसके अलावा टैक्सपेयर के पास क्रेडिट राशि को एडिट करने का ऑप्शन भी होगा। Adeaquare के सीईओ पवन पीचारा ने कहा कि नए रिटर्न फॉर्म के लागू होने से कारोबारियों के लिए रिटर्न भरना काफी आसान हो जाएगा। अब यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमेटिक हो जाएगी, जिससे कारोबारियों का रिटर्न फाइल करने के प्रोसेस में काफी समय बचेगा।
कारोबारियों को भरना होगा 3 रिटर्न फॉर्म
जीएसटी काउंसिल की बैठक में कारोबारियों को 3 रिटर्न फॉर्म भरने से आजादी देने की बात हो रही थी, लेकिन इस पर भी किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई है। कारोबारियों को सिंगल रिटर्न फॉर्म के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।
ई-वे बिल के नियमों में किया बदलाव
केंद्र सरकार ने ई-वे बिल के नियमों में बदलाव किया है। सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से ई-कॉमर्स कंपनियों को वस्तुओं के सुचारू परिवहन में मदद मिलेगी और वस्तुओं के मूल्य की गणना करने का तरीका सरल होगा।
सरकार ने ई-वे बिल के नियमों में बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें वस्तुओं को लाने ले जाने के लिए जॉब वर्कर्स को भी इलेक्ट्रॉनिक रसीद निकालने की अनुमति दी गई है। 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के माल को एक राज्य से दूसरे राज्य लाने ले जाने के लिए 15 अप्रैल से इलेक्ट्रॉनिक वे या ई-वे बिल की जरूरत होगी। काउंसिल ने 1 जुलाई तक रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म को टालने का फैसला लिया है।