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Growth: एडीबी ने 2022-23 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान में नहीं किया परिवर्तन, 7% पर अपरिवर्तित रखा

Wed, 14 Dec 2022 12:07 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Wed, 14 Dec 2022 12:07 PM IST
सार

Growth: एडीबी ने 2022-23 (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि सात फीसदी रहने का जो अनुमान जताया है, सितंबर महीने में भी एडीबी की ओर से सात फीसदी वृद्धि का ही अनुमान जताया गया था। इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

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Growth: ADB did not change India's economic growth forecast for 2022-23, kept unchanged at 7%
एडीबी - फोटो : twitter

विस्तार

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने 2022-23 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को सात फीसदी पर अपरिवतर्तित रखा है। हालांकि उनकी ओर से बताया गया है कि इस दौरान एशिया की वृद्धि की रफ्तार पहले के मुकाबले कुछ हद तक कमजोर पड़ सकती है। 

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एडीबी ने 2022-23 (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि सात फीसदी रहने का जो अनुमान जताया है, सितंबर महीने में भी एडीबी की ओर से सात फीसदी वृद्धि का ही अनुमान जताया गया था। इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। हालांकि 2021-22 में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 8.7 फीसदी रही थी।
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उसने वित्त वर्ष 2023-2024 के लिए भी जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 7.2 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा है। एडीबी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस वर्ष एशिया 4.2 फीसदी की दर से बढ़ेगा, 2023 में उसकी वृद्धि 4.6 फीसदी की दर से होने का अनुमान है। हालांकि पहले उसने इस वर्ष एशिया की वृद्धि दर 4.3 फीसदी और 2023 में 4.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
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रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के 7 फीसदी की दर से वृद्धि करने का अनुमान है जिसकी वजह उसकी मजबूत घरेलू बुनियाद है।’’ इसमें आगे कहा गया, ‘‘उच्च आवृत्ति वाले कुछ हालिया संकेतक अनुमान से कहीं अधिक अनुकूल हैं मसलन उपभोक्ताओं का विश्वास, बिजली आपूर्ति, पीएमआई जबकि कुछ ऐसे संकेतक हैं जो पूरी तरह से अनुकूल नहीं हैं वे हैं निर्यात विशेषकर कपड़ा और लौह अयस्क का तथा उपभोक्ता उत्पादों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक।’’


इसमें कहा गया कि 2023-24 के लिए 7.2 फीसदी के वृद्धि के अनुमान को बरकरार रखने की वजह संरचनात्मक सुधार और निजी निवेश को उत्प्रेरित करने वाले सार्वजनिक निवेश के सकारात्मक प्रभाव हैं।’’ एडीबी ने कहा, ‘‘भारत में दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) के बीच अर्थव्यवस्था 6.3 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो सार्वजनिक खपत में 4.4 फीसदी का संकुचन दर्शाता है। जबकि वैश्विक स्तर पर नरमी के बावजूद निर्यात 11.5 फीसदी की दर से बढ़ा।’’

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