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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   GPF: Interest rate on GPF of government employees stuck at the same point for four years remains 7.1 percent

GPF: चार साल से एक ही पॉइंट पर अटकी सरकारी कर्मियों के जीपीएफ की ब्याज दर, लगातार 16वीं तिमाही में 7.1 फीसदी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 06 Oct 2023 02:49 PM IST
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सार
GPF Intrest rate: वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने चार अक्तूबर को 'अक्तूबर-दिसंबर' तिमाही के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड और मिलते जुलते प्रोविडेंट फंड के लिए ब्याज दरें घोषित की हैं। सरकारी कर्मियों को इस बार जनरल प्रोविडेंट फंड की दरों में बदलाव होने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्रालय ने ब्याज की दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है...
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GPF: Interest rate on GPF of government employees stuck at the same point for four years remains 7.1 percent
GPF Intrest Rate - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

केंद्र सरकार ने 2023 की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही के लिए सामान्य भविष्य निधि 'जीपीएफ' की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले चार वर्षों से ब्याज दरें एक ही पॉइंट पर अटकी हैं। यह लगातार 16वीं तिमाही है, जब जीपीएफ की ब्याज दर 7.1 फीसदी पर रहेगी। इससे पहले जुलाई-सितंबर 2023-24 की तिमाही में भी जीपीएफ की ब्याज दर 7.1 फीसदी रही थी।

कर्मियों को ब्याज दरों में बदलाव होने की उम्मीद थी

वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने चार अक्तूबर को 'अक्तूबर-दिसंबर' तिमाही के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड और मिलते जुलते प्रोविडेंट फंड के लिए ब्याज दरें घोषित की हैं। सरकारी कर्मियों को इस बार जनरल प्रोविडेंट फंड की दरों में बदलाव होने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्रालय ने ब्याज की दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। लंबे समय से ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है।

कोरोना के दौरान भी नहीं बढ़ाई गई दरें

वर्ष 2021-22 के दौरान सामान्य भविष्य निधि तथा उसी प्रकार की अन्य निधियों के अभिदाताओं की कुल जमा रकमों पर दी जाने वाली ब्याज दर एक जुलाई 2021 से लेकर सितंबर 2021 तक 7.1 फीसदी रखी गई थी। आर्थिक कार्य विभाग के 19 अप्रैल 2021 को जारी संकल्प में भी सामान्य भविष्य निधि की राशि पर ब्याज दर 7.1 फीसदी तय की गई थी। उस वक्त देश में कोरोना की दूसरी लहर ने अपना कहर बरपा रखा था। तब केंद्रीय कर्मियों का महंगाई भत्ता भी 18 माह से रोका गया था। इसी वजह से कर्मियों को यह उम्मीद थी कि सरकार 'जीपीएफ' की राशि पर मिलने वाले ब्याज की दरों में बढ़ोतरी करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका।

इन विभागों में लागू होती हैं दरें

ये दरें सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएं), अंशदायी भविष्य निधि (भारत), अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि, राज्य रेलवे भविष्य निधि (रक्षा सेवाएं), भारतीय आयुद्ध विभाग भविष्य निधि, भारतीय आयुद्ध कारखाना कामगार भविष्य निधि, भारतीय नौसेना गोदी कामगार भविष्य निधि, रक्षा सेवा अधिकारी भविष्य निधि और सशस्त्र सेना कार्मिक भविष्य निधि पर लागू होती हैं। जीपीएफ में जमा कर्मियों की राशि पर बैंकों के मुकाबले ब्याज अधिक मिलता है, इसलिए बहुत से कर्मचारी अपना शेयर बढ़ा देते हैं। जीपीएफ में ज्यादा वेतन इसलिए कटवाया जाता था, ताकि कर्मचारी अपनी बड़ी जरूरत के समय इसका इस्तेमाल कर सकें।

अब वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय

कर्मचारी अपने जीपीएफ में से 90 फीसदी राशि निकाल सकते हैं। हालांकि इस लेकर नियम-शर्तें बदलती रहती हैं। बच्चों की शिक्षा, शादी, घर बनाना या उसके लिए प्लाट खरीदना, फ्लैट लेना है, पुश्तैनी मकान की रिपेयर करानी है और घर का लोन चुकाना है, जैसे कामों में जीपीएफ राशि काम आ जाती है। पिछले साल केंद्र सरकार ने एक वित्त वर्ष में जनरल प्रोविडेंट फंड में वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय कर दी थी। नए प्रावधान के अनुसार, एक वित्त वर्ष में जीपीएफ खाते में जमा की गई कुल राशि पांच लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती है।

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