Biz Updates: प्याज निर्यात व गेहूं के स्टॉक पर केंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला, पढ़ें कारोबार जगत की अहम खबरें
Biz Updates: चुनावी राज्य महाराष्ट्र में, जहां प्याज की फसल प्रमुख रूप से उगाई जाती है, किसान एमईपी सीमा को हटाने की मांग कर रहे थे। माना जा रहा है कि इसी कारण सरकार ने यह फैसला लिया है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने व्यापारियों और मिल मालिकों द्वारा रखे जाने वाले गेहूं के स्टॉक की सीमा को और कड़ा कर दिया है, ताकि अनाज की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।
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केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात और गेहूं के स्टॉक से जुड़े दो बड़े फैसले लिए हैं। प्याज निर्यात लागू न्यूनतम निर्यात शर्त को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। सरकार की ओर से एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी गई। मई 2024 में मोदी सरकार ने प्याज निर्यात पर प्रतिबंध हटा लिया था, लेकिन न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 550 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तय किया था। अब प्रमुख घरेलू बाजारों में प्याज की कीमतें स्थिर हो गई हैं। वहीं, चुनावी राज्य महाराष्ट्र में, जहां प्याज की फसल प्रमुख रूप से उगाई जाती है, किसान एमईपी सीमा को हटाने की मांग कर रहे थे। माना जा रहा है कि इसी कारण सरकार ने यह फैसला लिया है।
निर्यातकों ने अगस्त में मीडिया से बातचीत में कहा था कि जून में भारत के प्याज निर्यात में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आने का अनुमान है, क्योंकि 550 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य और 40 प्रतिशत के निर्यात शुल्क ने भारतीय प्याज को प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अधिक महंगा बना दिया है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 31 जुलाई 2024 तक कुल 2.60 लाख टन प्याज का निर्यात किया जा चुका है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 17.17 लाख टन प्याज का निर्यात किया।
गेहूं के स्टॉक की सीमा कड़ी की गई
केंद्र सरकार ने व्यापारियों और मिल मालिकों द्वारा रखे जाने वाले गेहूं के स्टॉक की सीमा को और कड़ा कर दिया है। सरकार ने यह कदम अनाज की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया है। सरकार के नए आदेश के अनुसार, व्यापारी अब अपने स्टॉक में 3,000 मीट्रिक टन के मुकाबले केवल 2,000 मीट्रिक टन गेहूं ही रख सकते हैं।
सरकार ने गेहूं प्रसंस्करणकर्ताओं (प्रोसेसर) के लिए स्टॉक-धारण सीमा भी कड़ी कर दी है। इसके आदेश में कहा गया है कि प्रोसेसर अब मासिक स्थापित क्षमता का 60 प्रतिशत हिस्सा वित्त वर्ष 25 के शेष महीनों से गुणा करके रख सकते हैं। पहले यह स्थापित क्षमता का 70 प्रतिशत था। प्रोसेसर इकाइयों में बिस्किट और ब्रेड बनाने वाली कंपनियां आती हैं। त्योहारों से पहले मजबूत मांग के कारण पिछले कुछ सप्ताहों में घरेलू बाजारों में गेहूं की कीमतें बढ़कर लगभग 2,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं।
सरकार ने बासमती चावल पर एमईपी हटाया
सरकार ने शुक्रवार को कहा कि बासमती चावल पर 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटा दिया गया है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस कदम से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ेगी।
वाणिज्य विभाग के एक संचार के अनुसार, "बासमती चावल के निर्यात के लिए पंजीकरण-सह-आवंटन प्रमाण पत्र (आरसीएसी) जारी करने के लिए 950 मीट्रिक टन अमेरिकी डॉलर के वर्तमान न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को हटाने का निर्णय लिया गया है।"
एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) से निर्णय को लागू करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। हालांकि, यह भी कहा गया है कि एपीडा बासमती निर्यात के लिए किसी भी गैर-यथार्थवादी मूल्य के लिए निर्यात अनुबंध पर बारीकी से नजर रखेगा।
पीली मटर के आयात को न्यूनतम मूल्य शर्तों के बगैर अनुमति
