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जीडीपी में ग्रोथ: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से ही निकलेगी बेरोजगारी की समस्या की काट, व्हाइट कॉलर जॉब्स में होगी बढ़ोतरी

Wed, 01 Sep 2021 02:40 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 01 Sep 2021 02:40 PM IST
सार

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में यह उछाल पिछले साल की 24.4 फीसदी की नकारात्मक वृद्धि से तुलना करने के कारण दिख रही है। असलियत में अर्थव्यवस्था अभी भी दबाव में है। इसके सुधार के लिए सबसे निचले स्तर के विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए...

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Growth in GDP: manufacturing sector will create employment, white collar jobs will increase
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में 21.4 फीसदी से ज्यादा वृद्धि होने का अनुमान लगाया था। सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि रिजर्व बैंक का अनुमान लगभग सटीक साबित हुआ है और देश ने वर्तमान वित्त वर्ष में 20.1 फीसदी की बढ़ोतरी हासिल की है और भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़कर 30.1 लाख करोड़ रुपये की हो गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार की यह खबर बेरोजगारी के मोर्चे पर भी बड़ी मददगार साबित होगी। इससे संगठित क्षेत्र के व्हाइट कॉलर जॉब्स में अच्छी बढ़ोतरी होगी तो असंगठित क्षेत्र के अवसरों में सुधार आएगा।

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जीडीपी में हुई बढ़ोतरी के बाद भी विपक्ष सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार चंद उद्योगपतियों के विकास के सहारे अर्थव्यवस्था की बेहतर छवि दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि देश के करो़ड़ों निचले स्तर के कामगारों की स्थिति अभी भी बदतर बनी हुई है। भारी संख्या में लोगों की बेरोजगारी के कारण बाजार में मांग में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। बाजार में ग्राहकों की कमी बताती है कि अर्थव्यवस्था अभी भी अपेक्षित सुधार की राह पर नहीं है।
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पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में यह उछाल पिछले साल की 24.4 फीसदी की नकारात्मक वृद्धि से तुलना करने के कारण दिख रही है। असलियत में अर्थव्यवस्था अभी भी दबाव में है। इसके सुधार के लिए सबसे निचले स्तर के विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। निचले स्तर पर पूंजी प्रवाह बढ़ाकर और ज्यादा से ज्यादा लोगों के हाथ में पैसा पहुंचाकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है।

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सबसे ज्यादा प्रभावितों पर फोकस

आर्थिक विशेषज्ञ और भाजपा नेता गोपालकृष्ण अग्रवाल ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा नकारात्मक असर बाजार के निचले तबके को हुआ है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि सरकार ने इसी वर्ग को सबसे ज्यादा आर्थिक मजबूती देने के कदम उठाए हैं।

रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को माइक्रो लोन, छोटे व्यापारियों को 50 हजार रुपये तक का कर्ज, स्टार्टअप्स को विभिन्न स्तरों पर टैक्स छूट, सस्ता और आसान पूंजी कर्ज और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद के जरिए सबसे निचले तबके को ही ताकत देने का काम किया गया है। सरकार के इन्हीं प्रयासों का परिणाम सकल घरेलू उत्पाद में दिखाई पड़ रहा है।

देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी के बढ़ते स्तर को संभालने की है। भाजपा नेता का दावा है कि बेरोजगारी का मुकाबला जीडीपी ग्रोथ के जरिए ही संभाला जा सकता है। आज जब भारत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दूसरे नंबर पर आ गया है तो यह सीधे रोजगार के अवसरों में तब्दील होगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। सरकार स्टार्टअप्स के जरिए अवसर देकर और छोटे-छोटे व्यापार के लिए लोगों को प्रेरित कर भारी संख्या में रोजगार उपलब्ध करा रही है।

निचले स्तर तक पहुंचता है लाभ

आर्थिक मामलों के जानकार और भाजपा प्रवक्ता राजीव जेटली ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अर्थव्यवस्था का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है। यह अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में विकास की कहानी कहता है। भारत की अर्थव्यवस्था के मामले में इस बार यह विशेष बात हुई है कि हमारा निर्यात-आयात की तुलना में लगातार ज्यादा तेजी के साथ सुधर रहा है। यह वृद्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों, ऑटोमोबाइल, कृषि-दुग्ध उत्पाद और टेलीकॉम क्षेत्र में बेहतर वृद्धि के कारण हुआ है।

राजीव जेटली के अनुसार जीडीपी में वृद्धि में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के कारण आई है, जहां करोड़ों की संख्या में श्रमिक कार्य करते हैं। इन श्रमिकों को वेतन के रूप में बेहतर लाभ मिलेगा और यह पैसा बाजार के सबसे निम्नतम स्तर तक जाएगा। इससे उस क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा जो कोरोना काल में कामकाज ठप होने के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।

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