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त्योहारी सीजन से पहले राहत: सरकार ने 31 दिसंबर तक बढ़ाई कच्चे चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की समयसीमा; जानिए सबकुछ

Fri, 23 Oct 2026 10:38 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 23 Oct 2026 10:38 AM IST
सार

  • त्योहारी सीजन में चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्चे चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की समयसीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। 
  • पहले 20 अगस्त को सरकार ने 10 लाख टन कच्चे चीनी के आयात की अनुमति 31 अक्टूबर तक के लिए दी थी।

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Govt Extends Duty-Free Raw Sugar Import Window Till Dec 31 to Boost Festive Supplies
चीनी - फोटो : amar ujala

विस्तार

त्योहारी सीजन के दौरान देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और आम उपभोक्ताओं को महंगाई के झटके से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक नई अधिसूचना के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन कच्चे चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अंतिम समयसीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। इससे पहले 20 अगस्त को सरकार ने 10 लाख टन कच्चे चीनी के आयात की अनुमति 31 अक्तूबर तक के लिए दी थी। चीनी उत्पादन के अनुमानों में आई गिरावट को देखते हुए सरकार का यह कदम घरेलू आपूर्ति शृंखला को मजबूती प्रदान करेगा।

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शुल्क-मुक्त आयात की समयसीमा क्यों बढ़ाई है?

देश में आगामी त्यौहारों के दौरान चीनी की खपत में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है, जिसके लिए पर्याप्त स्टॉक का होना बेहद जरूरी है। सरकार ने 20 अगस्त को ही टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन कच्चे चीनी के बिना सीमा शुल्क आयात को मंजूरी दे दी थी, जिसकी मियाद 31 अक्तूबर को खत्म हो रही थी। 

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हालांकि, घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत न हो और कीमतों में कोई अप्रत्याशित उछाल न आए, इसे ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्रालय ने आयात खिड़की को दो महीने के लिए आगे बढ़ाते हुए 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है। इस विस्तार से भारतीय रिफाइनरियों और आयातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्ची चीनी खरीदने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा।

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आयात की सुस्त चाल के पीछे क्या कारण हैं?

उद्योग जगत के आंकड़ों के अनुसार, सरकार द्वारा 10 लाख टन आयात की छूट दिए जाने के बावजूद अब तक लगभग 2.6 लाख टन कच्चे चीनी का ही आयात हो सका है। कुल कोटा के मुकाबले अब तक केवल एक-चौथाई हिस्से का ही आयात होना अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों को दर्शाता है।


आयात की इस सुस्त गति के पीछे मुख्य कारण 'मूल्य समानता' का न होना है। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी के दाम और घरेलू बाजार की कीमतों में अंतर होने के कारण आयात फिलहाल बहुत लाभदायक नहीं रह गया था। सरकार द्वारा समयसीमा बढ़ाए जाने का प्राथमिक उद्देश्य यही है कि जैसे ही वैश्विक बाजारों में कच्ची चीनी की कीमतें कम हों और आयात व्यवहार्य बने, वैसे ही कारोबारी तुरंत खेप मंगाकर घरेलू स्टॉक को मजबूत कर सकें।

देश में चीनी के उत्पादन और वार्षिक मांग का गणित क्या कहता है?

चालू विपणन वर्ष के लिए चीनी उत्पादन के अनुमान में आई कमी ही सरकार की इस सतर्कता की सबसे बड़ी वजह है। अक्तूबर से सितंबर तक चलने वाले विपणन वर्ष 2025-26 के लिए देश में चीनी का कुल उत्पादन 306 लाख टन रहने का ताजा अनुमान लगाया गया है। 

चीनी उत्पादन का यह गणित निम्नलिखित आंकड़ों से स्पष्ट होता है:

  • शुरुआती अनुमान: विपणन वर्ष 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का प्रारंभिक पूर्वानुमान 343 लाख टन रखा गया था।
  • संशोधित उत्पादन अनुमान: ताजा आकलन के अनुसार इसमें गिरावट आई है और उत्पादन घटकर 306 लाख टन रहने की संभावना है।
  • वार्षिक घरेलू मांग: भारत में हर साल लगभग 280 लाख से 285 लाख टन चीनी की खपत होती है।

हालांकि 306 लाख टन का अनुमानित उत्पादन घरेलू मांग (280-285 लाख टन) को पूरा करने के लिए सैद्धांतिक रूप से पर्याप्त है, लेकिन त्योहारी मांग और बफर स्टॉक की जरूरतों को देखते हुए सरकार आयात के विकल्प को खुला रखना चाहती है।

सरकार ने और क्या-क्या कदम उठाए हैं?

कच्ची चीनी के आयात की समयसीमा बढ़ाने के अलावा, सरकार ने सीमित उपलब्धता के बीच कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। बाजार में किसी भी तरह की जमाखोरी या कृत्रिम किल्लत को रोकने के लिए व्यापारियों और थोक विक्रेताओं पर स्टॉक रखने की सीमा लागू की गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर हिस्से में चीनी की आपूर्ति सुचारू बनी रहे और त्योहारी सीजन के दौरान आम जनता को स्थिर दरों पर चीनी उपलब्ध हो सके।

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