सरकार ने यह भी बताया कि न्यूनतम आयात मूल्य और बंदरगाहों पर पाबंदियों के बगैर पीली मटर के आयात की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, पीली मटर की सभी खेपों के लिए आयात को तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन आयात निगरानी प्रणाली के तहत पंजीकृत कराना होगा। यह उन मामलों में लागू होगा जहां ढुलाई के लिए माल की पूरी जानकारी से संबंधित लदान बिल 31 दिसंबर, 2024 को या उससे पहले जारी किया गया हो।
रिफाइंड पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क बढ़ाया
सरकार ने कच्चे और रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर 20 सीमा शुल्क बढ़ाकर क्रमश: 20 प्रतिशत और 32.5 प्रतिशत कर दिया है। शुक्रवार को जारी वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के बीज के तेल पर मूल सीमा शुल्क शून्य से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।
रिफाइंड पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क 12.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 32.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इन कच्चे तेलों और रिफाइंड तेलों पर प्रभावी शुल्क क्रमशः 5.5 प्रतिशत से बढ़कर 27.5 प्रतिशत और 13.75 प्रतिशत से बढ़कर 35.75 प्रतिशत हो जाएगा। नई दरें शनिवार से प्रभावी होंगी।
मुंबई: रिजर्व बैंक ने बीएनपी पारिबा और तीन अन्य पर लगाया जुर्माना
भारतीय रिजर्व बैंक ने वैधानिक और नियामकीय अनुपालन में कुछ कमियों के लिए बीएनपी पारिबा पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। केंद्रीय बैंक ने अपने कुछ मानदंडों का पालन न करने के लिए हेवलेट पैकार्ड फाइनेंशियल सर्विसेज (इंडिया), एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट कंपनी और मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस पर भी जुर्माना लगाया है।
एक बयान में रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंक बीएनपी पारिबा पर 'अग्रिमों पर ब्याज दर' के संबंध में जारी कुछ निर्देशों का पालन न करने के लिए जुर्माना लगाया गया है। बैंक के पर्यवेक्षी मूल्यांकन के लिए वैधानिक निरीक्षण 31 मार्च, 2023 तक इसकी वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया गया था। उसके बाद बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटिस पर बैंक के जवाब और सुनवाई के दौरान रखे गए पक्ष पर विचार करने के बाद उसने पाया कि बैंक के खिलाफ लगे आरोप सही थे जिसके लिए मौद्रिक जुर्माना लगाना उचित था। केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘‘बैंक कुछ ऋणों के संबंध में समान ऋण श्रेणी के भीतर एकसमान बाह्य मानक दर अपनाने में विफल रहा।’’
इसके अलावा रिजर्व बैंक ने हेवलेट पैकार्ड फाइनेंशियल सर्विसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड पर 10.40 लाख रुपये, मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस लिमिटेड पर 7.9 लाख रुपये और एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट कंपनी लिमिटेड (पूर्व में फुलर्टन इंडिया क्रेडिट कंपनी लिमिटेड) 23.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
हालांकि, रिजर्व बैंक ने कहा कि जुर्माना वैधानिक और नियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य संस्थाओं द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर फैसला करना नहीं है।
विमानों की देरी से अगस्त में प्रभावित हुए 1.80 लाख यात्री
घरेलू विमानन कंपनियों की लेट लतीफी से यात्री परेशान हैं। अगस्त में विमानों की देरी के कारण 1.80 लाख यात्री प्रभावित हुए। इसके एवज में विमानन कंपनियों ने 2.44 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के मुताबिक, अगस्त में 38,599 फ्लाइट रद्द हुईं। इससे यात्रियों को मुआवजे और सुविधा के लिए कंपनियों को 1.14 करोड़ खर्च करने पड़े। 728 यात्रियों को यात्रा से रोक दिया गया। इस पर 77.96 लाख खर्च हुए। देश के विमानन उद्योग में सबसे अधिक 71 फीसदी विमान ही समय पर चल रहे हैं। अकासा के विमानों का समय पर प्रदर्शन 71.2 फीसदी, विस्तारा का 68.6 फीसदी रहा है। इंडिगो व एअर इंडिया का प्रदर्शन 66 फीसदी और स्पाइसजेट के सिर्फ 31 फीसदी विमान ही सही समय पर चले हैं। जनवरी से अगस्त तक कुल 10.55 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की।