{"_id":"5bdab77ebdec2269bc7febc3","slug":"gst-collection-crosses-1-lakh-crore-mark-for-the-second-time-after-april","type":"story","status":"publish","title_hn":"अप्रैल के बाद दूसरी बार 1 लाख करोड़ के पार पहुंचा जीएसटी कलेक्शन","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी ","slug":"business-diary"}}
अप्रैल के बाद दूसरी बार 1 लाख करोड़ के पार पहुंचा जीएसटी कलेक्शन
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 01 Nov 2018 01:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सितंबर महीने में वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) से सरकार को एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हुई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट करके खुद इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कलेक्शन सरकार की उम्मीदों के अनुसार है।
विज्ञापन
वहीं सितंबर में कमाई 94442 करोड़ रुपये रही। अप्रैल के बाद जीएसटी का यह कलेक्शन एक बार फिर से एक लाख करोड़ के पार चला गया है। वहीं मई से लेकर अगस्त तक जीएसटी कलेक्शन 90 हजार करोड़ के पार ही रहा।
विज्ञापन
GST collections for October 2018 have crossed Rs. 1 lakh crore. The success of GST is lower rates, lesser evasion, higher compliance, only one tax and negligible interference by taxation authorities.
— Arun Jaitley (@arunjaitley) November 1, 2018
विज्ञापन
जेटली ने कहा कि इस कलेक्शन के पीछे बहुत बड़ी वजह है। उन्होंने अपने ट्विट में कहा है कि टैक्स दरों में कमी, टैक्स चोरी पर लगाम लगाने से यह सफलता मिली है।अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 93,690 करोड़ रुपये रहा था।
सरकार को मिली दो अच्छी खबरें
इस हफ्ते सरकार को अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दो अच्छी खबरें मिली हैं। पहली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में लंबी छलांग और अब जीएसटी कलेक्शन का बढ़ना। विश्व बैंक द्वारा बुधवार को जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत की रैंकिंग में पिछले दो साल 50 से ज्यादा स्थानों का सुधार हुआ है। इसी के साथ वह विश्व बैंक के शीर्ष सुधारकों के रूप में उभरा है।
वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के समय भारत की रैंकिंग 142 थी। पीएम ने आने वाले वर्षों में भारत को शीर्ष 50 देशों की खास सूची में शामिल करने का लक्ष्य रखा है।
वर्ल्ड बैंक के डेवलपमेंट इकनॉमिक्स के वरिष्ठ निदेशक और मुख्य कार्यवाहक अर्थशास्त्री शांता देवराजन ने कहा कि इस रैंकिंग में भारत को शीर्ष 50 में लाना सरकार के लिए कड़ी चुनौती है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक और अन्य सुधारों के कारण आने वाले वर्षों में भारत अपनी रैंकिंग में सुधार कर सकता है।