RBI FSR Report: आरबीआई की रिपोर्ट में दावा, फंसे कर्ज का बोझ सात साल में सबसे कम, चालू खाता घाटा दोगुना
RBI FSR Report: केंद्रीय बैंक के अनुसार इससे बैंकिंग प्रणाली मजबूत तथा अच्छी तरह से पूंजीकृत बनी हुई है। वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) के 26वें अंक में रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है और मंदी का खतरा मंडरा रहा है।
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बैंकों का सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) यानी फंसा कर्ज घटकर सात साल के निचले स्तर पांच फीसदी पर आ गया है। हालांकि, चालू खाते का घाटा (कैड) चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर यानी दूसरी तिमाही में दोगुना बढ़कर 36.4 अरब डॉलर पहुंच गया। यह जीडीपी का 4.4 फीसदी है। पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में यह 18.2 अरब डॉलर या 2.2 फीसदी रहा था।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा, बैंकिंग व्यवस्था मजबूत है। पर्याप्त पूंजी है। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के जोखिम के साथ विपरीत हालात का सामना कर रही है। इसके बावजूद मजबूत आर्थिक बुनियाद और स्वस्थ वित्तीय एवं गैर-वित्तीय क्षेत्र के बेहतर बहीखाते से वित्तीय प्रणाली अच्छी स्थिति में है।
- पांच फीसदी के स्तर पर आ गया एनपीए
- 36.4 अरब डॉलर या जीडीपी का 4.4 फीसदी पहुंच गया दूसरी तिमाही में
विदेशी निवेश गिरा
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) घटकर 20 अरब डॉलर रह गया। 2021-22 की समान अवधि में यह 20.3 अरब डॉलर था।
कैड : व्यापार घाटा बढ़ने का दिखा नतीजा
व्यापार घाटा बढ़ने के कारण देश के चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी दर्ज हुई।
- 2021-22 की दूसरी तिमाही में कैड 9.7 अरब डॉलर या 1.3 फीसदी रहा था। आरबीआई ने कहा कि 2022-23 की पहली छमाही में कैड जीडीपी का 3.3 फीसदी रहा।
- 2021-22 की पहली छमाही में यह 0.2 फीसदी था। इससे पहले कैड 2013-14 की पहली तिमाही में जीडीपी के 4.7 फीसदी के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
- वस्तुओं का व्यापार घाटा 2022-23 की पहली तिमाही के 63 अरब डॉलर से बढ़कर दूसरी तिमाही में 83.5 अरब डॉलर पहुंच गया।
कीमतें बढ़ीं, पर दबाव कम
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कीमतें बढ़ी हुई हैं। लेकिन, रेपो दर बढ़ाने जैसी मौद्रिक कार्रवाइयों व आपूर्ति में सुधार से महंगाई का दबाव कम हो रहा है।
क्रिप्टो : जोखिम दूर करना जरूरी
आरबीआई ने कहा, वित्तीय जोखिम दूर करने और निवेशकों की सुरक्षा के लिहाज से क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक सामान्य दृष्टिकोण पर पहुंचना महत्वपूर्ण है। इसके लिए वैश्विक स्तर पर विभिन्न विकल्पों पर विचार हो रहा है।
अर्थव्यवस्था की लचीली तस्वीर
मौद्रिक सख्ती के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल हैं। इसके बावजूद अर्थव्यवस्था ने लचीली तस्वीर पेश की है। -शक्तिकांत दास, आरबीआई गवर्नर
राज्यों की बढ़ती सब्सिडी चिंताजनक
केंद्रीय बैंक ने कहा, नॉन-मेरिट सब्सिडी से राज्यों को पूंजीगत खर्च के मोर्चे पर मुश्किलें हो सकती हैं। 2019-20 में सब्सिडी पर राज्यों का खर्च 2020-21 व 2021-22 में क्रमशः 12.9% एवं 11.2% बढ़ गया। इससे कुल राजस्व खर्च में सब्सिडी 2019-20 के 7.8% से 2021-22 में 8.2% हो गई है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार इससे बैंकिंग प्रणाली मजबूत तथा अच्छी तरह से पूंजीकृत बनी हुई है। वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) के 26वें अंक में रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है और मंदी का खतरा मंडरा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक के बाद एक आई कई चुनौतियों के कारण आर्थिक महौल बिगड़ा है और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, "भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है। फिर भी, मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल्स और स्वस्थ वित्तीय और गैर-वित्तीय क्षेत्र के बैलेंस शीट अर्थव्यवस्था को ताकत और लचीलापन प्रदान कर रहे हैं।" रिपोर्ट के अनुसार इससे वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बढ़ रही है।
रिपोर्ट की प्रस्तावना में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल के बावजूद वैश्विक जोखिमों की क्षमता को समझता है। उन्होंने कहा, 'रिजर्व बैंक और अन्य वित्तीय नियामक भारतीय अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हित में उचित हस्तक्षेप के माध्यम से हमारी वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और सुदृढ़ता सुनिश्चित करने के लिए सतर्क और तैयार हैं। मुद्रास्फीति के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि कीमतें ऊंची हैं, लेकिन मौद्रिक नीति की कार्रवाई और आपूर्ति पक्ष के हस्तक्षेप से दबाव कम हो रहा है।