कालाबाजारी करने वालों के आएंगे बुरे दिन, सरकार बनाने जा रही है कठोर कानून
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बढ़ती महंगाई के मद्देनजर केंद्र सरकार कालाबाजारी के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार रसोई से लेकर रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तुओं के दाम पर काबू करने को लेकर के एक अहम बैठक आज करने जा रही है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के उपभोक्ता व खाद्य मंत्री शामिल होंगे, जिसमें कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के साथ आपूर्ति बढ़ाने की नई नीति तैयार की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से देश के थोक व खुदरा मूल्य सूचकांक पर हुए असर से सरकार हरकत में आ गई है। वह महंगाई को काबू में करने के तमाम पहलुओं पर राज्यों के साथ चर्चा कर कमर कसेगी। मई में खुदरा महंगाई दर 4.87 फीसदी रही है। यह लगातार सातवें महीने 4 फीसदी से अधिक है।
आरबीआई ने रखा है 4 फीसदी लक्ष्य
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इसे 2 फीसदी घटने-बढ़ने के आकलन के साथ 4 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में सरकार ने सब्जियां, दूध, दालों और अनाज की कीमतों को काबू में रखने के लिए कालाबाजारी सहित अन्य गतिविधियों पर अंकुश लगाने का निर्णय लिया है।
उपभोक्ता मंत्रालय के मुताबिक, सरकार का इरादा दरों को संतुलित रखने का है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के बढ़ने का ज्यादा असर महंगाई पर नहीं है, बल्कि अन्य ऐसे तमाम कारक हैं, जिनके चलते आम जनता को चीजें महंगी खरीदनी पड़ती हैं।
समुचित नीति पर विचार-विमर्श
सरकार के मुताबिक, आगामी बैठक में उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों के मंत्री रामविलास पासवान, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु, संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी शिरकत करेंगी।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री इसमें शामिल होंगे। उनसे जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम पर काबू रखने को केंद्र सख्त और समुचित नीति पर विचार-विमर्श करेगा।
कालाबाजारी पर प्रभावी तौर पर अंकुश लगाने के लिए इसमें राज्य के मंत्रियों से राय ली जाएगी। साथ ही, उनसे आपूर्ति की निरंतरता के लिए निगरानी व्यवस्था लागू करने पर चर्चा होगी। इस बैठक में नई नीति को अंतिम रूप देकर इसे निर्धारित तिथि से लागू करने की घोषणा की जा सकती है।
राज्यों को सहायता की होगी पहल
मंत्रालय के एक अधिकारी की मानें, तो राज्य सरकारें कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए हमेशा संसाधनों की कमी का हवाला देती हैं। उन्हें बैठक में इस पहलू पर केंद्र से आर्थिक या अन्य कोई सहायता की जरूरत होगी, तो उस पर चर्चा कर सैद्धांतिक मंजूरी दी जाएगी। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य के मंत्रिगण बैठक में खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू करने संबंधी बाधाओं को दूर करने पर भी चर्चा करेंगे।