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RBI Report: निवेश चक्र की निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार का जोर बुनियादी ढांचे के विकास पर, रिपोर्ट में दावा

Thu, 11 Apr 2024 06:18 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 11 Apr 2024 06:18 PM IST
सार

RBI Report: आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार आवास की मांग में तेजी और बुनियादी ढांचे पर सरकार के जोर के कारण निर्माण गतिविधि भी दृढ़ बनी रही। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में निजी उपभोग को ग्रामीण मांग में सुधार की संभावनाओं और बढ़ते उपभोक्ता विश्वास से समर्थन मिलेगा।

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Govt's focus on infra development to nurture sustained revival in investment cycle: RBI report
RBI Guidelines - फोटो : iStock

विस्तार

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति रिपोर्ट- अप्रैल 2024 के अनुसार बुनियादी ढांचा क्षेत्र के विकास पर सरकार के ध्यान और कारोबार में उत्साह के कारण देश में होने वाले निवेश में सतत सुधार जारी रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार घरेलू आर्थिक गतिविधि, मजबूत बुनियादी बातों के समर्थन से 2023-24 की पहली छमाही में मजबूत रही, हालांकि इस दौरान इसे मौन वैश्विक मांग से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 

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रिपोर्ट में आगे कहा गया कि जहां स्थिर निवेश और शुद्ध बाह्य मांग में कमी से वास्तविक जीडीपी वृद्धि को बढ़ावा मिला, वहीं निजी खपत को स्थिर शहरी मांग से समर्थन मिला। आपूर्ति पक्ष पर रिपोर्ट में कहा गया कि विनिर्माण गतिविधि मजबूत हुआ इसे इनपुट लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुधार से लाभ मिला।
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आवास की मांग में तेजी और बुनियादी ढांचे पर सरकार के जोर के कारण निर्माण गतिविधि भी दृढ़ बनी रही। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में निजी उपभोग को ग्रामीण मांग में सुधार की संभावनाओं और बढ़ते उपभोक्ता विश्वास से समर्थन मिलेगा।
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आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा बुनियादी ढांचा निर्माण पर लगातार जोर देने के साथ निजी कंपनियों के निवेश में तेजी आने और बाजार में सकारात्मक रुझान बढ़ने से निवेश में और सुधार हो सकता है। यह अर्थव्यवस्था में उत्पादकता और विकास को बढ़ावा देने के लिहाज से अच्छा संकेत है।

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार अर्थव्यवस्था की मध्यम और दीर्घकालिक विकास क्षमता बढ़ रही है, जो भौतिक बुनियादी ढांचे में सुधार जैसे संरचनात्मक कारकों से प्रेरित है। इसमें विश्व स्तरीय डिजिटल और भुगतान प्रौद्योगिकी का विकास; व्यापार करने में आसानी (इज ऑफ डूइंग बिजनेस); श्रम शक्ति की भागीदारी में वृद्धि; और राजकोषीय खर्च की गुणवत्ता में सुधा आदि शामिल हैं। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय में 11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11.11 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि की घोषणा की है।


सरकार ने 2023-24 में पूंजीगत व्यय को 37.5 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया। आरबीआई के सर्वे के मुताबिक, एक साल पहले कंज्यूमर कॉन्फिडेंस नई ऊंचाई पर पहुंच गया था। सर्वेक्षण से पता चलता है कि निजी कैपेक्स चक्र में तेजी के कारण निवेश गतिविधि की संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं। इसके अनुसार निरंतर और मजबूत सरकारी पूंजीगत व्यय; बैंकों और कॉरपोरेट्स की स्वस्थ बैलेंस शीट; मानव संसाधन के बढ़ते उपयोग से कारोबार जगत में सकारात्मक रुझान जारी है।

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